VIDEO: मुखिया की जंग में कांग्रेस को शिकस्त, पार्षदों की बढ़त के बावजूद कांग्रेस ने बोर्ड गंवाए, सात में से सिर्फ बीकानेर में बना कांग्रेस का मेयर, देखिए ये रिपोर्ट

जयपुर: राजस्थान के निकाय चुनाव में आज मेयर, सभापति और नगर पालिका अध्यक्ष के चुनाव के साथ सत्ता की तस्वीर साफ हो गई. वार्ड चुनाव में कई जगह कांग्रेस ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी, लेकिन बोर्ड के मुखिया की कुर्सी तक पहुंचने के खेल में कांग्रेस पिछड़ गई. अजमेर और पाली इसके सबसे बड़े उदाहरण बने, जहां कांग्रेस सबसे बड़ा दल बनकर भी मेयर की कुर्सी हासिल नहीं कर सकी. वहीं बीकानेर में कांग्रेस ने अपने बहुमत को मेयर की जीत में बदल दिया. कांग्रेस ने सरकार पर सवाल खड़े किए हैं, लेकिन सवाल यह भी है कि वार्ड की बढ़त के बाद भी कांग्रेस से रणनीतिक चूक कहां हुई? 

कई दिनों की बाड़ेबंदी, निर्दलीयों पर राजनीतिक डोरे, कई जगह पुलिसिया कार्यवाही, आरोप-प्रत्यारोप के सिलसिले और अवकाश के दिन कोर्ट द्वारा फैसले करने जैसे कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बीच आज प्रदेश में निकाय प्रमुख के चुनाव संपन्न हो गए. निकाय चुनाव का पहला चरण, जिसमें पार्षद चुने गए थे,  कांग्रेस के लिए उम्मीद जगाने वाला था. कई निकायों में कांग्रेस ने भाजपा को कड़ी चुनौती दी और कुछ बड़े निगमों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. लेकिन मेयर और सभापति के चुनाव ने तस्वीर बदल दी. 

क्योंकि यहां सिर्फ पार्षदों की संख्या नहीं, बल्कि बहुमत जुटाने, निर्दलीयों को साथ लेने और फ्लोर मैनेजमेंट की परीक्षा थी. कई जगह कांग्रेस फेल हुई. हालांकि कांग्रेस के प्रमुख नेताओं अशोक गहलोत, गोविंद डोटासरा व टीकाराम जूली ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए, पुलिस व प्रशासन का बेजां इस्तेमाल करने पर सरकार को घेरा और कहा कि समय आने पर जिम्मेदारी तय कर दी जाएगी. कांग्रेस नेताओं के इन आरोपों के बावजूद कुछ जगह ऐसी भी है, जहां कांग्रेस की रणनीति कारगर नहीं हुई और बढ़त के बावजूद अपना बोर्ड नहीं बना सकी. सबसे बड़े उलटफेर अजमेर व पाली में हुए.

धरी रह गई कांग्रेस की कर्नाटक में किलेबंदी: 
-अजमेर में बढ़त के बावजूद हारी कांग्रेस
-कांग्रेस 37 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी
-भाजपा के 32 पार्षद और 11 निर्दलीय थे
-मेयर बनने के लिए बहुमत का आंकड़ा 41 था
-कांग्रेस को सिर्फ चार अतिरिक्त वोटों की जरूरत थी
-जबकि भाजपा सभी 11 निर्दलीय पर थी निर्भर
-भाजपा की रणनीति आखिरकार सफल रही
-भाजपा को 43 वोट मिले जबकि कांग्रेस 37 वोटों पर ही सिमट गई
-कांग्रेस ने अपने पार्षदों की बाड़ेबंदी प्रदेश से बाहर कर्नाटक में की थी
-इसके बावजूद कांग्रेस एक भी निर्दलीय को अपने साथ नहीं ला सकी
-पाली में अपनों ने ही डुबोया कांग्रेस को !
-29 में से 26 पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग कर दी
-65 सदस्यीय पाली नगर निगम में कांग्रेस ने 29 वार्ड जीते थे
-भाजपा के 21 और निर्दलीयों के 15 पार्षद थे
-कांग्रेस को मेयर बनाने के लिए महज चार वोट चाहिए थे
-लेकिन निर्दलीय राजबाला हिंगड़ ने बिगाड़ दिया खेल
-और भाजपा की नमित बुबकिया ने उठा लिया फायदा
-कांग्रेस निर्दलीयों का साथ छोड़ खुद के पार्षदों के भी वोट नहीं पा सकी
-महज तीन वोट ही मिले कांग्रेस की उम्मीदवार को
-और बड़े दावे करने वाली कांग्रेस हो गई चुनावी रणनीति में फेल

पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा कहते है कि इन हार के कारणों की समीक्षा की जाएगी और जिन्होंने कांग्रेस के लिए गड़बड़ की है उन पर अनुशासन का डंडा भी चलेगा. नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के लिए अच्छी खबर  बीकानेर से आई. बीकानेर में पूर्व मंत्री बीडी कल्ला ने अपनी रणनीति का लोहा मनवाया और अपने भतीजे अनिल कल्ला को मेयर बनवा दिया. 80 सदस्यीय निगम में कांग्रेस के 42 पार्षद थे—यानी स्पष्ट बहुमत. अनिल कल्ला मेयर चुने गए और कांग्रेस ने अपनी वार्ड जीत को मेयर की कुर्सी तक पहुंचाया. 

यही अंतर बताता है कि जहां स्पष्ट बहुमत था, वहां कांग्रेस का रास्ता आसान रहा; जहां जोड़-तोड़ और समर्थन जुटाने की जरूरत पड़ी, वहां समीकरण बदल गए. नतीजों के बाद कांग्रेस ने पुलिस और प्रशासन के इस्तेमाल का आरोप लगाया है. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कुछ स्थानों पर कांग्रेस पार्षदों पर दबाव और पुलिस कार्रवाई के आरोप लगाए हैं. भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है. आज के नतीजे सिर्फ भाजपा की जीत और कांग्रेस की हार की कहानी नहीं हैं. ये राजस्थान की स्थानीय राजनीति में फ्लोर मैनेजमेंट, निर्दलीयों की भूमिका और स्थानीय नेतृत्व की ताकत भी दिखाते हैं.