VIDEO: कांग्रेस के लिए निकाय चुनाव के रिजल्ट के क्या है मायने? कांग्रेस का बीजेपी को कड़ी टक्कर देने का दावा, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजस्थान के निकाय चुनाव की जंग में बीजेपी ने बाजी मार ली है. यह सच है कि सीट और वोट दोनों के हिसाब से बीजेपी पार्टी कांग्रेस से आगे रही. लेकिन राजस्थान के सियासी इतिहास में भाजपा और कांग्रेस में निकाय चुनाव में महज एक फीसदी वोट का मामूली गेप भी पहली बार रहा है. इसलिए कांग्रेस नतीजों को अपनी सियासी वापसी की आहट मान  रही है. 

राजस्थान के निकाय चुनाव इस बार कई कारणों के चलते अहम थे. क्योंकि एक तो पहली बार राजस्थान  में निकायों के चुनाव एक साथ हुए. अब.चुनावी जंग में भले ही बीजेपी ने मैदान मार लिया हो लेकिन नतीजों के कई गहरे सियासी मायने भी है. सत्तारूढ़ दल भाजपा सरकार और मजबूत संगठन के बलबूते कई जगह बहुमत से बोर्ड बनाने में सफल रही.सीट और वोट हर एंगल से बीजेपी पार्टी कांग्रेस से आगे रही. लेकिन फिर भी नतीजों में कई सियासी संकेत साफ नजर आ रहे हैं. उधर.कांग्रेस हारकर भी गदगद नजर आ रही है क्योंकि वह इसको अपनी सियासी वापसी करार दे रही है.

आखिर कांग्रेस के लिए क्या है निकाय चुनाव नतीजों के मायने
-कांग्रेस खेमे में हार के बावजूद भी देखी जा रही है खुशी
-कांग्रेस  शहरी वोट बैंक में सेंध लगाने को बता रही है अपनी जीत
-बीजेपी के कई दिग्गजों के गढ़ ढहने से कांग्रेस थिंक टैंक खुश
-अजमेर में कांग्रेस 36 साल बाद भाजपा से रही आगे
-मदन राठौड़ और वसुंधरा राजे के जिलों में कांग्रेस का रहा शानदार प्रदर्शन
-बीकानेर निगम चुनाव में कांग्रेस को मिला पूर्ण बहुमत
-भाजपा और कांग्रेस में रहा केवल एक फीसदी वोट का अंतर
-जयपुर निगम चुनाव में कांग्रेस को बीजेपी से 14 हजार वोट ज्यादा मिले
-पर निर्दलीयों को मिले अच्छे वोट कांग्रेस के लिए है अब सिरदर्द
-कांग्रेस के 67 में से करीब 38 विधायक रहे नॉन परफॉर्म  

दरअसल कांग्रेस खेमे में हार में भी खुश रहने का बड़ा कारण यह माना जा रहा है कि इससे पहले निकाय चुनाव में कांग्रेस ने इतना परफॉर्म नहीं किया था. यहां तक कि सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस शहरी सरकार बनाने में पिछड़ जाती थी. दरअसल राजस्थान की सियासी डेमोग्राफी के तहत बीजेपी की हमेशा से शहरों में अच्छी पकड़ रही है. क्योंकि शहरों में बीजेपी का कोर वोटर काफी तादाद में रहता है. लेकिन इस बार कोर वोटर की नाराजगी और निर्दलीयों के दमखम के चलते बीजेपी को झटका जरूर लगा. लेकिन सरकार,मजबूत संगठन और कार्यकर्ताओं की बदौलत बीजेपी फिर भी आगे रही.

उधर अब भले ही कांग्रेस इस रिजल्ट में अपनी सत्ता की वापसी की आहट सुन रही हो. लेकिन नतीजे बताते है कि अभी भी उसे काफी मेहनत की जरूरत है. क्योंकि 67 में से 38 विधायक अपने क्षेत्र में बहुमत नहीं दिला पाए हैं. वहीं निर्दलियों के अच्छे वोट ले जाना भी कांग्रेस के लिए शुभ सियासी संकेत नहीं है. लेकिन हा, कांग्रेस के इस दावे पर जरूर यकीनन किया जा सकता है कि इस बार उसने कड़ी टक्कर बीजेपी को जरूर दी. अब देखते है इन नतीजों के बाद कांग्रेस पंचायत चुनाव की जंग जीतने के लिए क्या रणनीति प्लान करती है.