जयपुर: प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत जयपुर को आधुनिक इलेक्ट्रिक बसों का बड़ा बेड़ा मिलने की घोषणा हुई थी लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है. योजना के अनुसार जयपुर को 150 बसें मिलनी थी लेकिन वर्तमान में शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था केवल 29 इलेक्ट्रिक बसों के सहारे संचालित हो रही है.
शहर में लगातार बढ़ती आबादी और यात्रियों की संख्या के मुकाबले बसों की भारी कमी बनी हुई है. कई प्रमुख मार्गों पर यात्रियों को लंबे समय तक बसों का इंतजार करना पड़ता है, जबकि कई रूटों पर बसों की आवृत्ति भी प्रभावित हो रही है. ऐसे में 150 नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में हो रही देरी से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. PM ई बस योजना में जयपुर शहर को कुल 150 बसें मिलनी हैं लेकिन कई महीने के ट्रायल के बाद भी प्रदेश के सबसे बड़े शहर में सिर्फ़ 29 ई बसें ही चल पाईं है ,वर्तमान में संचालित इलेक्ट्रिक बसों में भी कई तकनीकी और परिचालन संबंधी समस्याएं सामने आ रही हैं.
एक भी इलेक्ट्रिक बस में जीपीएस प्रणाली पूरी तरह सक्रिय नहीं हो सकी है. इससे बसों की लाइव ट्रैकिंग, संचालन की निगरानी और यात्रियों को वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था प्रभावी नहीं बन पाई है.इसके अलावा इलेक्ट्रिक बसों की बैटरियां भी पूरी क्षमता तक चार्ज नहीं हो पा रही हैं. बताया जा रहा है कि अधिकांश बसों की बैटरी 100 प्रतिशत तक चार्ज नहीं होती, जिसके कारण उनकी परिचालन क्षमता प्रभावित होती है. इसका सीधा असर बसों के दूसरे चरण के संचालन पर पड़ रहा है. प्रतिदिन लगभग पांच से सात बसों का दूसरी पारी में संचालन निरस्त करना पड़ रहा है, जिससे यात्रियों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ रही है.
सबसे अधिक दिक्कत दोपहर 12 बजे से 2 बजे के बीच देखने को मिलती है. इस दौरान अधिकांश इलेक्ट्रिक बसें चार्जिंग के लिए डिपो पहुंच जाती हैं, जिसके कारण कई रूटों पर एक भी बस उपलब्ध नहीं रहती. ऐसे समय में यात्रियों को निजी वाहनों, ऑटो या अन्य साधनों पर निर्भर होना पड़ता है. स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना रहा है टोडी डिपो का अधूरा चार्जिंग ढांचा. जानकारी के अनुसार वहां अभी तक चार्जिंग सिस्टम पूरी तरह शुरू नहीं हो सका है. इससे बसों के संचालन और चार्जिंग प्रबंधन पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है. यदि टोडी डिपो में चार्जिंग व्यवस्था शीघ्र शुरू नहीं होती है तो भविष्य में बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में भी कठिनाइयां आ सकती हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी जयपुर में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत बनाने के लिए नई इलेक्ट्रिक बसों का समय पर संचालन, चार्जिंग अवसंरचना का विकास, जीपीएस प्रणाली की पूर्ण शुरुआत तथा बैटरी प्रबंधन में सुधार अत्यंत आवश्यक है. जब तक ये व्यवस्थाएं पूरी तरह विकसित नहीं होतीं, तब तक शहरवासियों को सुगम, विश्वसनीय और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन का लाभ मिल पाना मुश्किल होगा. अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि जेसीटीएसएल और संबंधित एजेंसियां इन कमियों को दूर कर 150 पीएम ई-बसों को आखिर कब सड़कों पर उतार पाएंगी.