VIDEO: नकली दवाओं की "सेफगाह" बनता दिख रहा राजस्थान ! ड्रग आयुक्तालय की कार्रवाई ने खोली दवा माफियाओं की पोल, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: नकली दवा के "खेल" में लिप्त माफियाओं ने राजस्थान को "सेफगाह" मानते हुए धडल्ले से कारोबार शुरू कर रखा है.ये कोई हमारा आरोप नहीं, बल्कि ड्रग आयुक्तालय की जांच में सामने आई चौंकाने वाली हकीकत है.हाल ही में जयपुर से एंटीबायोटिक-कैल्सियम जैसे कॉमन दवाओं के उठाए गए चार सैम्पलों में से तीन नकली मिले है.इसके साथ ही शेष बची एक दवा का सैम्पल भी अमानक श्रेणी का चिन्हित किया गया है.एकसाथ चार दवाओं की रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद खुद आयुक्तालय के अधिकारी सकते में है.दवाओं के स्टॉक को जब्त करने के साथ ही बड़ी कार्रवाई शुरू की गई है.

जो दवा आप "मर्ज" को खत्म करने के लिए खा रहे है, वो ही आपको बीमार कर सकती है.क्यों चौंक गए.लेकिन राजधानी जयपुर में सामने आए ताजा मामले ने कुछ ऐसे ही खुलासा किए है.नकली दवा बनाने वाली कम्पनियों को अलग अलग परिभाषा की आड़ में लीगल "छूट" देने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि एकबार फिर भरतपुर से मिले एक इनपुट ने ड्रग आयुक्तालय के अधिकारियों की नींद उठा दी है.

भरतपुर में रूटिन जांच के दौरान एक दवा नकली पकड़ी गई, जिसके बाद आयुक्तालय की टीम ने जयपुर के कटेवा नगर में स्थित IQUMED हेल्थकेयर पर कारवाई की.टीम ने यहां से चार दवाओं के सैम्पल उठाए, जिसमें से QCPOD, QCCAL, KILLMED दवा नकली पाई गई.इसके अलावा EXTENSIVE दवा भी गंभीर श्रेणी की अवमानक मिली है.ऐसे में आनन-फानन में ड्रग आयुक्तालय की तरफ से प्रदेशभर में अलर्ट जारी किया गया है.साथ ही 12.78 लाख रुपए कीमत की दवाओं का स्टॉक भी जब्त किया गया है.

आमजन की सेहत से सीधे जुड़े मामले में ड्रग आयुक्तालय अब एग्रेसिव मोड में है.ड्रग आयुक्त टी शुभमंगला के निर्देश पर अधिकारियों की टीम को दवाओं की मैल्यूफेक्चरिंग कम्पनियों VADSP फार्मास्युटिकल और मस्कन लाइफ साइंसेज की जांच के लिए हिमाचल और उत्तराखण्ड भेजा गया, जहां भी कई तरह की अनियमिताएं सामने आई है.ऐसे में आयुक्तालय ने दोनों राज्यों के ड्रग कंट्रोलर के साथ ही ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया को भी कार्रवाई के लिए पत्र भेजा है.इसके साथ ही कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी है.

नकली दवाओं का तीन साल का रिपोर्ट कार्ड: 
साल ::::::::::: नकली दवाओं के प्रकरण

2023::::::16
2024::::::39
2025::::::03

सख्त सजा, लेकिन कमजोर मॉनिटरिंग से एक्टिव माफिया:
-नकली दवा मामले में दोषी कम्पनियों पर सख्त कार्रवाई के नियम है
-ऐसे प्रकरण केस दर्ज होने के बाद कोर्ट में सुनवाई होती है
-नकली दवा का दावा सही पाए जाने पर 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा होती है
-ऐसे में इन प्रकरणों में लिप्त कम्पनी और उनके प्रतिनिधि अभियोजन स्वीकृति रूकवाने के हर संभव प्रयास करते है
-ताकि किसी भी तरह प्रकरण पुराना हो जाए और कोर्ट से उन्हें राहत मिले
-पिछले तीन सालों की बात की जाए तो इस काम में काफी धीमी गति देखी गई
-लेकिन अब सख्ती के बाद अभियोजन स्वीकृति के काम में कुछ तेजी जरूर देखी गई है