VIDEO: अवैध शराब पर आबकारी आयुक्त नमित मेहता सख्त, तस्करी, हथकड़ मदिरा और नकली शराब पर जीरो टॉलरेंस, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजस्थान में अवैध शराब के कारोबार पर लगाम लगाने और सरकारी खजाने की कमाई बढ़ाने के लिए आबकारी विभाग ने दोहरी रणनीति तैयार की है. एक तरफ दूसरे राज्यों से आने वाली शराब की तस्करी, हथकड़ मदिरा के निर्माण और अवैध बिक्री पर सख्ती होगी, तो दूसरी तरफ राजस्व में पिछड़ रहे जिलों के अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी. आबकारी आयुक्त नमित मेहता ने विभागीय समीक्षा बैठक में साफ कर दिया है कि अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी. नेशनल हाईवे पर शराब के अनधिकृत विज्ञापनों, अवैध होर्डिंग्स और साइनबोर्ड पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. आखिर आबकारी विभाग की नई रणनीति क्या है और किन जिलों को सुधार की जरूरत है? 

पंचायतराज चुनावों की आदर्श आचार संहिता और दीपावली पर्व के मद्देनजर राजस्थान में अवैध शराब की तस्करी और बिक्री पर आबकारी विभाग की निगरानी बढ़ गई है. आबकारी आयुक्त नमित मेहता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों को निर्देश दिए कि दूसरे राज्यों से आने वाली अवैध मदिरा, हथकड़ शराब, नकली शराब और बिना लाइसेंस शराब बेचने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाए. होटल, ढाबों और समारोह स्थलों पर भी मुखबिर तंत्र की मदद से निगरानी रखने को कहा गया है. आबकारी विभाग की कार्रवाई अब केवल शराब की जब्ती तक सीमित नहीं रहेगी. नेशनल हाईवे पर लगे शराब के अनधिकृत विज्ञापन, अवैध होर्डिंग्स और नियमों के विरुद्ध लगाए गए साइनबोर्ड भी विभाग के निशाने पर हैं. एक से सात नवंबर तक चल रहे विशेष निरोधात्मक अभियान के दौरान ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस के तहत कार्रवाई और अभियोग दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं. आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई में शिथिलता बरतने वाले संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कदम उठाए जाएंगे.

अवैध शराब के खिलाफ अभियान की समीक्षा करते हुए आयुक्त ने प्रत्येक जोन में कम से कम एक बड़ी कार्रवाई पर जोर दिया. अवैध स्पिरिट और शराब से भरे ट्रकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं. जिन जिलों में अभियान के दौरान प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी, वहां विशेष अभियान की अवधि सात दिन और बढ़ाई जा सकती है. यानी विभाग अब केवल औपचारिक कार्रवाई के बजाय ठोस नतीजों पर फोकस कर रहा है.अवैध शराब पर कार्रवाई के साथ आबकारी विभाग का दूसरा बड़ा लक्ष्य राजस्व वृद्धि को बनाए रखना है. अक्टूबर महीने में राजस्थान की राजस्व वृद्धि दर 24.30 प्रतिशत दर्ज की गई. जोधपुर जोन 29.93 प्रतिशत वृद्धि के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर रहा. इसके बाद बीकानेर, अजमेर, उदयपुर, भरतपुर, जयपुर और कोटा जोन का स्थान रहा. वहीं डूंगरपुर, नागौर, बीकानेर, झुंझुनूं, जोधपुर, बाड़मेर, दौसा, कोटपूतली-बहरोड़ और सिरोही उन जिलों में शामिल रहे, जहां राजस्व वृद्धि 30 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई. राजस्व वृद्धि के राज्य औसत से पीछे रहने वाले जिलों को नवंबर में विशेष समीक्षा कर प्रदर्शन सुधारने के निर्देश दिए गए हैं. इनमें कोटा, बांसवाड़ा, जैसलमेर, बूंदी, जयपुर सिटी, प्रतापगढ़, जयपुर ग्रामीण, भरतपुर, अलवर, पाली, सीकर और हनुमानगढ़ शामिल हैं. अधिकारियों को सर्कलवार समीक्षा कर राजस्व बढ़ाने और तय लक्ष्यों की नियमित निगरानी करने को कहा गया है.

कुल मिलाकर आबकारी विभाग के सामने अब दोहरी चुनौती है- अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाना और राजस्व वृद्धि की रफ्तार को बनाए रखना. आयुक्त के निर्देशों के बाद निगाह इस बात पर रहेगी कि विशेष अभियान में जिलों की कार्रवाई कितनी प्रभावी होती है और राजस्व के मामले में पिछड़े जिले नवंबर में कितना सुधार कर पाते हैं.