जयपुरः सवाई मानसिंह अस्पताल में पिछले साल गलत ब्लड चढ़ाने के बाद हुई महिला की मौत का मामला एक बार फिर चर्चाओं में है. 23 वर्षीय गर्भवती महिला चैना देवी की मौत के मामले गठित हाईलेवल जांच कमेटी की रिपोर्ट को आए करीब छह माह बीत चुके हैं,लेकिन ट्रॉमा ICU अग्निकांड की तरह ही इस प्रकरण की फाइल भी ठंडे बस्ते में है. रिपोर्ट में दोषी होने के बावजूद अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है. इस रवैए के चलते चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रशासनिक कार्यप्रणाली सवालो के घेरे में है.
प्रदेश के बड़े सरकारी अस्पतालों में सामने आ रही गंभीर प्रवृत्ति की प्रशासनिक लापरवाहियों के मामले में चिकित्सा शिक्षा विभाग सिर्फ जांच कमेटी बनाकर लीपापोती में जुटा हुआ है. पिछले दिनों ट्रोमा सेंटर की जांच रिपोर्ट आने के 3 माह बाद भी कार्यवाही करने के बजाए उस फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया. वहीं गलत ब्लड से ही चैनी देवी की मौत के मामले में बनी कमेटी की रिपोर्ट पर भी अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई. इस मामले की फाइल पिछले छह माह से धूल फांक रही है.
पूरे घटनाक्रम पर एक नजर
टोंक के निवाई की रहने वाली 23 साल की महिला को 12 मई 2025 को एसएमएस की इमरजेंसी से भर्ती करवाया गया था.
तब महिला को बुखार, सांस लेने में दिक्कत और चेस्ट इन्फेक्शन की शिकायत थी, जांच में टीबी की भी पुष्टि हुई
डॉक्टरों के मुताबिक यूनिट-7 में भर्ती महिला को शुरू से ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा था.
ज्यादा हालत बिगड़ने पर महिला को बायपेप (सांस लेने का सिस्टम) पर रखा गया.
बायपेप पर भी स्थिति में सुधार नहीं आया तो महिला को 15 मई को वेंटिलेटर पर लिया गया.
इस दौरान गर्भवती के पेट में ही बच्चे की मौत हो गई, जिस पर डॉक्टर्स ने दवाई देकर मृत बच्चे को बाहर निकाला
इसी दौरान हिमोग्लोबिन कम होने पर महिला को ब्लड चढ़ाया गया था.
लेकिन तभी अचानक महिला की तबीयत बिगड़ी, तो पता चला कि उसे गलत ब्लड चढ़ा दिया गया है
डॉक्टरों के मुताबिक जैसे ही महिला को ब्लड चढ़ाया. एक से दो मिनट बाद ही महिला का शरीर कांपने लगा.
ऐसे में आनन फानन में ब्लड की सप्लाई रोक दी. वापस ब्लड सैंपल लेकर भेजा.
अब जब जांच रिपोर्ट आई तो उसमें महिला का ब्लड ग्रुप B+ बताया.
इसके बाद महिला की 21 मई की रात को मौत हो गई,
चैना देवी की रिपोर्ट की बानगी....!
रिपोर्ट के मुताबिक प्रकरण में ब्लड बैंक ने फोलो नहीं किया निर्धारित "स्टेण्डर्ड प्रोटोकॉल"
इस दौरान न तो रिवर्स मैथर्ड से नहीं जांचा गया ग्रुप, न ही फार्म में किया गया जिक्र
सिर्फ फॉरवर्ड मेथड के आधार पर ही महिला के ब्लड ग्रुप को माना गया "ए" पॉजिटिव
ये भी पाया गया कि सैम्पल वाइल चेंज होने से महिला को चढ़ा "बी" के बजाय "ए" पॉजिटिव ब्लड
जांच में ये भी सामने आया कि जिन्दगी-मौत से जूझती महिला को चढ़ाया पुरूष मरीज के ब्लड सैम्पल जांच के आधार पर ब्लड
रिपोर्ट के मुताबिक चैना देवी के 18 और 21 मई 2025 को निकाले गए सैम्पल
इस दौरान 18 मई का सैम्पल ब्लड बैंक की लापरवाही के चलते कुछ इस तरह हुआ वाकया
कि देखते ही देखते किसी पुरूष मरीज के सैम्पल से हो गया महिला का ब्लड सैम्पल चेंज
खुद एफएसएल की जांच में हुई पहले ब्लड सैम्पल के किसी पुरूष मरीज के होने की पुष्टि
हालांकि,रिपोर्ट के मुताबिक 23 वर्षीय चैना देवी को काफी गंभीर हालत में लाया गया था SMS
टीबी,एनिमिया से जूझ रही पांच माह की गर्भवती महिला का गर्भस्थ शिशु तोड़ चुका था दम
लेकिन फिर भी ब्लड बैंक के स्तर पर हुई लापरवाही को भी माना गया "मौत" के लिए जिम्मेदार
ब्लड बैंक प्रभारी समेत पांच को जांच में माना गया दोषी
बात पिछले साल SMS अस्पताल में गलत ब्लड चढ़ाने की गंभीर घटना से जुड़ी
कमेटी ने इस प्रकरण में पेश की जांच रिपोर्ट में ब्लड बैंक का टैक्नीशियन अली हैदर,
मो. नाहिद नकवी, नर्सिंग ऑफिसर बच्चन सिंह यादव, ड्यूटी डॉक्टर विवेक और
तत्कालीन ब्लड बैंक प्रभारी को जिम्मेदार मानते हुए इन पर एक्शन लेने की सिफारिश की थी
जनवरी माह में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने एसएमएस से जानकारी भी मांगी
लेकिन इसके बाद पूरी जांच रिपोर्ट को ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया
चैना देवी की मौत न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही पर भी एक गंभीर प्रश्नचिह्न है. ऐसे में अब सबकी निगाहें चिकित्सा शिक्षा विभाग और मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर एक उदाहरण पेश किया जाएगा या फिर प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल की छवि यूं ही लापरवाहियों के कारण धूमिल होती रहेगी.