जयपुरः पांच राज्यों के जारी चुनाव कांग्रेस के लिए सियासी नजरिए से बेहद अहम होंगे. चुनाव परिणाम अगर पार्टी के पक्ष में रहते तो फिर कांग्रेस की यह कई राज्यों में लगातार हार के बाद वापसी मानी जाएगी. पर खराब प्रदर्शन रहने पर फिर मुश्किलें और बढ़ जाएगी औऱ पार्टी कमजोर भी होगी.
पांच राज्यों के चुनाव के चलते सियासत परवान पर है. केरलम,असम और पुडुचेरी में अब प्रचार का शोर थम चुका है. कल इन तीनों राज्यों में अब मतदान होगा. उसके बाद तमिलनाडु और बंगाल में प्रचार परवान पर रहेगा. अब बात करते हैं आखिर इन पांच राज्यों के चुनाव से कांग्रेस पार्टी की सियासत पर क्या फर्क पड़ेगा. दरअसल इन राज्यों की चुनावी लड़ाई कांग्रेस के लिए किसी इम्तिहान से कम नहीं है. क्योंकि लगातार कईं राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा. खासतौर से महाराष्ट्र,दिल्ली और हरियाणा में मिली शिकस्त से कांग्रेस काफी कमजोर हो चुकी है. ऐसे में सियासी बूस्ट अप के लिए कांग्रेस अब इनमें से कुछ राज्यों में जीत हासिल करते हुए वापसी करनी ही पड़ेगी.
5 राज्यों की चुनावी लड़ाई और कांग्रेस के इम्तिहान की घड़ी
सियासी नजरिए से कांग्रेस के लिए चुनाव है काफी अहम
अगर जीते तो कांग्रेस की मानी जाएगी यह वापसी
पर खराब प्रदर्शन रहने पर फिर कांग्रेस होगी औऱ कमजोर
कांग्रेस को सबसे ज्यादा है केरलम में सरकार बनने की उम्मीद
कांग्रेस ने केरलम में पूरे दमखम के साथ एकजुटता से लड़ा चुनाव
केरलम में कांग्रेस की सीधे सत्ता की लड़ाई है एलडीएफ से
असम में भी कांग्रेस का है भाजपा से सीधा मुकाबला
असम में अगर जीत होती है जाएगा बड़ा सियासी संदेश
पुडुचेरी में कांग्रेस गठबंधन की है NDA से कड़ी टक्कर
तमिलनाडु में कांग्रेस डीएमके के साथ है छोटे भाई के रोल में
बंगाल में कांग्रेस के पास नहीं है कुछ भी खोने के लिए
बंगाल में कांग्रेस का फोकस खाता खोलते हुए वोट प्रतिशत बढ़ाने पर
सियासी जानकारों की माने तो इन पांच में से कांग्रेस अगर दो राज्यों में भी सत्ता हासिल कर लेती है तो यह उसकी एक तरह से वापसी मानी जाएगी. क्योंकि पांचों राज्यों में कांग्रेस की अपने दम औऱ बहुमत पर कहीं भी सरकार नहीं थी. हां,तमिलनाडु में जरूर गठबंधन में डीएमके की सरकार थी. ऐसे में अच्छा प्रदर्शन करने पर इंडिया गठबंधन में कांग्रेस और मजबूत होगी. वहीं राहुल गांधी की फिर पार्टी में पकड़ भी बढ जाएगी. लेकिन नतीजे विपरीत रहने पर फिर जवाबदेही और बढ जाएगी. क्षेत्रीय दल कांग्रेस को आंख दिखा सकते है या फिर दूरी बनाना शुरु कर देंगे.
अब ये चुनाव कांग्रेसी की वापसी की कहानी लिखेंगे या फिर मुश्किले बढेगी, यह तो अब वहां की जनता तय करेगी और 4 मई को नतीजों से फिर सब सामने आ जाएगा. लेकिन कांग्रेस के लिए ये चुनाव सियासी अस्तित्व बचाने के लिए काफी अहम चुके हैं. क्योंकि नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल भी काफी हद ये चुनाव तय कर देंगे.
पांच राज्यों के चुनाव कांग्रेस के लिए बेहद अहम
नतीजे तय करेंगे कांग्रेस की सियासी तकदीर
परिणाम पक्ष में रहने पर इसे माना जाएगा कांग्रेस की वापसी
केरलम और असम में कांग्रेस है आमने सामने मुकाबले में
पुडुचेरी में कांग्रेस गठबंधन की एनडीए से कड़ी टक्कर
बंगाल में कांग्रेस का खाता खोलते हुए वोट प्रतिशत बढ़ाने पर फोकस
खराब प्रदर्शन रहने पर कांग्रेस की बढेगी फिर और मुश्किलें