नई दिल्ली: काजरी की मोठ की किस्मों ने खरीफ 2026 में अद्भुत सूखा सहनशीलता दिखाई. 35 दिनों के लंबे सूखे और भारी नमी की कमी के बावजूद काजरी मोठ-4, 5, 6 और 7 का अच्छा प्रदर्शन है. पश्चिमी राजस्थान में करीब 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मोठ बीन की खेती होती है.
महज 150 से 250 एमएम बारिश वाले शुष्क क्षेत्रों के लिए काजरी की नई किस्में विकसित की गईं हैं. 3 अगस्त से 7 सितंबर तक 35 दिनों के सूखे में भी फसल ने सक्रिय वृद्धि बनाए रखी. लंबे सूखे के दौरान ऊपरी मिट्टी की नमी 15-16% से घटकर 5-6% तक पहुंची. 10-40 सेंटीमीटर की निचली मिट्टी में नमी 23% से घटकर 16% रही, जिससे फसल को सहारा मिला.
काजरी की किस्मों ने फूल, फलियों और दाना बनने के महत्वपूर्ण चरण में भी मजबूती दिखाई. बुआई के करीब 55 दिन बाद भी खेतों में लहलहाती हरियाली और फलियों से लदे पौधे नजर आए. काजरी की किस्मों की सबसे बड़ी खासियत डेवलपमेंटल प्लास्टिसिटी. काजरी की नई मोठ किस्में बुआई के करीब 30 दिनों में फलने-फूलने लगती हैं.
काजरी रिसर्च फार्म की 7 हेक्टेयर जमीन पर चारों किस्मों का बीज उत्पादन चल रहा है. आईसीएआर महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट बोले, थार को समृद्ध बनाने में ये किस्में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. काजरी की मोठ किस्में सूखा प्रभावित शुष्क क्षेत्रों में किसानों के लिए बड़ा विकल्प बन सकती हैं.