जयपुरः संगठन मजबूती के लिए कांग्रेस अब जिम्मेदारी के साथ जवाबदेही फार्मूले को सख्ती से लागू करने का प्लान बना रही है. इसके तहत जिला अध्यक्षों और ब्लॉक अध्यक्षों के कामकाज की पूरी निगरानी होगी. फिर वर्किंग परफॉर्मेंस के आधार पर रेटिंग तय होगी. हर 3 माह बाद यह मूल्यांकन सिलसिला जारी रहेगा.
कांग्रेस संगठन की मजबूती के लिए पहले हाईकमान ने संगठन सृजन अभियान शुरु किया. अब इस मॉडल के जरिए तराशे गए जिला अध्यक्षों की जवाबदेही तय करने का फैसला किया है. जिला अध्यक्षों के साथ ब्लॉक अध्यक्षों को इस फार्मूले में शामिल किया जाएगा. मतलब अब पहले की तरह पद लेकर राजनीति करने का फंडा नहीं चलेगा. इस फार्मूले के जरिए कांग्रेस आलाकमान का सीधा मैसेज यह है कि जो काम करेगा वह ही पद पर टिकेगा.
संगठन मजबूती के लिए कांग्रेस हाईकमान का एक्शन प्लान
अब जो काम करेगा वही पद पर टिकेगा
जिम्मेदारी के साथ जवाबदेही का फार्मूला होगा सख्ती से लागू
जिला अध्यक्षों और ब्लॉक अध्यक्षों के काम की होगी निगरानी
काम की परफॉर्मेंस के आधार फिर होगी रेटिंग तय
कंट्रोल रूम और एप के जरिए वर्किंग परफॉर्मेंस की होगी मॉनिटरिंग
हर तीन माह में कामकाज की परफॉर्मेंस होगी निर्धारित
इसके लिए स्टेट औऱ AICC लेवल पर बनाए गए कंट्रोल रुम
लगातार रेटिंग नीचे रहने पर पहले परफॉर्मेंस सुधारने का मिलेगा मौका
फिर भी सुधार नहीं हुआ तो पदमुक्त का हो सकता है एक्शन
गुजरात और मध्यप्रदेश को छोड़कर अभी कईं राज्यों में यह फार्मूला पाइप लाइन में है. राजस्थान में भी यह मॉडल लागू किया जाएगा. फिलहाल ट्रायल बेस पर यह काम जारी है. अभी जिला अध्यक्षों के काम की मॉनिटरिंग बाकायदा एप के जरिए हो रही है. लेकिन उसमें कार्यक्रमों औऱ मूवमेंट की डिटेल अपलोड करने पर स्टार रेटिंग ऑटोमेटिक मिलती है. तीन माह पीरियड वाला मूल्यांकन अभी शुरु नहीं हुआ है. कुल मिलाकर कांग्रेस पार्टी में अब इन पदों पर पहले की तरह पद लेकर घर बैठने से काम नहीं चलेगा.
इस फार्मूले के तहत गुजरात में कईं जिला अध्यक्षों की टेंशन बढ़ चुकी है. गुजरात में करीब आधा दर्जन से ज्यादा अध्यक्ष प्रेशर के चलते बाकायदा इस्तीफे की पेशकश भी कर चुके है. एक जिला अध्यक्ष को तो वर्किंग परफॉर्मेंस के आधार पर हटा भी दिया गया है. अगर यह फार्मूला वाकई में सख्ती से लागू हो सकता है तो यकीनन इससे संगठन को नई धार मिलेगी और कामकाज के ढर्रें में भी सुधार होगा.
कांग्रेस में अब जिम्मेदारी के साथ होगी जवाबदेही तय
जिला अध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्षों के कामकाज की होगी निगरानी
हर तीन माह में वर्किंग परफॉर्मेंस होगी फिर तय
AICC और पीसीसी में निगरानी के लिए बनाए कंट्रोल रुम
लगातार कमजोर प्रदर्शन रहने पर पहले सुधार का दिया जाएगा मौका
फिर पदमुक्त करने का हो सकता है एक्शन