जयपुर Rajasthan News: राज्य सरकार ने मुआवजा नीति में किए कई बड़े बदलाव, जानिए मौजूदा नीति में क्या नए बदलाव हुए लागू

Rajasthan News: राज्य सरकार ने मुआवजा नीति में किए कई बड़े बदलाव, जानिए मौजूदा नीति में क्या नए बदलाव हुए लागू

जयपुर: प्रदेश भर के निकायों में बरसों से लंबित भूमि अधिग्रहण के जमीनी मुआवजे के प्रकरणों के निस्तारण के लिए राज्य सरकार ने मुआवजा नीति में बड़े बदलाव कर दिए हैं. इसी के साथ एक बार फिर फर्स्ट इंडिया न्यूज की खबर पर मुहर भी लग गई है. 

अवाप्ति के मामलों में जमीन के बदले जमीन देने में प्रदेश के शहरी निकायों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने 1 जून 2022 को एक विस्तृत आदेश जारी किया था. इस आदेश में जमीन के बदले बतौर मुआवजा जमीन देने के मामलों के निस्तारण में पारदर्शिता लाने व पिक एंड चूज के खेल को खत्म करने के लिए सरकार की ओर से नीति तय की गई. इस नीति में किन प्रकरणों में जमीनी मुआवजा दिया जा सकता है और किनमें नहीं, इसको लेकर प्रावधान लागू किए गए थे. लेकिन इन सबके बावजूद बड़ी तादाद में प्रकरण ऐसे भी हैं जो इन प्रावधानों के कारण निस्तारित नहीं हो पा रहे हैं. इसी के चलते राज्य सरकार ने इस मुआवजा नीति में बड़े बदलाव करने का फैसला किया. 

नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल की अध्यक्षता में इसी मामले को लेकर उच्च स्तरीय बैठक भी हुई थी. फर्स्ट इंडिया न्यूज ने इसी 18 नवंबर को एक्सक्लूसिव खबर प्रसारित की थी. मुआवजा नीति में किए जाने वाले बड़े बदलावों का इस खबर में खुलासा किया गया था. नगरीय विकास विभाग और स्वायत्त शासन विभाग ने मुआवजा नीति में बदलाव के लिए जो आदेश जारी किया है. उसमें वे सभी बदलाव किए गए हैं, जिनका खुलासा फर्स्ट इंडिया न्यूज ने अपनी खबर में किया था. आपको सबसे पहले बताते हैं कि राज्य सरकार ने मौजूदा नीति में क्या नए बदलाव लागू किए हैं.

- जिन प्रकरणों में आरक्षण पत्र जारी किया जा चुका
- अथवा संबंधित खातेदार ने विकल्प पत्र निर्धारित अवधि में निकाय में पेश कर दिया था
- तो ऐसे प्रकरणों में बतौर मुआवजा विकसित भूखंड का आवंटन किया जा सकता है
- नीति में इसके लिए जोड़े गए नए प्रावधान का मतलब साफ है कि भले ही मौके पर योजना क्रियान्वित की जा चुकी है
- लेकिन ऐसे मामलों में जमीनी मुआवजा दिया जा सकेगा
- नीति में किए गए एक अन्य बदलाव के अनुसार अगर अवार्ड राशि अदालत में जमा है
- अथवा खातेदार को अवार्ड राशि का भुगतान किया जा चुका है तो
- ऐसे मामलों में बतौर मुआवजा विकसित भूखंड का आवंटन संबंधित खातेदार को नहीं किया जाएगा
- इस बदलाव का मतलब साफ है कि जमीनी मुआवजा नहीं देने की योजना क्रियान्वित होने की शर्त हटा ली गई है
- योजना की भले ही क्रियान्विति हो गई, लेकिन प्रकरण में नीति के प्रावधान लागू होते हैं तो
- उस प्रकरण में बतौर मुआवजा विकसित भूखंड का आवंटन किया जा सकेगा
- इसी तरह मौजूदा नीति में एक और नया प्रावधान जोड़ा गया है
- इस नए प्रावधान के अनुसार किसी प्रकरण विशेष में अगर निकाय को जमीनी मुआवजा देने में कोई समस्या है
- मौजूदा नीति के तहत जमीनी मुआवजा देने में किसी निकाय को कोई कठिनाई लगती है
- तो राज्य सरकार के स्तर पर गुणावगुण के आधार पर समुचित फैसला किया जा सकेगा

इन बदलावों के अलावा मुआवजा नीति में राज्य सरकार ने और भी कई बदलाव किए हैं. इसके तहत पट्टे शुदा अवाप्त भूमि के मामलों में दिया जाने वाला मुआवजा दुगुना किया गया है वहीं जमीनी मुआवजा लेने के उद्देश्य से विकल्प देने की पात्रता को कुछ हद तक सीमित किया गया है. 

- 27 अक्टूबर 2005 के बाद स्वीकृत किए गए अवार्ड के मामलों में अगर ऐसी भूमि अवाप्ति की गई है
- जिसकी कृषि भूमि से आवासीय भू रूपांतरण किया जा चुका है, लेकिन पट्टा जारी नहीं किया गया है तो
- ऐसे मामलों में संबंधित निकाय समतुल्य 50% आवासीय विकसित भूखंड बतौर मुआवजा दे सकेंगे
- अब तक आवासीय भूमि के मामले में 40% आवासीय व 10% व्यावसायिक भूखंड देने का प्रावधान था
- लेकिन आवासीय भू रूपांतरित भूमि का पट्टा जारी किया जा चुका है तो
- निकाय संबंधित पट्टाधारक को बतौर मुआवजा 100 प्रतिशत समतुल्य आवासीय भूमि आवंटित करेंगे
- इसी तरह अगर व्यावसायिक भू रूपांतरित भूमि जिसका पट्टा जारी किया जा चुका है
- तो ऐसी भूमि की अवाप्ति पर संबंधित पट्टाधारक को निकाय 100 प्रतिशत समतुल्य व्यावसायिक भूमि आवंटित करेंगे
- अब तक पट्टे शुदा भूमि के ऐसे मामलों में केवल 50 प्रतिशत भूखंड का मुआवजा देने का ही प्रावधान था
- जिन प्रकरणों में नकद मुआवजे का अवार्ड है लेकिन मुआवजा खातेदार ने नहीं लिया और मौके पर खातेदार का कब्जा है अथवा न्यायालय से स्थगन आदेश है तो
- ऐसे प्रकरणों में खातेदार में जमीनी मुआवजा लेने के लिए निकाय में निर्धारित अवधि में विकल्प पत्र प्रस्तुत कर सकेगा
- अब तक ऐसे मामलों में अगर प्रकरण न्यायालय में लंबित है तो भी विकल्प पत्र प्रस्तुत किया जा सकता था

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