1931 के शहीदों पर फिर सियासी संग्राम: CM उमर अब्दुल्ला बोले- 1931 का आंदोलन ज़ुल्म के खिलाफ था, धार्मिक संघर्ष नहीं

1931 के शहीदों पर फिर सियासी संग्राम: CM उमर अब्दुल्ला बोले- 1931 का आंदोलन ज़ुल्म के खिलाफ था, धार्मिक संघर्ष नहीं

नई दिल्ली : 1931 के शहीदों पर फिर सियासी संग्राम छिड़ गया है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 1931 के शहीदों को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि 1931 का आंदोलन ज़ुल्म के खिलाफ था, धार्मिक संघर्ष नहीं. उमर अब्दुल्ला ने मजार-ए-शुहदा पर पाबंदियों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. 

उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन लोगों ने अत्याचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी और जम्मू-कश्मीर की गरिमा की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए. आज उन्हें श्रद्धांजलि देने से भी रोका जा रहा है. मजार-ए-शुहदा को सील करने का फैसला लेने वालों को पहले जम्मू-कश्मीर का इतिहास पढ़ना चाहिए था.

बैरिकेड और रोक शहीदों के बलिदान को मिटा नहीं सकते है. आज जिन्होंने रोका, वे कल चले जाएंगे, कश्मीर के लोग यहीं रहेंगे. 13 जुलाई के शहीदों को श्रद्धांजलि देना आगे भी जारी रहेगा.

1931 के शहीदों की कुर्बानी ने कश्मीर में जनजागरण की नींव रखी : महबूबा मुफ्ती 
वहीं PDP अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने भाजपा पर बड़ा हमला किया है. महबूबा मुफ्ती ने 1931 के कश्मीर शहीदों को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है. महबूबा मुफ्ती ने भाजपा पर शहीदों की विरासत को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया. 

उन्होंने कहा कि श्रद्धांजलि से रोकने के लिए उन्हें नजरबंद किया गया है. 1931 के शहीदों की कुर्बानी ने कश्मीर में जनजागरण की नींव रखी. महबूबा मुफ्ती ने भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और अशफाक उल्ला खान का भी उल्लेख किया है.