जयपुर: देश में जब भी NDA सरकार रही . केंद्र में शिक्षा मंत्रालय बीजेपी ने अपने पास रखा इतना ही नहीं इस पद पर विचार परिवार और संघ बैकग्राउंड के चेहरों को लाया गया. मुरली मनोहर जोशी से लेकर प्रह्लाद जोशी तक. संघ के वैचारिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के कारण कहा यहीं जाता हैं कि मातृ संगठन की राय से तय होता है कि शिक्षा विभाग किसे दिया जाए.NEET आंदोलन के बाद देश के नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी भी विचार परिवार की पसंद हैं.
दिल्ली का जंतर मंतर केंद्रीय मंत्रीपरिषद में बदलाव का साक्षी बना. यहीं से NEET पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन ने राष्ट्रीय रूप लिया और यहीं से उठी जेन z की मांग के कारण देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना पड़ा. धर्मेंद्र प्रधान को भी संघ वैचारिक पृष्ठ भूमि के कारण पद मिला था उनका फोकस भी रहा पाठ्यक्रम को राष्ट्रवादी बनाना . उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीयता और हिंदुत्व ये मूल तत्व हैं बीजेपी के एजेंडे में. प्रथम राष्ट्र को रखा जाता हैं. यहीं कारण हैं जब जब देश में NDA सरकार बनी तब तब बीजेपी नेतृत्व ने मानव संसाधन मंत्रालय जो आगे चल कर शिक्षा मंत्रालय बना वो केवल उसी सियासी चेहरे को दिया गया जिसकी पृष्ठिभूमि RSS अथवा एबीवीपी की रही हैं. यूं कहे जो मातृ संगठन या विचार परिवार की पसंद रहा हो. मुरली मनोहर जोशी से लेकर प्रह्लाद जोशी तक.
--- NDA राज में देश के शिक्षा मंत्री ---
प्रह्लाद जोशी ..वर्तमान केंद्रीय शिक्षा मंत्री
विशुद्ध संघ विचारधारा से ओत प्रोत
युवा अवस्था से ही संघ और ABVP से ताल्लुक
हुबली में 1992–1994 ईदगाह मैदान तिरंगा आंदोलन का नेतृत्व किया
कर्नाटक में 'कश्मीर बचाओ आंदोलन' का नेतृत्व किया
2014 से 2016 तक कर्नाटक बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे
1998 में BJP के धारवाड़ जिला अध्यक्ष का पद संभाला
डॉ मुरली मनोहर जोशी
अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मानव संसाधन मंत्री बने
अभी बीजेपी मार्गदर्शक मंडल के सदस्य
वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं
शुरुआती वर्ष
महज 10 साल की आयु में आरएसएस से जुड़े
इसके बाद 1949 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में शामिल हुए
और 1957 मे जनसंघ में शामिल हुए
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में वह ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी रहे
आपातकाल के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय भूमिका रही
भाजपा के संस्थापक नेताओं में गिनती हैं
राम मंदिर आंदोलन में जेल गए
जोशी ने अपने कार्यकाल में कन्या शिक्षा को बढ़ावा दिया
स्मृति ईरानी
26 मई, 2014 से 5 जुलाई 2016 तक शिक्षा मंत्री रही
बीजेपी विचारधारा से ओत प्रोत और प्रखर नेता
Tv दुनिया से आई सियासत में
अमेठी से राहुल गांधी को हराकर बनी सियासी सनसनी
उनके बनने से पहले शिक्षा मंत्रालय को मानव संसाधन विकास मंत्रालय के नाम से जाना जाता था.
इस पद पर रहते हुए उनकी बड़ी उपलब्धियों में से एक था
दिल्ली विश्वविद्यालय के चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (एफवाईयूपी) को रद्द करना
स्मृति ईरानी को भी इस पद पर रहते हुए विरोध का सामना करना पड़ा
उस दौरान जेएनयू में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए
जुलाई, 2016 में स्मृति ईरानी से शिक्षा मंत्रालय वापस लेकर उन्हें कपड़ा मंत्रालय दे दिया गया
प्रकाश जावड़ेकर
5 जुलाई, 2016 से 30 मई, 2019 तक भारत सरकार के शिक्षा मंत्री के पद पर रहे
जावेडकर विशुद्ध रूप से संघ विचारों से जुड़े रहे
बीजेपी संगठन में कई अहम पदों पर रहे
प्रकाश जावड़ेकर अपने कार्यकाल में इंडियन इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट (आईआईएम) एक्ट 2017 लाए
इससे आईआईएम को ज्यादा स्वायत्तता मिली
जावड़ेकर के ही कार्यकाल में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की स्थापना हुई
इसका मकसद यह था कि राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रवेश परीक्षाओं का संचालन एक ही संस्था के पास हो
उल्लेखनीय NEET पेपर लीक के बाद एनटीए को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा
रमेश पोखरियाल निशंक
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री
संघ पृष्ठभूमि के कारण इन्हें शिक्षा मंत्रालय मिला गा
पोखरियाल के कार्यकाल में सबसे बड़ी उपलब्धि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की घोषणा
मई, 2021 में पोखरियाल कोरोना पॉजिटिव हुए और एक महीने तक एम्स में भर्ती रहे
खराब स्वास्थ्य के चलते 7 जुलाई, 2021 को उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया
इसके बाद धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री बनाया गया था
धर्मेंद्र प्रधान
ABVP के चमकीले चेहरे रहे धर्मेंद्र प्रधान
संघ के छात्र संगठन से उन्हें ख्याति मिली
यही कारण है कि उन्हें शिक्षा जैसा अहम विभाग दिया गया
ओडिशा से होंगे के बाद ABVP के कारण देश भर में उनकी पहचान
प्रखर वक्ता के साथ ही विचारवान नेता की इमेज़ रही
NEET पेपर लेक विवाद के चलते उन्हें पद छोड़ना पड़ा
कुल मिलाकर कह सकते है कि बीजेपी नेतृत्व वाले राज में देश का शिक्षा मंत्रालय उसी को मिलेगा जो विचार परिवार की पसंद होगा यूं कहे कि पूरी तरह संघ नीति पर चलने वाला हो..इसके पीछे के कारण भी है.
--- शिक्षा मंत्री का पद संघ निष्ठ को ही क्यों ! ---
पाठ्यक्रम में भारतीयता राष्ट्रवाद का एजेंडा आगे बढ़ाना
भारत के प्राचीन और गौरवशाली इतिहास को सामने लाना
बच्चे अकबर महान नहीं पढ़े बल्कि वे जाने कि राणा प्रताप और शिवाजी महान थे
वे जाने कि सावरकर गद्दार नहीं बल्कि देश भक्त थे
भारतीयता के मूल्यों के अनुरुप हो भारतीय शिक्षा
RSS की प्रथम राष्ट्र की सोच को मंत्रालय के जरिए आगे बढ़ाना
भारतीय विज्ञान , राष्ट्रवादी विचारकों के सिद्धांतों को आगे बढ़ाना
अटल सरकार में 20से भी अधिक राजनीतिक दल सरकार का भाग थे उस समय भी NDA का मानव संसाधन मंत्रालय उसी चेहरे को दिया गया जो संघ निष्ठ था. अभी देश में NDA की सरकार पिछले कई सालों से काबिज और शिक्षा महकमा वैचारिक व्यक्ति के पास ही है और रहेगा भी. अन्य दलों को और अहम मंत्रालय मिल सकते हैं लेकिन शिक्षा नहीं. पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान विचार परिवार से आए या उनकी पसंद के चेहरों को ही शिक्षा विभाग का मंत्री बनाया.