VIDEO: नारी शक्ति वंदन से बदलेगी सियासत, राजस्थान में बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: नारी शक्ति वंदन अधिनियम के बाद राजस्थान में महिला सियासत की तस्वीर बदल जाएगी. बदलने का काम होगा परिसीमन और महिला आरक्षण के कारण. राजस्थान की राजनीति में महिला विधायकों की संख्या भले ही कम रही हो लेकिन यहां की सियासत में महिला राजनीतिज्ञों का समय समय पर दबदबा रहा है चाहे विधानसभा हो या लोकसभा.लेकिन इनमें सबसे अहम रहा राजनीतिक परिवार, बीजेपी की बात करे तो अधिकांश महिला नेताओं का ताल्लुक राजनैतिक और राज घरानों से रहा है.

दीप्ति किरण माहेश्वरी का पहला चुनाव. उप चुनाव के जरिए वे चुनावी समर में उतरी थी उनकी माता किरण माहेश्वरी का विधायक रहते हुए निधन हो गया था. उप चुनाव ऐसे वक्त पर आया जब राज कांग्रेस का था अशोक गहलोत की सरकार थी. सूत्रों के मुताबिक दीप्ति किरण माहेश्वरी को टिकट बड़ी मुश्किल से मिला वो भी तब जब ये लग रहा था कि वे ही सीट निकाल सकती है हुआ भी यही उस दौर में उप चुनाव जहां भी हुए सभी जगह बीजेपी को पराजय मिली राजसमंद में दीप्ति ने लाज रखी इसके पीछे सबसे बड़ा कारण रहा किरण माहेश्वरी का व्यक्तित्व उनके नाम के ही प्रभाव के कारण  दीप्ति के पक्ष में पैदा हुई सहानभूति ने बीजेपी को जीत दिला दी. अर्थ साफ है कि राजनीतिक विरासत के बलबूते बीजेपी में कई महिला नेताओं ने चुनावी शुरुआत की. 

इनमें रॉयल फैमिली का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा. चाहे जोधपुर की राजमाता कृष्णा कुमारी हो या जयपुर राजपरिवार की राजमाता गायत्री देवी मेवाड़ में हाल ही में सांसद और विधायक भी रॉयल फ़ैमिली से है राजसमंद से सांसद महिमा कुमारी और नाथद्वारा से उनके विधायक पति विश्वराज सिंह दोनों ही मेवाड़ राजघराने से है. राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का राजनैतिक इतिहास समृद्धशाली रहा है वे ग्वालियर के प्रसिद्ध राजघराने की बेटी है और धौलपुर के राजघराने की बहू उनकी माता राजमाता विजया राजे सिंधिया बीजेपी की संस्थापक सदस्य रही. बीजेपी कार्यकर्ताओं के लिए राजमाता का नाम प्रात स्मरणीय है. अभी हाल ही बीजेपी के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने अपने परिवार और राजमाता के इतिहास को भी सामने रखा.

भजनलाल सरकार में उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी का ताल्लुक जयपुर राजपरिवार से रहा है उनके पिता पूर्व महाराजा भवानी सिंह भी जयपुर से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके. जयपुर से बीजेपी सांसद मंजू शर्मा का ताल्लुक उस परिवार से जिसने राजस्थान में जनसंघ और बीजेपी की जड़े जमाने में अपना योगदान दिया. मंजू शर्मा के पिता भंवरलाल शर्मा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे. वे भैरों सिंह शेखावत सरकार में UDH समेत कई महकमों के मंत्री रहे. भंवर लाल शर्मा कभी चुनाव नहीं हारे.. मंजू शर्मा को उनके नाम के बलबूते लोकसभा पहुंचने में दिक्कत नहीं आई. भजन लाल सरकार में चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का परिवार भी रॉयल और राजनीतिक घराना दोनों है.

विरासत से निकली महिला नेता 

--- सिद्धी कुमारी विधायक बीकानेर ---
बीकानेर के राजपरिवार की पूर्व राजकुमारी
इनके परिवार का सियासत में भी नाम रहा
बीकानेर के विकास में इनके परिवार का योगदान किसी से छुपा नहीं
यही कारण है कि वे कभी चुनाव नहीं हारी और लगातार विधायक बन रही

--- कल्पना राजे....लाडपुरा से विधायक ---
अभी बीजेपी की विधायक
कोटा राजघराने से ताल्लुक
इनके पति इज्यराज सिंह रह चुके कोटा से सांसद
इनके परिवार का कांग्रेस में भी दबदबा रहा

 --- नौक्षम चौधरी विधायक कामां ---
 हरियाणा के प्रसिद्ध परिवार से ताल्लुक
इनके परिवार का ज्यूडिशरी और ब्यूरोक्रेसी से ताल्लुक 
प्रभावी परिवार होने से सियासत में लाभ मिला

--- शांता अमृत लाल मीणा विधायक सलूंबर ---
राजनीतिक परिवार से होने से विधायक बनने में लाभ
इनके पति अमृत लाल मीणा रहे थे सलूंबर से विधायक
विधायक पति के निधन के कारण हुए उप चुनाव में मिली जीत 
सहानभूति ने इन्हें बनाया बीजेपी का विधायक
पति की लोकप्रियता के कारण बीजेपी को देना पड़ा टिकट

--- प्रियंका चौधरी विधायक बाड़मेर ---
विरासत का लाभ
मालानी के कद्दावर किसान नेता स्वर्गीय गंगा राम चौधरी की पोती
बाड़मेर से निर्दलीय चुनाव जीता
पृष्ठभूमि बीजेपी की रही
परिवार का इतना प्रभाव कि निर्दलीय चुनाव जीत गई

--- अलका सिंह गुर्जर पूर्व विधायक ---
पति नाथू सिंह गुर्जर कद्दावर नेता रहे
राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे नाथू सिंह गुर्जर 
नाथू सिंह का प्रभाव काम आया अलका सिंह को विरासत में
हालांकि अलका सिंह गुर्जर का. पीहर पक्ष भी समृद्ध राजनीतिक परिवार
अलका सिंह अभी बीजेपी की राष्ट्रीय मंत्री
वे बांदीकुई से विधायक रह चुकी

--- ज्योति मिर्धा बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष ---
पूर्व सांसद
प्रखर राजनीतिक परिवार से ताल्लुक
किसान हितैषी स्वर्गीय नाथू राम मिर्धा की पोती 
दादा के प्रभाव के कारण नागौर से सांसद कहलाई

--- गोलमा देवी पूर्व मंत्री ---
कृषि मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा की पत्नी 
मीणा क्षत्रप के तौर पर देशव्यापी पहचान है डॉ किरोड़ी की
यहीं प्रभाव गोलमा देवी को राजनीति में खींच लाया
आगे चलकर गोलमा देवी खुद चर्चित हो गई
गहलोत सरकार में मंत्री बनी
इनके पति डॉ किरोड़ी लाल मीणा बीजेपी के कद्दावर नेता

राजनीतिक ,राजपरिवार और प्रभावशाली परिवारों से होने के कारण सियायत में आगे बढ़ना आसान हो जाता है अगर परिवार कद्दावर है तो राह पहुंच जाती है लोकसभा और विधानसभा तक. लेकिन महिला आरक्षण मिलने के बाद राजनीतिक अधिकार बढ़ेंगे इससे राजनीति में सक्रिय उन महिला नेताओं को फायदा मिलेगा जिनके पीछे विरासत का प्रभाव नहीं है. भैरों सिंह शेखावत उर वसुंधरा राजे ने अपने अपने मुख्यमंत्रित्व काल मेंराज्य की सियासत में महिलाओं को आगे बढ़ाने का काम भी किया.