चिकित्सा विभाग में फार्मेसियों का डिस्काउंट "खेल", RGHS योजना में दवा दुकानदारों का बड़ा कारनामा उजागर, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS)में कुछ फार्मेंसियां डिस्काउंट के नाम पर बड़ा "खेल" कर रही है. ताजा मामला दस जिलों में सामने आया है,जहां अलग-अलग दवा दुकानदारों ने एक ही कम्पनी की एक ही दवा को सरकारी सिस्टम में बेचकर जैसा मन किया उतना भुगतान उठा लिया. स्कीम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए हो रही ऑडिट में ये प्रकरण पकड़े गए है. जिसके बाद 65 से अधिक फार्मेंसियों पर कार्रवाई की तलवार लट गई है. 

प्रदेश के सरकारी कर्मचारी, पेंशनर्स और जनप्रतिनिधियों को निशुल्क स्वास्थ्य सेवा देने के लिए चलाई जा रही RGHS योजना में फर्जीवाड़े खत्म होने का नाम नहीं ले रहे है. यदि पिछले एक माह की बात की जाए तो 24 अस्पतालों पर 3 करोड का जुर्माना लगाया जा चुका है. इसके साथ ही 58 एलोपैथिक और 11 आयुर्वेदिक फार्मेसी स्टोर्स को योजना से हटाया जा चुका है. इन कार्रवाईयों के दौरान ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में कुछ ऐसे प्रकरण सामने आए है, जिन्होंने पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में ला दिया है. योजना की प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ निधि पटेल की निगरानी में चल रही जांच में सामने आया है कि कुछ फार्मेंसियां डिस्काउंट के नाम पर लाखों के वारे-न्यारे कर लिया. इस दौरान कुछ प्रकरणों तो ऐसे सामने आए,जिसमें एक ही कम्पनी की एक ही दवा की एवज में अलग-अलग फार्मेंसियों ने जो भुगतान उठाया, उसमें रातदिन का अंतर मिला. फर्जीवाड़ा करने वाले कितने बेखौफ रहे इसका अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि कई दुकानदारों ने एक तरफ जहां जेनेरिक को भी ब्रांडेड बताकर कम डिस्काउंट दिया, तो वहीं दूसरी तरफ कुछ मामलों में बगैर डिस्काउंट के MRP पर बिलिंग करके राजस्व को चपत लगाई गई. आईए आपको बताते है फार्मेसियों का डिस्काउंट खेल की बानगी.

केस - एक
कम्पनी : ABBOTT
इंजेक्शन : मिक्सटार्ड पेनफिल इंसुलिन
किसी बीमारी में उपयोग : डायबिटीज
दवा विक्रेताओं ने उठाया भुगतान : एक ही कंपनी के इस इंसुलिन को एक मेडिकल स्टोर ने 156 रुपए में दिया तो दूसरे मेडिकल स्टोर ने 373 रुपए में दिया. लेकिन इसी इंसुलिन को तीसरे मेडिकल स्टोर ने 1868 रुपए में दिया. 

केस - दो
कम्पनी : RPG Life Sciences Ltd.
दवा : डेनब्री
किसी बीमारी में उपयोग : मेनोपॉज के बाद ऑस्टिपोरोसिस के इलाज में उपयोग, इसके अलावा कैंसर से जुड़ी हड्डी की दिक्कतों में भी उपयोगी
दवा विक्रेताओं ने उठाया भुगतान : इस दवा को एक मेडिकल स्टोर ने 6,500 रुपए में दिया,जबकी दूसरे मेडिकल स्टोर ने इसी दवा पर 17 हजार 98 तक वसूले.

केस - 3
कम्पनी : नोवो नॉर्डिस्क
इंजेक्शन : मिक्सटार्ड पेनफिल इंसुलिन
किसी बीमारी में उपयोग :  डायबिटीज
दवा विक्रेताओं ने उठाया भुगतान : एक ही कंपनी के इस इंसुलिन को एक मेडिकल स्टोर ने 274 रुपए में दिया तो दूसरे मेडिकल स्टोर ने 373 रुपए में दिया. लेकिन इसी इंसुलिन को तीसरे मेडिकल स्टोर ने 1868 रुपए में दिया.     

ये केस तो सिर्फ एक बानगी है. कुछ केस ऐसे भी सामने आए है, जिसमें दुकानदार ने जेरेरिक श्रेणी की दवा को ब्रांडेड दर्शाकर मोटा मुनाफा कमाया. उदाहरण के तौर पर बैक्टीरियल इंफेक्शन को खत्म करने के लिए एक एंटीबायोटिक दवा के रूप में उपयोग 5,155 रुपए एमआरपी वाले  "GLMERO" इंजेक्शन को मेडिकल स्टोर ने 210 रुपए में खरीदा. जेनेरिक श्रेणी की इस दवा पर आरजीएचएस को 40 फीसदी डिस्काउंट दिया जाना चाहिए था,लेकिन मेडिकल स्टोर ने सिर्फ 12 फीसदी ही डिस्काउंट दिया. कुछ मामले तो ऐसे भी प्रकाश में आए है, जिसमें डिस्काउंट के बजाय MRP पर ही बिलिंग की गई. इस पूरे मामले को लेकर राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने बताया कि योजना में हर रोज पेश होने वाले मेडिकल स्टोर्स के बिलों की विभिन्न स्तरों पर जांच की जा रही है. संभावित अनियमितताओं की पहचान के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित विश्लेषण प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है. इस तकनीक के माध्यम से आर्टिफिशिअल मूल्य वृद्धि, असामान्य एमआरपी, गलत प्राइंजिग,अप्रमाणित दावे वाले मामलों की पहचान कर कार्रवाई तय की जा रही है.