जयपुर : सचिवालय में अब छत टपकने से काफी हद तक निजात मिल सकती है. इसके लिए एपीपी शीट बिछाने का कार्य जोरों पर है और दो माह में इसके पूरे होने के बाद सचिवालय की बड़ी समस्या दूर हो जाएगी.
सचिवालय में छत टपकने सहित कई कारणों से कर्मचारियों की नाराजगी झेलने वाली पीडब्ल्यूडी शाखा अब एक बड़ी समस्या से निजात दिलाने को लेकर एक्टिव हो गई है.
क्या है पीडब्ल्यूडी की सक्रियता ?
सचिवालय के पुराने भवनों की छत से पानी न टपके,इसके लिए पीडब्ल्यूडी ने मेगा प्लान होथ में लिया है.
इसके तहत सचिवालय में पुराने भवनों में एटेक्टिक प्रोपीलिन पोलिमर यानि पीपीपी शीट बिछाई जा रही है.
कुल 5750 स्कवायर मीटर छत पर इसे बिछाया जा रहा है.
3 मिमी मोटी इस शीट की कम से कम दो साल तक की जिंदगी रहती है लेकिन इसके साल ब्रोकन टाइल्स लगाई जाती है जो कि बीच के अंतर को भरती है और इससे लाइफ बढ़ जाती है.
टाइल्स सहित शीट की लाइफ दुगुनी बढ़ जाती है.
इस शीट को बिटुमिन का प्राइमर लगाकर गैस से चिपकाते हैं.
अब तक 400 स्कवायर मीटर शीट लगाई जा चुकी है.
हालांकि यह शीट बारिश के मौसम में नहीं बिछाई जाती है.
--- एक्रिलिक इमलशन वाटरप्रूफिंग ---
जहां यह शीट बारिश में नहीं लगाई जा सकती तो वहीं एक्रिलिक इमलशन वाटरप्रूफिंग बारिश रुकने के बाद हल्की गीली सतह पर भी हो सकती है.
क्या है लागत ?
शीट बिछाने का खर्चा 413 रुपये प्रति स्कवायर मीटर है.
एक्रिलिक का काम कराने का खर्चा 526 रुपये प्रति स्कवायर मीटर है.
पीडब्ल्यूडी ने 16 जुलाई 2025 को 59 लाख 38 हजार 784 रुपये के खर्चे पर काम दिया है.
क्या है चुनौती ?
इस काम में सबसे बड़ी चुनौती सचिवालय की छत पर पड़े डक्टिंग के उपकरण और जगह-जगह फैली केबल्स हैं.
हालांकि इन्हें ढंककर इस काम को परवान पर चढ़ाया गया है जिसमें काफी हद तक सफलता मिलने का अनुमान है.
ऐसे में केन्द्रीकृत वीआरवी एसी लगाए जाने की चर्चा है और यह प्रोजेक्ट सिरे चढ़ा तो पीपीपी शीट की सफलता भी बढ़ जाएगी और छत टपकने जैसी स्थिति से निजात मिल सकेगी.
दरअसल सचिवालय की मरम्मत के काम के कई स्तर हैं जिसमें से एक पर शीट बिछाकर काम किया जा रहा है. एक अन्य स्तर पर छज्जे को कपलिंग लॉक शटरिंग से बांधने की कोशिशें जारी हैं जिसका नतीजा जल्द सामने आने के आसार हैं.