VIDEO: लंबी वेटिंग के बावजूद 148 सरकारी आवास खाली, राजस्थान विधानसभा में उठा मुद्दा, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: एक ओर राजकीय आवास आवंटन की प्रतीक्षा सूची लंबी है, तो वहीं आपको यह जानकर हैरानी होगी कि अभी भी 148 ऐसे सरकारी आवास हैं जो खाली हैं और किसी सरकारी कर्मचारी को आवंटित नहीं है. ऑनलाइन आवास आवंटन के इस समय में यह सूची खासी चर्चा का विषय बन गई है और इसका कारण निचली श्रेणी के आवास लेने में कुछ कर्मचारियों की उदासीनता और कुछ आवास का सही स्थिति में न होना माना जाता है. 

सामान्य प्रशासन विभाग ने ऑनलाइन आवास आवंटन प्रक्रिया अपनाई है जिसके बावजूद आम सरकारी कर्मचारी के लिए सरकारी आवास का इंतजार खासा लंबा होता है. उधर इस सबके बीच खुद सरकार ने विधानसभा में एक सवाल के जवाब में बताया है कि विभाग के कब्जे में 148 ऐसे सरकारी आवास हैं जो अभी तक किसी को नहीं दिए गए हैं.  

यह है सरकारी आवास का अंकगणित: 
जीएडी के अधीन पहली श्रेणी के कुल 152 सरकारी आवास हैं जिसमें से गांधीनगर में सौ आवास हैं. दूसरी श्रेणी के सरकारी आवासों की संख्या 177,तीसरी श्रेणी के सरकारी आवासों की संख्या 461, चौथे श्रेणी के सरकारी आवास की संख्या 551,पांचवें श्रेणी के सरकारी आवासों की संख्या 448 और एच श्रेणी के सरकारी आवासों की संख्या 198 है. 

इनमें कुल 148 सरकारी आवास खाली हैं जिनमें प्रथम श्रेणी के तीन आवास हैं जिसमें से एक सिविल लाइंस,एक विवेकानंद नगर और एक गांधी नगर के हैं. दूसरी श्रेणी के 20,तीसरी श्रेणी के 5,चौथी श्रेणी के 32,पांचवीं श्रेणी के 51 और एच श्रेणी के 37 सरकारी आवास खाली हैं.
पांचवीं श्रेणी के सबसे ज्यादा 51 सरकारी आवास खाली हैं।.

अस्थायी आवासों का यह है ब्योरा: 
बजाज नगर अपार्टमेंट में अस्थायी प्रकृति के कुल 96 आवास हैं जिनमें से 5 आवास हाईकोर्ट पूल को स्थानांतरित किए गए हैं. सामान्य प्रशासन विभाग यानि जीएडी न्यूनतम 4200 ग्रेड पे वाले कर्मचारी को 91 आवासों को वरीयता अनुसार आवंटित करता है. ये अस्थायी प्रकृति के राजकीय आवास नियमित/स्थायी राजकीय आवास आवंटित होने या एक वर्ष की अवधि की शर्त पर आवंटित किए जाते हैं.

इसी तरह ट्रांजिट हॉस्टल,गांधी नगर में अस्थायी प्रकृति के 24 आवास हैं जिनमें जी 3/4 को प्रबंधक कार्यालय के रूप में उपयोग में लिया जा रहा है. बचे 23 आवास न्यूनतम ग्रेड पे 5400 के अधिकारियों को नियमानुसार वरीयता अनुसार आवंटन किया जाता है. करणपुर विधायक रूपिन्द्र सिंह कुन्नर ने जीएडी के अधीन खाली सरकारी आवासों की सूची को लेकर सवाल पूछा था जिसमें अस्थायी आवास का भी ब्योरा मांगा गया है. उधर विभाग ने अपने ब्योरे में बताया है कि अलग-अलग तरह के सरकारी आवास कर्मचारियों-अधिकारियों की पात्रता और वरीयता अनुसार आवंटित किए जाते हैं.