VIDEO: अजमेर में शिक्षा का एक नया सोपान, नए विश्विद्यालय का विधेयक विधानसभा में ध्वनिमत से हुआ पारित, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: अजमेर या यूं कहे अजयमेरु एक ऐसा शहर जो अपने आप में इतिहास, संस्कृति और विविधता को समेटे है. यह सदियों से उत्तर भारत में शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र भी रहा है. अब अजमेर पहचान बनेगा राजस्थान आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा क्षेत्र में इसे लेकर अब अजमेर में विश्ववि‌द्यालय स्थापित होगा. राजस्थान की विधानसभा में विधेयक पारित हुआ . विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने इस विश्विद्यालय का सपना देखा था जिसे पूरा करने का काम किया मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने.

अजमेर शुरू से ही सांस्कृतिक संगम का केंद्र रहा है. यहां की शिक्षा प्रणाली की जड़ें धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में थीं. पृथ्वीराज चौहान के शासनकाल में अजमेर शिक्षा और संस्कृति का बड़ा केंद्र था. महान विग्रहराज चतुर्थ ने एक भव्य संस्कृत पाठशाला सरस्वती कंठाभरण महाविद्यालय का निर्माण कराया था. सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह की स्थापना के बाद, अजमेर इस्लामी शिक्षा और दर्शन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना, जहाँ दूर-दूर से छात्र ज्ञान लेने आते थे. ब्रिटिश काल खंड में आधुनिक शिक्षा का उदय अजयमेरु से हुआ. महर्षि दयानंद सरस्वती की आर्य समाज की शिक्षाओं का केंद्र भी अजमेर बना. 19वीं सदी के मध्य में अंग्रेजों ने अजमेर को अपनी प्रशासनिक राजधानी बनाया, जिससे यहाँ पश्चिमी शिक्षा की शुरुआत हुई और प्रसिद्ध मेयो कॉलेज 1875 में स्थापित हुआ.

यह कॉलेज अजमेर की सबसे बड़ी शैक्षणिक उपलब्धि है.. इसे 'पूर्व का ईटन' (Eton of the East) कहा जाता है. इसकी स्थापना भारतीय रियासतों के राजकुमारों और अभिजात वर्ग को उच्च स्तरीय शिक्षा देने के लिए की गई थी..अजमेर के शैक्षणिक महत्व का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का मुख्यालय यहाँ स्थित है. यह पूरे राज्य की स्कूली शिक्षा और परीक्षाओं का संचालन करता हैअजमेर ने आधुनिक भारत को कई प्रतिष्ठित संस्थान दिए हैं. GCA 1836 में स्थापित यह उत्तर भारत के सबसे पुराने कॉलेजों में से एक है.. इसे अब 'सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय' के नाम से जाना जाता है. इसके साथ ही क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान  NCERT द्वारा संचालित यह संस्थान शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है.

1987 में स्थापित महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर और आसपास के क्षेत्रों में उच्च शिक्षा का मुख्य केंद्र है सोफिया कॉलेज महिला शिक्षा के क्षेत्र में इस ईसाई मिशनरी कॉलेज का महत्वपूर्ण केंद्र है. अजमेर का मिलिट्री स्कूल भी शिक्षा का अहम पड़ाव है देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने यही शिक्षा ग्रहण की अब अजमेर आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है. विधान सभा में  राजस्थान आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा विश्ववि‌द्यालय अजमेर विधेयक, 2026 ध्वनिमत से पारित किया गया. खास बात ये है कि अजमेर में आयुर्वेद योग यूनिवर्सिटी की स्थापना विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से जुड़ा रहा. इसे पूरा करने का काम किया मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, देवनानी ने कहा कि अजमेर को 38 साल के बाद मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में दूसरा राजकीय विश्ववि‌द्यालय मिला है. इसकी स्थापना से मेरा सपना साकार हो गया है.

विधानसभा में विधेयक को प्रस्तुत करते हुए उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा ने कहा कि विश्ववि‌द्यालय के लिए बजट वर्ष 2024-25 में घोषणा की गई थी. इसकी स्थापना से अब उच्चतर शिक्षा और अनुसंधान की सुविधाओं में अधिक गुणवत्ता से सृदढ़ होंगी. यह विद्यार्थियों और शिक्षाविदों के लिए उत्कृष्ट अनुसंधान का केन्द्र बनेगा. विश्ववि‌द्यालय के जरिए आयुर्वेद, यूनानी, योग और होम्योपैथी चिकित्सा को बढ़ावा मिलेगा. इसमें चिकित्सा की भारतीय पद्धतियों के आविष्कारों को शामिल किया जाएगा. इसके क्षेत्राधिकार को लेकर अधिसूचना जारी की जाएगी.

अधिनियम के अनुसार, विश्वविद्यालय में प्रबंध, विद्रद्या, संकाय, अध्ययन, वित और लेखा समिति, अनुसंधान, खेल एवं छात्र कल्याण और नवाचार बोर्ड होंगे.कुलाधिपति द्वारा कुलगुरू की नियुक्ति किए जाने के बाद प्रबंध बोर्ड का गठन होगा. विश्वविद्यालय में संकाय बोर्ड के अंतर्गत आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार अन्य संकायों में अध्ययन होगा. उप मुख्यमंत्री ने बताया कि इस विश्ववि‌द्यालय के लिए महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर की भूमि में से 11.93 हैक्टेयर भूमि का आंवटन किया गया है.

आनासागर और फायसागर का हिलोरें लेता जल संसार ब्रह्मा की नगरी तीर्थराज पुष्कर से आता आध्यात्मिक संदेश नाग पहाड़ियों की गुफाओं से बहता अमरत्व प्राप्त कर चुके अश्वत्थामा, कृपाचार्य का तपोबल अजयमेरु को सांस्कृतिक संगम प्रदान करता है. शिक्षा की नवीन अलख जगाने के लिए प्रेरित करता है.