11 मार्च को मनाया जाएगा शीतला अष्टमी का पर्व, कल होगा ‘रांधा-पुआ’

11 मार्च को मनाया जाएगा शीतला अष्टमी का पर्व, कल होगा ‘रांधा-पुआ’

जयपुर : 11 मार्च को शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा. कल ‘रांधा-पुआ’ होगा. एक दिन पहले माता के भोग का भोजन बनता है. माता शीतला की पूजा को शीतला अष्टमी समर्पित है. होली के बाद चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को ये पर्व मनाया जाता है. कई जगहों पर बसौड़ा या बसोड़ा के नाम से भी ये पर्व प्रसिद्ध है.

हिंदू परंपरा में शीतला अष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व है. परिवार में सुख-शांति और बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए इस पर्व को मनाया जाता है. शीतला अष्टमी के दिन घरों में चूल्हा नहीं जलता है. एक दिन पहले बना ठंडा भोजन माता शीतला को भोग लगाया जाता है.

11 मार्च रात 1:54 बजे से शुरू होगी अष्टमी तिथि:
-11 मार्च रात 1:54 बजे से शुरू होगी अष्टमी तिथि
-12 मार्च सुबह 4:19 बजे समाप्त होगी अष्टमी तिथि
-सुबह 6:36 बजे से शाम 6:27 बजे तक रहेगा पूजा का शुभ मुहूर्त
-श्रद्धालु माता शीतला की पूजा-अर्चना कर करेंगे सुख-शांति की कामना

शीतला अष्टमी पर ठंडा या बासी भोजन चढ़ाने की परंपरा:
शीतला अष्टमी पर ठंडा या बासी भोजन चढ़ाने की परंपरा है. धार्मिक कथा के अनुसार गर्म भोजन से माता शीतला का मुख जल गया था. माता के क्रोधित होने पर एक वृद्ध महिला ने उन्हें ठंडा भोजन अर्पित किया. ठंडा भोजन अर्पित करने से माता शीतला प्रसन्न हुईं. तभी से शीतला अष्टमी पर ठंडा या बासी भोजन चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है.

शीतला अष्टमी के पीछे बताया जाता है वैज्ञानिक कारण:
शीतला अष्टमी के पीछे वैज्ञानिक कारण बताया जाता है. मौसम परिवर्तन के समय  शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाता है. यह दिन ठंड के बाद गर्मी की शुरुआत का संकेत माना जाता है. मान्यता-इस दिन के बाद बासी भोजन से बचने की सलाह दी जाती थी. बदलते मौसम में बीमारियों से बचाव के लिए ताजा भोजन शुरू करने का  संदेश दिया जाता है.