जयपुर के मूक-बधिर विद्यालय में छात्रों का प्रदर्शन, बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण धरने पर बैठे छात्र, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः जयपुर के राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार मूक-बधिर उच्च माध्यमिक विद्यालय में आज उस समय हंगामा मच गया, जब बुनियादी सुविधाओं की बदहाली से परेशान दिव्यांग छात्र-छात्राएं प्रदर्शन पर उतर आए. छात्रों का आरोप है कि स्कूल में शौचालयों की हालत बेहद खराब है, पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और कई कक्षाओं की दीवारें जर्जर होकर दरक चुकी हैं. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी स्कूल पहुंचकर विद्यार्थियों से मुलाकात की. गहलोत ने सरकार पर दिव्यांग बच्चों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जल्द समाधान की मांग करने की बात कही. आखिर क्या हैं बच्चों की मांगें और क्यों फूटा उनका गुस्सा. 

धरने पर बैठे इन मासूम मूक-बधिर बच्चों के बीच उनके इशारों में छिपी पीड़ा और आँखों में तैरते सवालों को देखकर हर किसी का मन भीतर तक व्यथित हो जाता है. उनकी खामोशी किसी भी शब्द से अधिक मुखर थी. वे बोल नहीं सकते, लेकिन उनकी नम आँखें मानो व्यवस्था से पूछ रही थीं—क्या हमें सुरक्षित विद्यालय, प्रशिक्षित शिक्षक और सम्मानजनक शिक्षा का अधिकार नहीं है? जिन बच्चों को कक्षा में अपने सपने संजोने चाहिए थे, वे आज अपने बुनियादी अधिकारों के लिए धरने पर बैठे हैं. इनकी पीड़ा की अनदेखी केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की भी गंभीर परीक्षा है. नन्हे हाथों के प्रत्येक इशारे में दर्द था, प्रत्येक चेहरे पर बेबसी थी और प्रत्येक आँख में न्याय की उम्मीद थी. जिन बच्चों को कक्षाओं में बैठकर अपने भविष्य के सपने सँजोने चाहिए थे, वे आज अपने बुनियादी अधिकारों के लिए सड़कों पर धरना देने को मजबूर हैं.  जयपुर के राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार मूक-बधिर उच्च माध्यमिक विद्यालय में इन दिनों कक्षाओं की बजाय धरना स्थल पर बच्चों की मौजूदगी चर्चा का विषय बनी हुई है. अपनी मांगों को लेकर मूक-बधिर छात्र-छात्राएं विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. बच्चे और उनके अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय में शिक्षकों की कमी, संसाधनों का अभाव और विशेष शिक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं में खामियां लंबे समय से बनी हुई हैं. उनका कहना है कि कई बार मांग उठाने के बावजूद समाधान नहीं हुआ, जिसके बाद उन्हें धरने का रास्ता अपनाना पड़ा. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी विद्यालय पहुंचकर छात्रों से मुलाकात की. गहलोत ने कहा कि मूक-बधिर बच्चों को अपनी बात कहने के लिए धरना देना पड़े, यह बेहद दुखद है. उन्होंने बताया कि सार्वजनिक जीवन में आने के शुरुआती दौर से ही वे मूक-बधिर बच्चों की शिक्षा से जुड़े रहे हैं, इसलिए उनकी समस्याओं को अच्छी तरह समझते हैं. गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से विशेष टीम भेजकर पूरे मामले की जांच कराने और छात्रों की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग की.

धरने की जानकारी मिलने पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली विद्यालय पहुंचे. उन्होंने बच्चों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. जूली ने कहा कि जिन बच्चों को कक्षाओं में होना चाहिए, वे अपने अधिकारों के लिए सड़क पर बैठने को मजबूर हैं. उन्होंने सरकार से तत्काल उनकी मांगों पर कार्रवाई करने की मांग की.     

विरोध प्रदर्शन की सूचना मिलते ही शिक्षा विभाग की टीम मौके पर पहुंची और निरीक्षण के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आने के बाद प्रिंसिपल को तत्काल हटा दिया गया. एक शिक्षक और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को भी एपीओ कर दिया गया. हालांकि, इस विवाद का मूल मुद्दा विद्यालय में शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़ा बताया जा रहा है. प्रदर्शन कर रहे छात्र और अभिभावक प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता, नियमित पढ़ाई, विशेष शिक्षण संसाधनों और अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.