सेफ आई, सेफ फ्यूचर अभियान, डीडवाना-कुचामन जिला प्रशासन का नवाचार, देखिए खास रिपोर्ट

डीडवाना {नरपत जोया}: डीडवाना-कुचामन जिले में बच्चों की आंखों की सेहत को लेकर जिला प्रशासन ने एक नई पहल शुरू की है. कलेक्टर डॉक्टर महेंद्र खड़गावत की पहल पर “सेफ आई, सेफ फ्यूचर” अभियान का शुभारंभ हुआ, जिसके तहत स्कूलों में विद्यार्थियों की आंखों की जांच कराई जाएगी ताकि किसी भी बच्चे की पढ़ाई दृष्टि दोष के कारण प्रभावित न हो. 

डीडवाना-कुचामन जिला प्रशासन के नवाचार “सेफ आई, सेफ फ्यूचर” अभियान का शुभारंभ जिला कलेक्टर डॉक्टर महेंद्र खड़गावत ने किया. इस अवसर पर एडीएम मोहनलाल, सीएमएचओ डॉक्टर नरेंद्र चौधरी सहित जिलेभर के एसडीएम और कई विभागीय अधिकारी मौजूद रहे. कलेक्टर ख़डगावत ने बताया कि बढ़ते मोबाइल उपयोग और स्क्रीन टाइम के कारण बच्चों की दृष्टि कमजोर हो रही है, और अक्सर परिवारों को इसकी जानकारी भी नहीं होती. इसी समस्या को देखते हुए प्रशासन ने यह व्यापक अभियान शुरू किया है ताकि हर बच्चे की आँखों की जांच हो सके और जरूरत पड़ने पर उन्हें निशुल्क चश्मे दिए जा सकें. उन्होंने कहा कि आज बच्चों में मोबाइल फोन का उपयोग काफी बढ़ गया है, जिससे उनकी आँखों पर असर पड़ रहा है. कई बार बच्चों और उनके परिजनों को इसकी जानकारी नहीं होती, और पढ़ाई पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है. हमने ‘सेफ आई, सेफ फ्यूचर’ अभियान इसलिए शुरू किया है ताकि हर बच्चे की आंखों की जांच हो सके और जिनकी दृष्टि कमजोर है उन्हें निःशुल्क चश्मे उपलब्ध कराये जा सकें.”

अभियान के तहत जिले के करीब साढ़े तीन लाख विद्यार्थियों की आंखों की जांच की जाएगी. इसके लिए चिकित्सा विभाग की टीमें गठित कर दी गई हैं जो ब्लॉकवार विद्यालयों में जाकर जांच करेंगी. जिन विद्यार्थियों की आँखें कमजोर पाई जाएंगी, उन्हें संबंधित अस्पताल में विस्तृत जांच के लिए भेजा जाएगा और भामाशाह योजना के तहत उन्हें निशुल्क चश्मे प्रदान किए जाएंगे. सीएमएचओ डॉक्टर नरेंद्र चौधरी ने बताया कि फिलहाल यह अभियान सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए शुरू किया गया है, लेकिन इच्छुक निजी विद्यालय भी इसमें शामिल हो सकेंगे. उन्होंने बताया कि “जिला कलेक्टर की इस पहल के तहत हमने जिलेभर में मेडिकल टीमों का गठन कर दिया है. लगभग साढ़े तीन लाख विद्यार्थियों की आंखों की जांच की जाएगी. फिलहाल अभियान सरकारी स्कूलों के लिए है, लेकिन यदि निजी विद्यालय भी इसमें शामिल होना चाहेंगे, तो हम उन्हें भी जोड़कर उनके विद्यार्थियों की जांच कराएंगे. नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रवीणा टंडन ने इस अभियान को बच्चों के सर्वांगीण विकास से जुड़ी उपयोगी पहल बताया. उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई बेहतर होगी बल्कि उनकी आत्मविश्वास और मानसिक एकाग्रता भी बढ़ेगी. स्कूल स्तर पर स्क्रीनिंग होने से उन बच्चों की भी मदद होगी जिन्हें अब तक अपनी नजर कमजोर होने का अहसास नहीं था. उन्होंने बताया कि ये एक बहुत ही उपयोगी और सराहनीय पहल है. हमारी टीमें स्कूलों में जाकर बच्चों की आंखों की स्क्रीनिंग करेंगी, जिनकी आंखें कमजोर पाई जाएंगी, उन्हें आगे की जांच के लिए चिकित्सालय लाया जाएगा और निशुल्क चश्मे दिए जाएंगे. इससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास दोनों ही बेहतर होंगे.

सेफ आई, सेफ फ्यूचर” अभियान से जिले के हजारों बच्चों को नई रोशनी और नई उम्मीद मिलेगी. जिला प्रशासन का मानना है कि अगर बच्चों की आंखें स्वस्थ रहेंगी तो उनका भविष्य भी सुरक्षित रहेगा.