VIDEO: SMS अस्पताल परिसर स्थित IPD टावर मामला: एक बार फिर से प्रोजेक्ट की लागत में हुई बढ़ोतरी, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के IPD टावर प्रोजेक्ट की लागत में फिर से बढ़ोतरी हुई है. बढ़ी हुई लागत पर जेडीए की अधिकृत समिति ने मंजूरी दे दी है. इस वर्ष के अंत तक प्रोजेक्ट का काम पूरा होने की है उम्मीद. देश के सबसे ऊंचे मेडिकल टावर के तौर पर पिछली कांग्रेस सरकार के समय यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट शुरू किया गया था. देश भर के नामी चिकित्सकों की मौजूदगी में 5 अप्रेल 2022 को इसका शिलान्यास किया था. इस प्रोजेक्ट में अब तक एक दो साल एक महीने की देरी हो चुकी है. वर्ष 2024 नवंबर में इस प्रोजक्ट का पूरा काम किया जाना था, लेकिन कई कारणों के चलते इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में देरी हुई है. अब इस वर्ष दिसंबर तक काम पूरा करने की डेडलाइन रखी है. 

इस प्रोजेक्ट की पूरी विस्तृत जानकारी: 
-आईपीडी टावर प्रोजेक्ट का जब शिलान्यास किया गया था तब इसकी मूल लागत 456 करोड़ रुपए थी
-इस प्रोजेक्ट में दो बेसमेंट,ग्राऊंड फ्लोर और ऊपरी 24 मंजिलें प्रस्तावित हैं
-इसमें बाद में शामिल हुई तीन सर्विस फ्लोर हटा दें तो मूलत: यह प्रोजेक्ट 24 मंजिला ही है
-इस आईपीडी टावर में 1243 बेड, 20 ऑपरेशन थिएटर, 4 कैथ लैब, 100 ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर
-और विश्व स्तरीय मोर्चरी की सुविधा प्रस्तावित है
-आपात स्थिति के लिए टावर के छत पर हेलीपैड भी बनाया जाना है
-प्रोजेक्ट का जब  काम  शुरू किया गया तब इसे पूरा करने की तिथि नवंबर 2024 थी
-बाद में प्रोजेक्ट की डिजाइन में कई बदलाव करते हुए तीन सर्विस फ्लोर भी डिजाइन में जोड़े गए

जेडीए आयुक्त सिद्धार्थ महाजन की अध्यक्षता में हाल ही जेडीए की परियोजना कार्य समिति (PWC) की बैठक हुई थी. बैठक में इस प्रोजेक्ट को लेकर संशोधित प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति दी गई. लागत बढ़ने के चलते 665 करोड़ रुपए के बजाए 764 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई. आपको बताते हैं कि प्रोजेक्ट की लागत में किस तरह हुई बढ़ोतरी और प्रोजेक्ट में कितना काम है अभी शेष.

कैसे बढ़ी लागत और कितना काम शेष?:
-प्रोजेक्ट की लागत 665 करोड़ से बढ़कर हो गई 764 करोड़
-जेडीए की PWC की बैठक में इस बढ़ी हुई लागत पर दी गई मंजूरी
-निर्मित एरिया बढ़ने व एक्स्ट्रा आइटम बढ़ने से बढ़ गई लागत
-निर्मित एरिया 60 हजार से बढ़ाकर कर दिया 87 हजार वर्ग मीटर
-जब प्रोजेक्ट का काम शुरू हुआ था तब लागत थी 538 करोड़ रुपए
-प्रोजेक्ट में काम बढ़ने से फिर लागत बढ़कर हो गई 664 करोड़ रुपए
-कांग्रेस सरकार के समय इस बढ़ी हुई लागत को किया गया मंजूर
-अब एक बार फिर प्रोजेक्ट की लागत बढ़कर हो गई है 764 करोड़
-प्रोजेक्ट के लिए जेडीए व आवासन मंडल की है हिस्सेदारी
-लागत में दोनों की हिस्सेदारी है 220-220 करोड़ रुपए
-दोनों एजेसिंया करीब-करीब दे चुकी हैं अपनी हिस्सेदारी
-इसी तरह स्मार्ट सिटी परियोजना की हिस्सेदारी है 125 करोड़ रुपए
-स्मार्ट सिटी परियोजना में से भी लगभग पूरी ली जा चुकी है राशि
-इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग पूरी ली जा चुकी है राशि
-प्रोजेक्ट की लागत की शेष राशि वहन करेगा चिकित्सा विभाग
-चिकित्सा विभाग की ओर से अब तक दिए जा चुके है 99 करोड़ रुपए
-प्रोजेक्ट के लिए गठित हाई पावर कमेटी की हुई थी बैठक
-पिछले वर्ष हुई बैठक में कमेटी की ओर से किए गए फैसले के अनुसार
-प्रोजेक्ट की लागत बढ़ने पर अतिरिक्त राशि वहन करेगा चिकित्सा विभाग
-इस लिहाज से लागत में बढ़ी हुई राशि 99 करोड़ रुपए देगा चिकित्सा विभाग
-इस प्रोजेक्ट में IPD टावर के साथ बिल्डिंग है शामिल
-कार्डियो वेस्क्यूलर साइंस बिल्डिंग भी प्रोजेक्ट में हैं शामिल
-इस बिल्डिंग का काम मार्च तक पूरा कर दिया जाएगा
-इस चौबीस मंजिला टावर के स्ट्रक्चर का काम पूरा हो चुका है
-छह से चौदह मंजिल तक का फिनिशिंग का काम करीब पूरा हो चुका है
-प्रथम मंजिल से छह मंजिल तक के फिनिशिंग का काम अभी चल रहा है
-ग्राउंड फ्लोर के फिनिशिंग वर्क के लिए डिजाइन फाइनल नहीं हो पाई है
-हैलीपेड का निर्माण अभी शुरू नहीं किया गया है
-स्वीकृति के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) में फाइनल डिजाइन सबमिट कर दी है
-मार्च तक हैलीपेड निर्माण की स्वीकृति मिलने के बाद काम शुरू होने की उम्मीद है
-इमारत के फसाड पर ग्लास लगाने के लिए डिजाइन फाइनल कर दी गई है
-ग्लास लगाने के लिए मैटेरियल मंगा लिया गया है,एक-दो दिन में काम शुरू होगा

पिछले तीन साल और दस महीने इस प्रोजेक्ट का काम चल रहा है. प्रोजेक्ट का मकसद प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है. इसके लिए इस प्रोजेक्ट तमाम भावी आवश्यकताओं का ध्यान रखा गया है. उम्मीद यही है कि लेटलतीफी का शिकार यह प्रोजेक्ट इस बार तय की गई डेडलाइन में पूरा हो.