VIDEO: हिन्दू शब्द और राजपूताना, हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा से जुड़ा रहा राजस्थान, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: वर्तमान में हिंदू राष्ट्र का मुद्दा बेहद चर्चा में है और गरमाया हुआ है. राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस बारे में बयान देकर फिर मुद्दे को उछाला है. बहरहाल राजपूताना के इतिहास में हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को अलग तरीके से प्रस्तुत किया लेकिन अंतिम हिन्दू सम्राट के तौर पर सम्राट पृथ्वी राज चौहान को माना गया वही महाराणा प्रताप को हिंदुवा सूरज कहा गया.

"त्याग,तपस्या और बलिदान " की धरती राजपूताना में दो ऐसे पराक्रमी हुई जिन्हें उस समय हिंदुस्तान को एक और अखंड रखने के लिए अपनी जिंदगी को दांव पर लगा दिया. एक थे मेवाड़ के महाराणा प्रताप जिन्हें हिंदुवा सूरज कहा गया दूसरे थे दिल्ली के अंतिम हिन्दू शासक सम्राट पृथ्वीराज चौहान. जब बात हिंदू राष्ट्र की हो रही है तब महाराणा प्रताप का जिक्र इसलिए आता है क्योंकि उनके नाम के साथ हिंदुओं का सूरज जुड़ा हुआ है. वरिष्ठ साहित्यकार जितेंद्र सिंह शेखावत कहते है कि मेवाड़ हमेशा से हिंदुओं के लिए सिरमौर रहा है. अमरसार, प्रताप रासो, अमर काव्य और राज प्रशस्ति के अंदर हिंदुआ सूरज के सिरमोर की बात की गई है. राणा प्रताप के साथ ये शुरुआत से ही जुड़ा है कि उन्होंने कभी अपना आत्मसम्मान नहीं बेचा इसलिए उन्हें हिंदुवा सूरज कहा गया.

-- महाराणा प्रताप - हिंदुवा सूर्य --
- महाराणा प्रताप के नाम के साथ हिंदुओं सूरज जुड़ा हुआ है
- राणा प्रताप के साथ ये शुरुआत से ही जुड़ा है 
 उन्होंने कभी अपना आत्म सम्मान नहीं बेचा
- अकबर की साम्राज्यवाद नीति का उन्होंने विरोध किया
- अधीनता स्वीकार नहीं करने के कारण वे हिंदुवा सूरज कहलाए

बात जब हिंदू राष्ट्र की आती है तो अंतिम हिन्दू सम्राट के तौर पर अजमेर और दिल्ली के शासक सम्राट पृथ्वी राज चौहान का नाम आता है. प्रख्यात इतिहासकार और पृथ्वीराज रासो के रचियता चंद बरदाई ने  भारत को एक अखंड 'हिंदू राष्ट्र' सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान के रूप में प्रस्तुत किया है. उनकी लेखनी उस काल के हिंदू राजाओं की वीरता और स्वाभिमान का प्रतीक हैं. आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने ‘पृथ्वीराज रासो’ को जाली ग्रंथ घोषित करते हुए भी चंदबरदाई को हिंदी का प्रथम महाकवि और ‘पृथ्वीराज रासो’ को हिंदी का पहला महाकाव्य घोषित किया है.चंदबरदाई ने पृथ्वी राज चौहान को भारत का अंतिम हिन्दू सम्राट कहा गया वे अजमेर, सांभर और दिल्ली के शासक थे.

--- हिंदू राष्ट्र और पृथ्वी राज चौहान ---
-पृथ्वी राज रासो समेत कई ग्रंथों और पुस्तकों में पृथ्वी राज चौहान को अंतिम हिन्दू सम्राट की संज्ञा दी गई
- अर्थ था छोटी हिन्दू रियासतों को एकत्रित कर विदेशी आक्रांता मुहम्म्द गौरी के हमलों से देश की रक्षा करना 
- 1192 के बीच पृथ्वीराज चौहान का राज्य अजमेर से दिल्ली तक फैला हुआ था
- पृथ्वी राज का साम्राज्य वर्तमान राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों तक फैला हुआ था, जिसे 'सपादलक्ष' कहा गया
- दिल्ली में अब खण्डहर हो चुके किला राय पिथौरा के निर्माण का श्रेय पृथ्वीराज को दिया जाता है
- पृथ्वीराज को एक देशभक्त हिन्दू योद्धा के रूप में चित्रित किया गया कारण रहा विदेशी मुस्लिम आक्रांतों के खिलाफ जंग लड़ी और प्राणों की आहुति दी

19 - 20 वीं सदी में हिंदू राष्ट्र को लेकर वीर सावरकर और हिन्दू महासभा का उल्लेख आता है और मौजूद दौर में RSS प्रमुख मोहन भागवत के कथन भी सामने आए है..पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने हिंदू राष्ट्र बन चुका है कि बात कह दी. कुल मिलाकर हिंदू राष्ट्र माले राजनीति को गरमाने का काम किया.