VIDEO: क्रीड़ा भारती का 5वां राष्ट्रीय अधिवेशन, अधिवेशन में कुल 6 प्रस्ताव हुए पारित, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: आरएसएस से संबद्ध प्रमुख राष्ट्रव्यापी खेल संगठन क्रीड़ा भारती ने खेल को एक मौलिक अधिकार बनाने की मांग की है.  क्रीड़ा भारती ने कर्णावती, गुजरात में आयोजित पाँचवें राष्ट्रीय अधिवेशन में भारत में खेलों के विस्तार हेतु "खेल एक मौलिक अधिकार" का प्रस्ताव पारित किया है. अधिवेशन में कुल छह प्रस्ताव पारित किए गए है जिनमें महत्वपूर्ण बात यह भी है कि राजनीति से खेलों को मुक्त रखा जाए.  

क्रीड़ा भारती एक राष्ट्रव्यापी खेल संगठन है जो "क्रीड़ा से चरित्र निर्माण, चरित्र से राष्ट्र निर्माण" के ध्येय वाक्य के साथ भारत में खेल संस्कृति विकसित करने के लिए कार्यरत है. यह संस्था पारंपरिक और आधुनिक खेलों को बढ़ावा देती है और 'फिट इंडिया - हिट इंडिया' के लक्ष्य के साथ काम करती है. क्रीड़ा भारती का पांचवां अधिवेशन हाल ही संपन्न हुआ, जिसमें कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए. जयपुर के  "सेवा सदन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल सैनी एवं प्रदेश अध्यक्ष शरद मिश्रा ने कीड़ा भारती खेलने के अधिकार का आग्रह अपनी स्थापना से ही करती आ रही है.

क्योंकि खेल केवल चुनिंदा खिलाड़ियों का विषय न होकर प्रत्येक व्यक्ति का होना चाहिए. अधिवेशन में देशभर के खेल तंत्र को अधिक पारदर्शी, समावेशी और खिलाड़ी-केंन्द्रित बनाने हेतु एक महत्ववपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया. अधिवेशन में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि खेलों को केवल चुनिंदा खिलाड़ियों तक समिति न रखकर प्रत्येक वर्ग और स्तर के व्यक्ति तक पहुंचाया जाए. खेलों को समावेशी बनाते हुए सभी को समान अवसर प्रदान करना आवश्यक है. साथ ही, खेलों के नियम एवं व्यवस्थाएं ऐसी हों जो भेदभाव को समाप्त करें और खिलाड़ियों के विकास को प्रोत्साहित करें.

अधिवेशन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि खेल गतिविधियों में सभी वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए. विभिन्न स्तरों पर नियमित प्रतियोगिताओं का आयोजन कर प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण को मजबूत बनाया जाए, खेलों में समावेशिता एवं कौशल विकास को बढ़ावा दिया जाए तथा संपूर्ण खेल तंत्र का निर्माण खिलाड़ियों को केन्द्र में रखकर किया जाए. अधिवेशन में ये छह प्रस्ताव पारित किए गए.

खेल एक मौलिक अधिकार हो. किसी खिलाड़ी या  संघ को, किसी सदस्यता की बाध्यता के बाहर रहकर भी अपनी क्षमता और पसंद का खेल खेलने का तथा सभी प्रतियोगिताओं में सहभागी होकर अपने कौशल को सिद्ध करने की स्वतंत्रता और अधिकार हो.किसी व्यक्ति या व्यक्ति समूह को खेल की प्रतियोगिता आयोजित करने की स्वतंत्रता और अधिकार रहे, जब तक उसका उद्देश्य जिला, राज्य, देश के टीम की चयन प्रक्रिया / चैंपियनशिप रैंकिंग के लिए न हो तथा उसमें राज्य या देश के प्रतिनिधित्व का दावा या आभास न हो.

किसी कारणवश दंडात्मक कार्यवाही करनी हो तो वह अधिकार राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण या सक्षम न्यायाधिकरण के पास रहे. राजनीति से खेल मुक्त रहे इसलिए जिला, राज्य तथा देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ी और संघ की चयन प्रक्रिया के लिए एक पूर्ण पारदर्शी प्रक्रिया स्थापित की जाए. प्रत्येक खिलाडी की पहुँच में मैदान तथा आधारभूत संरचना उपलब्ध हो तथा खेल के सभी मैदान और आधारभूत संरचना केवल खेल के लिए संरक्षित हो.