Jaipur: प्रदेश के SMS अस्पताल में फिर अंगदान की मुहिम, बस्सी के बैनाड़ा गांव का ब्रेनडेड 'विशाल' 4 जरूरतमंदों को दे गया नई जिंदगी

Jaipur: प्रदेश के SMS अस्पताल में फिर अंगदान की मुहिम, बस्सी के बैनाड़ा गांव का ब्रेनडेड 'विशाल' 4 जरूरतमंदों को दे गया नई जिंदगी

जयपुर: कोरोना की रफ्तार धीमी पड़ने के साथ ही जीवन बचाने की मुहिम एकबार फिर गति पकड़ने लगी है. जी हां, हम बात कर रहे है अंगदान महादान की. प्रदेश के सबसे बड़े एसएमएस अस्पताल में एक सप्ताह के भीतर दूसरा सफल कैडेबर ट्रांसप्लांट आज किया गया. इस दौरान 14 वर्षीय बस्सी जयपुर निवासी "विशाल" ने ब्रेनडैड होने के पश्चात दिया 4 लोगों को जीवनदान दिया.

विशाल के परिवारजन को अंगदान के लिए प्रेरित किया गया:
एसएमएस मेडिकले कॉलेज के प्राचार्य और सोटो चेयरमैन डॉ सुधीर भंडारी ने बताया कि स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन की टीम डॉ. अमरजीत मेहता, डॉ देवेन्द्र पुरोहित, डॉ मनीष शर्मा, डॉ अजीत सिंह व रोशन बहादुर तथा सवाई मानसिंह असप्ताल के ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटरों के अथक प्रयासों से विशाल के परिवारजन को अंगदान के लिए प्रेरित किया गया. परिजनों की सहमति मिलने के बाद देर रात कैडेबर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू हुई. इस दौरान दोनों किडनी एसएमएस अस्पताल में ही जरूरतमंद मरीजों को ट्रांसप्लांट की गई. लिवर को महात्मा गांधी अस्पताल, जयपुर में प्रत्यारोपित किया गया, वहीं राजस्थान में कोई भी जरूरमंद मरीज ना होने के कारण हार्ट व लंग्स को चार्टर प्लेन से चेन्नई भेजा गया. 

- बस्सी के ब्रेनडेड विशाल का चैन्नई तक धडकता रहा दिल
- प्रदेश के 41 वें कैडेबर ट्रांसप्लांट से जुड़ी खबर
- जयपुर में नहीं मिला कोई मैंचिंग का जरूरमंद मरीज
- नोटो के जरिए चैन्नई अपोलो हॉस्पिटल को आवंटित किए गए हार्ट और लग्ंस
- ऐसे में रात करीब 3  बजे एसएमएस से एयरपोर्ट तक बनाया गया ग्रीन कॉरिडोर
- फिर चार्टर प्लेट ने दोनों अंगों को भेजा गया चेन्नई
- हार्ट व लंग्स दोनों ही चेन्नई के अपोलो हॉस्पिटल में 46 वर्षीय महिला को प्रत्यारोपित किया गया

14 वर्षीय बस्सी निवासी विशाल 26 जनवरी को जयपुर में अपने तीन दोस्तों के साथ बाईक से कहीं जा रहा था. इस दौरान चल रही बस के ड्राईवर ने अचानक ब्रेक लगा दिये जिससे बाईक असंतुलित होकर बस से टकरा गई तथा हेलमेट ना पहनने की वजह से विशाल गंभीर रूप से घायल हो गया. उसे सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती करवाया गया. 31 जनवरी को हालत नाजुक होने के कारण परीक्षण किए गए और विशाल को ब्रेन डैथ घोषित कर दिया गया. परिवार के सदस्यों की समझाइश के बाद 2 फरवरी को विशाल के परिवारजन द्वारा अंगों का दान करने का पुण्य फैसला लिया.  

परिजनों के फैसले से चार जरूमंद मरीजों को जरूर नई जिन्दगी मिल गई:
सड़क हादसे के बाद भले ही विशाल के जीवन को नहीं बचाया जा सका. लेकिन उसके परिजनों के फैसले से चार जरूमंद मरीजों को जरूर नई जिन्दगी मिल गई. परिजनों के इस फैसले ने विशाल का नाम राजस्थान के अंगदान इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज करवा दिया. 
 

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