जयपुर राज्यपाल कलराज मिश्र बोले, प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों पर नए रूप में शोध और अनुसंधान की जरूरत

राज्यपाल कलराज मिश्र बोले, प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों पर नए रूप में शोध और अनुसंधान की जरूरत

 राज्यपाल कलराज मिश्र बोले, प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों पर नए रूप में शोध और अनुसंधान की जरूरत

जयपुर: राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों पर नए रूप में शोध और अनुसंधान की जरूरत बताते हुए शनिवार को कहा कि आदिवासी जनजीवन में वनस्पतियों का प्राचीन औषधीय ज्ञान सहज रूप में मौजूद है. राज्यपाल मिश्र ने गोविन्द गुरू जनजातीय विश्वविद्यालय बांसवाड़ा के दीक्षांत समारोह को ऑनलाइन तरीके से सम्बोधित करते हुए इस क्षेत्र में प्रचलित प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों पर नए रूप में शोध और अनुसंधान किए जाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की दैनिक परम्पराओं में पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा वैज्ञानिक ज्ञान रचा-बसा है. उन्होंने कहा कि इस ज्ञान को भी आधुनिक संदर्भों में प्रासंगिक बनाने के लिए गंभीरता से प्रयास किए जाने चाहिए.

उन्होंने विश्वविद्यालय को आदिवासी कला और संस्कृति के संरक्षण के साथ जनजातीय परम्पराओं और भाषाओं पर शोध का प्रमुख केन्द्र बनाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि आदिवासी बोलियों, परम्पराओं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े उत्सवों के साथ आदिवासी समाज के मेले-उत्सवों को कैसे संरक्षित किया जाए, इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है.राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के कुलपति सचिवालय-माही भवन तथा जनजाति संग्रहालय का ऑनलाइन तरीके से लोकार्पण किया. उन्होंने विश्वविद्यालय की पत्रिका ‘प्रतिध्वनि’ का भी लोकार्पण किया.

 

समारोह में 2021 में वाणिज्य, विज्ञान, कला एवं विधि संकाय में सफल रहे विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएचडी की उपाधियां तथा सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले 21 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए.उच्च शिक्षा राज्य मंत्री राजेन्द्र सिंह यादव ने कहा कि आदिवासी अंचल का विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्र की प्रतिभाओं का निखारने के लिए इस विश्वविद्यालय की स्थापना सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम है.

गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (अमूल) के प्रबन्ध निदेशक डॉ. आर.एस. सोढी ने कहा कि युवा जनसंख्या ही भारत की असली शक्ति है. उन्होंने कहा कि युवाओं को जापान, कोरिया, चीन जैसे देशों की भाषाओं का ज्ञान अर्जित करना चाहिए ताकि वे अपने कौशल का उपयोग कर बेहतर रोजगार प्राप्त कर सकें.कुलपति प्रो. इन्द्रवर्धन त्रिवेदी ने बताया कि विश्वविद्यालय से सम्बद्ध वागड़-कांठल अंचल के 152 महाविद्यालयों में एक लाख 25 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में 500 से अधिक शोधार्थी जनजातीय संस्कृति, ज्ञान सहित विभिन्न विषयों में अध्ययनरत हैं.

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