जयपुर: GEN Z आंदोलन के कारण केपी शर्मा ओली के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे को 48 घंटे हो गए हैं, लेकिन अभी तक नेपाल में राजनीतिक अनिश्चितता का वातावरण है. उल्लेखनीय नेपाल में राजनीतिक संकट और विरोध प्रदर्शनों के बाद 2008 में राजशाही समाप्त कर दी गई थी इसके बावजूद राजपरिवार का नेपाल की सरकारों में दखल रहा है यहां के पूर्व राजपरिवार ने युवाओं के आंदोलन का समर्थन किया.खास बात ये है कि नेपाल के राजपरिवार का राजस्थान से गहरा रिश्ता और शेखावाटी से रिश्तेदारी.
ऐसा कहा जाता है कि नेपाल में राजशाही के बीज राजस्थान के मेवाड़ से है.कई ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, नेपाल के शाही वंश यूं कहे शाह वंश की जड़ें राजस्थान के मेवाड़ राजवंश से जुड़ी हुई हैं.ऐसा माना जाता है कि चित्तौड़ के रावल समर सिंह के छोटे भाई कुंभकरण 13वीं शताब्दी में चित्तौड़ पर अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के बाद नेपाल चले गए थे.उनके वंशजों ने बाद में नेपाल में अपना राज्य स्थापित किया.नेपाल के राजा पृथ्वी नारायण शाह, जिन्होंने आधुनिक नेपाल की स्थापना की, इसी वंश के थे इसलिए, नेपाल के राजाओं और राजस्थान के मेवाड़ के सिसोदिया वंश के बीच में ऐतिहासिक मेल है.रिश्तेदारियों का सिलसिला तो आज तक जारी है.
जयपुर रियासत के तहत शेखावाटी में सीकर एवं नेपाल राजवंश का करीब तिरासी साल पुराना गहरा रिश्ता रहा है वर्तमान में सीकर के पूर्व राव राजा विक्रम सिंह की पुत्री राजकुमारी हिमानी शेखावत नेपाल के शाही खानदान की युवरानी है.हिमानी ने पूर्व सम्राट ज्ञानेन्द्र के पुत्र पारस से विवाह किया है सीकर के तत्कालीन रावराजा कल्याण सिंह के इकलौते पुत्र हरदयाल सिंह ने सन् 1942 में नेपाल सम्राट जंग बहादुर राणा की पुत्री आद्या कुमारी से लखनऊ में विवाह किया था.
सन् 1944 में आद्या कुमारी का सीकर के राज महल में निधन हो गया इसके बाद हरदयाल सिंह ने 25 फरवरी 1948 को नेपाल के तत्कालीन सम्राट त्रिभुवन देव की पुत्री त्रेलोक्य राज लक्ष्मी से दूसरा विवाह किया इतिहासकार महावीर पुरोहित के मुताबिक युवराज हरदयाल सिंह की बारात सीकर से स्पेशल ट्रेन द्वारा गोरखपुर तक पहुंची.वहां से बराती घोड़ों और जीपों से काठमांडू पहुंचे. सीकर की यह बारात काठमांडू के सिंह दरबार में सात दिन रुकी. जोधपुर, कश्मीर आदि रियासतों के राजा महाराजा इस बरात में शामिल थे.
6 फरवरी 1959 को हरदयाल सिंह की सीकर में हुई मृत्यु के बाद संवेदना प्रकट करने नेपाल सम्राट महेंद्र विक्रम सिंह देव सीकर आए थे. हरदयाल सिंह की पत्नी त्रेलोक्य राजलक्ष्मी ने सीकर रियासत से जुड़े सरवड़ी ठिकाने से गोद लिया था. सरवड़ी के नारायण सिंह के पुत्र विक्रम सिंह शेखावत को गोद लेकर सीकर का राजा बनाया. बाद में विक्रम सिंह भी नेपाल सम्राट के पास चले गए. विक्रम सिंह का विवाह भी नेपाल राजवंश में रिपुला सिंह से हुआ.
विक्रम सिंह की एक पुत्री हिमानी का विवाह नेपाल सम्राट ज्ञानेंद्र के पुत्र पारस से हुआ.
नेपाल राजवंश का राजस्थान के राज्वपरिवारों से ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के सिंधिया परिवार से भी खास नाता रहा.केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की माता और पूर्व केंद्रीय मंत्री माधव राव सिंधिया की पत्नी माधवी राजे सिंधिया का नाता नेपाल के राणा राजवंश परिवार से है. सिंधिया परिवार को 60 के दशक में नेपाल के राजपरिवार से विवाह का प्रस्ताव आया था, जिसके बाद 1966 में माधवी राजे का सिंधिया राजघराने के महाराजा माधवराव सिंधिया से विवाह हुआ था.इस राजवंश के प्रमुख जुद्ध शमशेर जंग बहादुर राणा थे.वह नेपाल के प्रधानमंत्री भी रहे. राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की बेटी है.वसुंधरा राजे राजस्थान की दो बार मुख्यमंत्री रही माधवराव सिंधिया इनके भाई लगते थे.