जयपुरः राजस्थान विश्वविद्यालय में एक बार फिर चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं, लेकिन इस बार मामला शिक्षक संघ के चुनाव को लेकर गर्माया हुआ है. जहां एक ओर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोर्ट में यह दलील देते हुए छात्रसंघ चुनाव पर रोक लगवाई थी कि इससे शैक्षणिक गतिविधियां बाधित होती हैं, वहीं अब परिसर में शिक्षक संघ के चुनाव करवाए जा रहे हैं. प्रशासन के इसी निर्णय ने छात्र नेताओं में गुस्सा भड़का दिया है और उन्होंने खुलकर इसका विरोध शुरू कर दिया है.
विश्वविद्यालय चुनाव को लेकर दोहरा रवैया अपना रहा है. छात्रनेताओं का आरोप है कि जब छात्रसंघ चुनाव की बात आती है, तो विश्वविद्यालय शैक्षणिक बाधा का मुद्दा उठाता है, लेकिन जब शिक्षक संगठनों के चुनाव कराने की बात होती है, तब शैक्षणिक बाधा की बात को भुला दिया जाता है. छात्र नेता इसे “छात्र राजनीति को दबाने की साजिश” बता रहे हैं. छात्र नेता शुभम रेवाड़ का कहना है कि जब तक छात्रसंघ चुनाव की घोषणा नहीं होती, तब तक विश्वविद्यालय में किसी भी प्रकार के चुनाव नहीं होने दिए जाएंगे. एनएसयूआई के एक छात्र नेता ने कहा कि कोर्ट में विश्वविद्यालय की ही ओर से यह कहा गया था कि छात्रसंघ चुनाव से पढ़ाई प्रभावित होती है, इसलिए उन्हें रोका गया. अगर छात्रसंघ चुनाव शैक्षणिक कार्यों में बाधा हैं, तो फिर शिक्षक संघ चुनाव कैसे नहीं?इस पूरे विवाद के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन दबाव में है. सूत्रों के अनुसार, प्रशासन ने अभी इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन आंतरिक स्तर पर स्थिति को संभालने की कोशिशें जारी हैं. हालांकि, छात्र संगठनों ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन छेड़ेंगे.
कैंपस में छात्रों और शिक्षकों के बीच बढ़ते इस टकराव ने एक बार फिर विश्वविद्यालय को सुर्खियों में ला दिया है. छात्र लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि प्रशासन जानबूझकर छात्र राजनीति को कमजोर करने की रणनीति अपना रहा है. अब शिक्षक संघ चुनाव ने इस विवाद को और भड़का दिया है.अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन छात्र नेताओं की मांगों पर कोई कदम उठाता है या नहीं.