VIDEO: परिवहन निरीक्षकों का प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार, कानौता थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजस्थान में परिवहन निरीक्षकों का प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार लगातार एक सप्ताह से जारी है. कानौता थाना क्षेत्र में एक परिवहन निरीक्षक के साथ कथित अभद्र व्यवहार और मारपीट के मामले में कानौता थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब लंबा खिंचता जा रहा है.

परिवहन निरीक्षक संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांग पूरी नहीं होती, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे. इससे परिवहन विभाग के कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं और आमजन को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.  संघ का कहना है कि घटना के बाद पुलिस प्रशासन की ओर से कार्रवाई का आश्वासन जरूर दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम सामने नहीं आया. इसी कारण 23 जुलाई से प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू किया गया था, जो अब सातवें दिन भी जारी है , बीते एक सप्ताह के दौरान परिवहन निरीक्षक संघ ने अपनी मांगों को लेकर कई स्तरों पर प्रयास किए हैं. अधिकारियों से वार्ता, ज्ञापन सौंपने और धरना-प्रदर्शन जैसी सभी लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं अपनाई जा चुकी हैं, लेकिन अभी तक कोई ऐसा निर्णय सामने नहीं आया है जिससे आंदोलन समाप्त हो सके. संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन और तेज किया जा सकता है. कार्य बहिष्कार के चलते प्रदेशभर में परिवहन विभाग की प्रवर्तन संबंधी गतिविधियों पर असर दिखाई दे रहा है. 

सड़क पर वाहनों की जांच, नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई, विशेष अभियान और अन्य निरीक्षण कार्य प्रभावित हुए हैं. इससे विभागीय कामकाज की गति धीमी पड़ गई है और सरकार की राजस्व व प्रवर्तन व्यवस्था पर भी असर पड़ा है , परिवहन निरीक्षकों के कार्य बहिष्कार से विभाग को हर रोज़ 5 करोड़ से अधिक का राजस्व नुकसान हो रहा है , संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत विवाद का नहीं बल्कि परिवहन निरीक्षकों के सम्मान, सुरक्षा और गरिमा का प्रश्न है. उनका कहना है कि यदि ड्यूटी के दौरान अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार होता है और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तो भविष्य में अन्य कर्मचारियों का मनोबल भी प्रभावित होगा. इसलिए संघ इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता करने के पक्ष में नहीं है.

दूसरी ओर परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन के बीच इस गतिरोध को समाप्त कराने के प्रयास लगातार जारी बताए जा रहे हैं. हालांकि अब तक ऐसा कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है जिससे आंदोलन समाप्त होने की संभावना बने. ऐसे में कर्मचारियों और सरकार के बीच गतिरोध बना हुआ है.अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस विवाद का समाधान कैसे निकलेगा. यदि जल्द ही दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती है तो परिवहन विभाग का कामकाज और अधिक प्रभावित हो सकता है. प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह कर्मचारियों का विश्वास भी बनाए रखे और विभागीय कार्यों को भी सामान्य स्थिति में लौटाए. फिलहाल परिवहन निरीक्षक संघ अपने रुख पर कायम है और साफ कह चुका है कि मांग पूरी होने तक कार्य बहिष्कार जारी रहेगा. ऐसे में सबकी निगाहें सरकार और पुलिस प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं.