नई दिल्ली: लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है. ये 25-30 साल पहले ही हो जाना चाहिए था. समय-समय पर इसमें सुधार होते रहते हैं. तथ्य, तर्क से सदन को जानकारी दें. हम देश को नई दिशा देने जा रहे हैं. ये मौका मिलना हम सबका सौभाग्य है.
इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा आज सुबह शुरू हुई. कई सदस्यों ने विभिन्न मुद्दे उठाए हैं, और हम उन मामलों पर सदन को विस्तृत और सटीक जानकारी देंगे. इसीलिए मैं उन बारीकियों में नहीं जाना चाहता. किसी देश के जीवन में कुछ महत्वपूर्ण क्षण आते हैं. ऐसे समय में, समाज की मानसिकता और नेतृत्व की क्षमता उस क्षण को अपने पक्ष में कर लेती है और उसे राष्ट्र के लिए एक पूंजी में बदल देती है, जिससे एक मजबूत विरासत का निर्माण होता है. भारत के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में, ये ऐसे ही क्षण हैं.
मेरे लिए संविधान ही सर्वोपरि है:
विपक्ष ने पहले इस बिल का विरोध नहीं किया. 2024 चुनाव में महिला आरक्षण का विरोध नहीं हुआ. विपक्ष साथ दे, इसी में उसका फायदा है. पंचायतों में आरक्षण आराम से दे देते हैं. पंचायतों में पद जाने का डर नहीं होता. सभी दलों को बिल का समर्थन करना चाहिए. विरोध करने वालों को देश माफ नहीं करेगा. मेरे लिए संविधान ही सर्वोपरि है.
हम कुछ दे नहीं रहे,ये उनका हक है:
पीएम मोदी ने आगे कहा कि मैं अति पिछड़े समाज से आता हूं. मेरी जिम्मेदारी है सभी को साथ लेकर चलूं. संविधान की वजह से मुझे इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिली है. ये राष्ट्रहित का निर्णय है. सब साथ रहे तो किसी एक दल को फायदा नहीं है. नीयत में खोट, नारी शक्ति माफ नहीं करेगी. इस बिल को राजनीतिक रंग ना दें. ये मोदी की गारंटी है, ये मोदी का वादा है. हम कुछ दे नहीं रहे,ये उनका हक है. नीयत साफ हो तो शब्दों का खेल नहीं.
आप विरोध करेंगे तो मुझे राजनीतिक लाभ होगा:
महिला आरक्षण नारी शक्ति का हक है. बात मैं और तुम की नहीं, बात हम की है. आप विरोध करेंगे तो मुझे राजनीतिक लाभ होगा. साथ दिया तो विज्ञापन छपवाकर धन्यवाद. क्रेडिट का ब्लैंक चेक मैं आपको दे रहा हूं. मुझे क्रेडिट नहीं चाहिए, आप ले लीजिए.