जयपुरः राजधानी में बी टू बायपास चौराहा स्थित करीब 22 सौ करोड़ बाजार भाव की भूमि का कब्जा लेने के लिए आवासन मंडल ने बड़ा अभियान शुरू कर दिया है. अभियान के पहले दिन करीब सौ निर्माणों को ध्वस्त किया.
यह मामला है बी टू बायपास चौराहे पर ग्राम चैनपुरा व ग्राम दुर्गापुरा की 42 बीघा 10 बिस्वा भूमि का. इसमें से करीब 6 बीघा भूमि सड़क के निर्माण के लिए ले ली गई थी. शेष बची 36 बीघा भूमि में से करीब 12 बीघा भूमि का कब्जा आवासन मंडल की ओर से गत 16 अप्रेल को ले लिया गया था. बाद में अदालती आदेश के चलते कार्रवाई रूक गई. दुबारा अदालत में मामला अपने पक्ष में होने के बाद आवासन मंडल ने बड़ा अभियान शुरू कर दिया. जिस भूमि का कब्जा लेने के लिए आवासन मंडल ने यह अभियान शुरू किया है,उस भूमि का बाजार भाव 22 सौ करोड़ रुपए है. करीब 37 वर्षों तक चली लंबी लड़ाई के बाद आज आवासन मंडल भूमि का कब्जा लेने की स्थिति में पहुंचा है. आपको सबसे पहले बताते हैं कि पिछले 37 वर्षों में इस महत्वपूर्ण मामले में क्या रहा.
राजस्थान आवासन मंडल ने 2 सितंबर 1989 को गजट नोटिफिकेशन जारी कर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की थी
4 जनवरी 1991 को अर्जेंसी क्लाज के तहत अधिसूचना जारी की गई और बोर्ड ने भूमि का कब्जा ले लिया
30 जुलाई 1993 को अवार्ड पारित कर मुआवजा तय किया गया
लेकिन इस मुआवजे को खातेदारों ने स्वीकार नहीं किया
बोर्ड ने 17 अगस्त 1993 को पूरी राशि सिविल जज जयपुर के कोर्ट में जमा कर दी
इसके बावजूद जवाहर पूरी गृह निर्माण सहकारी समिति ने 1981 के कथित विक्रय अनुबंध के आधार पर दावा किया
जेडीए ने 1995 में श्री राम विहार बी योजना अनुमोदित की लेकिन बाद में उसे निरस्त कर दिया
पांच सदस्यों ने निर्माण शुरू किया जिस पर बोर्ड ने आपत्ति जताई
उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में मामले को लेकर लंबी लड़ाई चली
सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2018-19 में कुछ निर्देश दिए
लेकिन बोर्ड को नई याचिका दायर करने की छूट दी
उधर इस भूमि पर सहकारी समिति की ओर से अपने सदस्यों के पथ में नियमन के लिए कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई
इसके चलते आवासन मंडल इस तैयारी में था कि जेडीए को नियमन के लिए एनओसी जारी कर दी जाए
इसी बीच वर्ष 2019 नए आवासन आयुक्त ने पदभार ग्रहण किया
इन आवासन आयुक्त के समय आवासन मंडल ने स्पष्ट तौर पर जेडीए को एनओसी नहीं देने का निर्णय किया
इस निर्णय के पीछे आधार यही था कि सुप्रीम कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को निरस्त नहीं किया
इन तत्कालीन आयुक्त के समय ही ठोस तथ्यों के साथ आवासन मंडल की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई
साथ ही मौके पर किए जा रहे निर्माणों को ध्वस्त करने और निर्माण सामग्री जब्त करने की कई बार कार्रवाई की
आवासन मंडल की इसी याचिका पर हाई कोर्ट में मामला चला और गत अप्रेल में एकल पीठ ने आवासन मंडल के पक्ष में फैसला दिया
इसके बाद आवासन मंडल ने 16 अप्रेल को मौके पर कार्रवाई कर करीब 12 बीघा भूमि का मौके पर कब्जा लिया
प्रभावित पक्ष हाई कोर्ट की खंडपीठ में गया, खंडपीठ ने आवासन मंडल की कार्यवाही पर रोक लगा दी
हाई कोर्ट की खंडपीठ की ओर से कार्यवाही पर रोक हटने के बाद आवासन मंडल ने भूमि का कब्जा लेने के लिए बड़ा अभियान शुरू कर दिया
इस बहुचर्चित मामले की बेशकीमती भूमि का कब्जा लेने के लिए आवासन मंडल की ओर से आज से शुरू किए अभियान में बड़ी संख्या में भूमि पर बने निर्माणों पर बुलडोजर चलाया गया.
आवासन मंडल की पूरी टीम सुबह करीब साढ़े नौ बजे मौके पर पहुंच गई
भूमि से कब्जे हटाने के अभियान की शुरूआत पूरी तैयारी के साथ की गई
आवासन मंडल के अधिकारी-कर्मचारियों की टीम के साथ पूरा पुलिस जाप्ता मौके पर मौजूद था
आवासन मंडल की टीम 11 जेसीबी मशीन, 1 पोकलेन मशीन,60 मजूदर और 11 गार्ड्स के साथ मौके पर तैनात थी
अभियान की शुरूआत बी टू बायपास चौराहे पर सांगानेर की तरफ स्थित भूमि के हिस्से से शुरू की गई
इस बड़े हिस्से में करीब 70 निर्माणों पर बुलडोजर चलाया गया
इनमें चारदिवारी,टीनशैड डालकर बनाए कमरे और मकान शामिल हैं
हांलाकि इस हिस्से में आधे दर्जन एक मंजिल से तीन मंजिलों के निर्माण को नहीं हटाया गया
इन निर्माणों में परिवार रहने की वजह से उन्हें आवासन मंडल ने कुछ समय की मोहलत दी है
इस हिस्से में कार्रवाई पूरी होने के बाद आवासन मंडल ने दूसरे हिस्से में कार्रवाई शुरू की
इस हिस्से में करीब तीस निर्माणों को धराशायी किया गया
इनमें से कई में बार,हट रेस्टोरेंट,कैटरिंग का गोदाम आदि व्यावसायिक गतिविधियां चल रही थी
आवासन मंडल ने अभियान के पहले दिन लगातार सुबह दस बजे से देर शाम सूर्यास्त तक तोड़फोड़ की
यह समस्त कार्यवाही आवश्यक मंडल के सचिव गोपाल सिंह की अगुवाई में की गई
हालांकि आवश्यक आयुक्त का इस दौरान अवकाश पर रहना चर्चा का विषय बना
जानकारों के अनुसार इस भूमि पर कुछ रसूखदारों ने भी सहकारी समिति से भूखंड लिए थे
कार्रवाई की शुरूआत में यहां भूखंड लेने वाले कुछ लोग मौके पर भी पहुंचे और मौखिक तौर पर कार्रवाई का विरोध किया
मंडल का अभियान कल रविवार को भी जारी रहेगा
मंडल की ओर से भूमि का कब्जा लेने की कार्रवाई पूरी होने के बाद चारदिवारी का निर्माण किया जाएगा
भूमि के दोनों हिस्से में चारदिवारी निर्माण पर करीब डेढ़ करोड़ रुपए की लागत आएगी
मंडल की ओर से चारदिवारी निर्माण के लिए निविदा जारी कर दी गई है
विशेषज्ञों का मानना है कि मौके की इस जमीन पर जेडीए की नजदीक स्थित मेट्रो एनक्लेव योजना की तर्ज पर आवासन मंडल को यहां व्यावसायिक योजना सृजित करनी चाहिए. ताकि व्यावसायिक भूखंडों की नीलामी से आवासन मंडल का खजाना भरा जा सके.