जयपुर: मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के यात्री सुरक्षा को लेकर दिए गए सख्त निर्देशों के बाद परिवहन विभाग एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है. परिवहन सचिव शुचि त्यागी के निर्देश पर 1 नवंबर से जयपुर में “सुरक्षित सफ़र अभियान” शुरू किया जा रहा है. यह अभियान खास तौर पर सभी स्लीपर बसों की सुरक्षा मानकों की जांच के लिए चलाया जाएगा.
आरटीओ प्रथम जयपुर राजेंद्र सिंह शेखावत के नेतृत्व में यह अभियान एक नवाचार के रूप में शुरू किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. अभियान के तहत जयपुर में आने-जाने वाली सभी स्लीपर बसों की सघन जांच की जाएगी.परिवहन विभाग ने सभी स्लीपर बस संचालकों को पहले ही 15 दिन का समय दिया था ताकि वे अपनी बसों को निर्धारित सुरक्षा मापदंडों के अनुरूप तैयार कर सकें. अब 1 नवंबर से जो भी बसें इन मानकों पर खरी नहीं उतरेंगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. 1 नवंबर के बाद किसी भी स्लीपर बस में सुरक्षा मानकों की कमी पाए जाने पर 1 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा. साथ ही बस को मौके पर ही सीज़ कर दिया जाएगा. यह कार्रवाई जयपुर समेत राज्य के सभी प्रमुख मार्गों पर संचालित बसों पर लागू होगी.
-प्रत्येक स्लीपर बस में एग्जिट गेट निर्धारित मापदंडों के अनुसार होना अनिवार्य होगा.
-हर सीट पर हैमर (कांच तोड़ने का यंत्र) लगाना आवश्यक होगा ताकि दुर्घटना की स्थिति में यात्री बस से बाहर निकल सकें.
-एक्स्ट्रा सीटें और गैर-अनुमोदित स्लीपर कट हटाकर बस को मूल प्रोटोटाइप में लाना अनिवार्य होगा.
-सभी बसों में अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) रखना आवश्यक होगा.
यह “सुरक्षित सफ़र अभियान” पूरे नवंबर महीने भर चलेगा. अभियान के तहत जयपुर से गुजरने वाली तथा अन्य जिलों से संचालित सभी स्लीपर बसों की प्रवर्तन शाखा द्वारा लगातार निगरानी और चेकिंग की जाएगी.आरटीओ प्रथम राजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा शुरू किए गए इस अभियान का यह दूसरा चरण है. इसके पहले चरण में स्कूल और कॉलेज बसों को इस दायरे में लाया गया था, जहां सभी शैक्षणिक संस्थानों की बसों में सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस ट्रैकर और पैनिक बटन लगवाए गए थे.
उस समय इस अभियान को व्यापक सफलता मिली थी और इससे कई हादसों की रोकथाम भी हुई थी.अब उसी “सुरक्षित सफ़र” अभियान का विस्तार कॉंट्रैक्ट कैरिज बसों, विशेषकर स्लीपर बसों, तक किया जा रहा है.इस अभियान से यात्रियों को सीधे तौर पर लाभ होगा. जहां एक ओर बस संचालकों को सुरक्षा के प्रति जवाबदेह बनाया जाएगा, वहीं आम यात्रियों को अधिक सुरक्षित और मानक अनुरूप परिवहन सेवा मिलेगी.