VIDEO: "संगठन अधूरा, चुनाव कैसे मजबूत?" कांग्रेस में जिलों में अधूरा पड़ा है संगठन, कांग्रेस के 15 जिलाध्यक्ष अकेले जूझ रहे, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज होने लगी हैं, लेकिन कांग्रेस का संगठन अब भी अधूरा है. जिलाध्यक्षों की घोषणा हुए करीब आठ महीने बीत चुके हैं, फिर भी सभी जिलों में जिला कार्यकारिणी का गठन नहीं हो पाया है. सवाल यह है कि क्या सिर्फ जिलाध्यक्ष के भरोसे कांग्रेस स्थानीय चुनाव की लड़ाई लड़ पाएगी, या संगठन की यह सुस्ती चुनावी प्रदर्शन पर असर डालेगी? पिछले साल संगठन सृजन अभियान के तहत कांग्रेस ने जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की थी. लेकिन आठ महीने बाद भी सभी जिलों में जिला कार्यकारिणी का गठन पूरा नहीं हो सका है.

पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती हाईकमान का वह निर्देश है, जिसमें बड़े जिलों में 51 और छोटे जिलों में 31 सदस्यीय कार्यकारिणी बनाने की सीमा तय की गई है. यही सीमित संख्या अब प्रदेश नेतृत्व के लिए राजनीतिक सिरदर्द बन गई है. हर जिले में विधायक, सांसद, पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक, चुनाव लड़ चुके नेताओं और स्थानीय गुटों के समर्थकों को प्रतिनिधित्व देने का दबाव है. ऐसे में किसे जगह मिले और किसे नहीं.यही सबसे बड़ा सवाल बन गया है.

जिलाध्यक्षों की घोषणा के करीब 8 महीने बाद भी सभी जिलों में कार्यकारिणी नहीं: 
-सीमित पदों के कारण नेताओं और कार्यकर्ताओं में असंतोष
-निकाय और पंचायत चुनाव से पहले संगठन अधूरा
-पिछले साल 22 नवंबर को प्रदेश में 45 जिलाध्यक्षों की घोषणा की थी
-इस साल जनवरी में शेष पांच जिलाध्यक्षों के नाम भी घोषित हो गए
-लेकिन कुल 50 में से 35 जिलों में ही कार्यकारिणी बन सकी है अब तक
-35 जिलों की कार्यकारिणी भी अलग-अलग चरणों में हो सकी है
-15 जिलों में अकेले जिलाध्यक्ष ही संगठन को चलाने में जूझ रहे हैं
-आठ महीने में प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यकारिणी तय नहीं कर पाई है
-विधायकों सहित अन्य नेताओं में सहमति बनाने में हो रही परेशानी
-पीसीसी से करीब 2200 मंडल अध्यक्ष भी नियुक्त किए थे पूरे प्रदेश में
-लेकिन पिछले दिनों हुए रिव्यू में करीब 25 फीसदी मंडल अध्यक्ष निष्क्रिय पाए गए

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्थानीय निकाय चुनाव सिर्फ चेहरे से नहीं, बल्कि बूथ स्तर के संगठन से जीते जाते हैं. जिला कार्यकारिणी ही मंडल, ब्लॉक और बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने का काम करती है, लेकिन जहां कार्यकारिणी ही नहीं बनी, वहां चुनावी रणनीति और कार्यकर्ताओं के समन्वय की जिम्मेदारी फिलहाल अकेले जिलाध्यक्षों के कंधों पर है. यही वजह है कि विपक्ष कांग्रेस की संगठनात्मक तैयारी पर सवाल उठा रहा है. राजधानी जयपुर पर सभी की निगाहें हैं लेकिन यहां के जिलाध्यक्ष भी अकेले ही जूझ रहे हैं. कार्यकारिणी कब बनेगी, उनको भी नहीं पता. जयपुर शहर अध्यक्ष सुनील शर्मा से जब इस बारे में पूछा तो कहा कि यह तो पीसीसी अध्यक्ष व प्रदेश प्रभारी ही तय करेंगे.

कांग्रेस का दावा है कि सभी स्थानीय नेताओं से राय-मशविरा कर कार्यकारिणी बनाई जा रही है, इसलिए प्रक्रिया में समय लग रहा है. पार्टी का दावा है कि चुनाव तक सभी जिलों में संगठन खड़ा कर दिया जाएगा, लेकिन राजनीतिक सवाल यह है कि यदि चुनाव की घोषणा जल्द हो गई तो क्या अधूरे संगठन के साथ कांग्रेस बीजेपी जैसी संगठित पार्टी का मुकाबला कर पाएगी?  निकाय और पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों से ज्यादा मजबूत संगठन की परीक्षा होती है. कांग्रेस के सामने चुनौती सिर्फ कार्यकारिणी घोषित करने की नहीं, बल्कि नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने की भी है. चुनाव से पहले संगठन पूरा होता है या नहीं, उसी पर कांग्रेस की चुनावी तैयारी की असली तस्वीर साफ होगी.