जयपुरः एसएमएस ट्रोमा सेंटर ICU में पांच माह पहले लगी "मौत" रूपी आग में बड़ी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है. इस दर्दनाक घटना में छह मरीजों की मौत के बाद गठित हाईलेवल जांच कमेटी ने माना है कि आईसीयू ही नियम-कायदों के विपरित बना हुआ था,जिसके चलते मरीजों को आसानी से बाहर नहीं निकाला जा सका. ये भी तथ्य उजागर हुए है कि आग के बेकाबू होते ही स्टॉफ आईसीयू छोड़कर भाग खड़ा हुआ. आश्चर्य की बात ये है कि कमेटी ने रिपोर्ट में दो अभियंताओं समेत आधा दर्जन से अधिक कार्मिकों को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना है, बावजूद इसके पिछले दो माह से जांच रिपोर्ट सरकारी प्रक्रिया के चलते "ठण्डे बस्ते" में पड़ी है. आखिर क्या थी आग की कहानी और कौन-कौन रहे लापरवाही के लिए जिम्मेदार.
एसएमएस ट्रोमा सेंटर ICU में पांच अक्टूबर 2025 को लगी आग ने अब पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में ला दिया है. घटना को लेकर तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा आयुक्त इकबाल खान की अध्यक्षता में जो हाईलेवल जांच कमेटी गठित की गई थी. उसने अपनी रिपोर्ट में ऐसे चौंकाने वाले खुलासे किए है, जिन्हें देखकर सभी के कान खड़े हो गए है. जांच कमेटी ने घटनास्थल का मौका मुआयना, प्रत्यक्षदर्शियों, चिकित्सक और अन्य स्टॉफ के बयान, सीसीटीवी फुटेज के अलावा घटनाक्रम का "SCENE RECREATION" किया तो हर जगह प्रशासनिक लापरवाही सामने आई. सबसे चिंता की बात ये दिखी कि जहां आईसीयू बना हुआ है, उसकी डिजाइन पूरी तरह से नियमों के विपरित मिली. इसके अलावा ये भी तथ्य सामने आया कि घटनाक्रम का आधे घंटे पहली ही पता चल गया था, बावजूद इसके आईसीयू का जिम्मा संभाल रहे स्टॉफ के लोग स्टोर रूम के ताले की चाबी नहीं तलाश पाए. अनदेखी का आलम ये रहा कि जैसे ही आग बेकाबू हुई तो नर्सिंग स्टॉफ मौका छोड़कर रवाना हो गए. ऐसे में मजबूरत परिजनों और पुलिस ने अन्य स्टॉफ की मदद से गंभीर श्रेणी के मरीजों को बाहर निकाला, लेकिन इस दरमियान घुटन होने से छह मरीजों को जान से हाथ धोना पड़ा.
"लापरवाही" लील गई ICU में छह मरीजों की जान !
एसएमएस ट्रोमा सेन्टर अग्निकाण्ड की जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा आयुक्त इकबाल खान की अध्यक्षता में बनी थी कमेटी
कमेटी ने रिपोर्ट में माना कि जिस जगह पर संचालित हो रहा था 12 बैड का आईसीयू
वहां कई मापदण्डों पर NHM की आईसीयू गाइडलाइन की पूरी तरह से मिली अवहेलना
गाइडलाइन के मुताबिक आईसीयू में आने-जाने के लिए एक ही दिशा में रास्ता होना चाहिए
अलग से फायर सेफ्टी एक्जिट का इंतजाम होना चाहिए, जहां स्प्रिंग लोडेड फ्लैप टाइप हो दरवाजे
इसके अलावा बैड के बीच में 3.50 मीटर की आवश्यक दूरी होनी चाहिए, जो वहां नहीं मिली
आईसीयू में मरीजों की गोपनीयता के लिए बैड्स के बीच अग्निरोधी एकल पर्दे का है प्रावधान
जबकि आईसीयू में एक्यूमिनियम के पार्टीशन बने हुए थे, जिससे वहां आवागमन में बाधा आई
प्रत्येक बैड के लिए 15.52 वर्ग क्षेत्र मीटर पाया,जबकि IPHS नॉर्म्स के मुताबिक ये 25-30 होनी चाहिए
कमेटी ने माना कि पार्टीशन से आईसीयू के कोरिडोर में आवागमन की जगह काफी कम हो गई थी
इसीलिए घटना के दौरान जैसे ही हड़कंप मचा तो मरीजों को बाहर निकालना मुश्किल हो गया
ऐसे में सवाल ये कि क्या एसएमएस जैसे बड़े इंस्टीट्यूट में भी जिम्मेदार नहीं दे रहे नियमों पर ध्यान ?
सवाल ये भी कि आईसीयू में किसके कहने पर लगाए गए "हादसे रूपी" एक्यूमिनियम पार्टीशन ?
आग में फंसे मरीज-परिजन, ICU को छोड़ भागा स्टॉफ !
एसएमएस ट्रोमा सेन्टर अग्निकाण्ड की जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
कमेटी ने घटना के दौरान मौजूद परिजन, मेडिकल स्टॉफ के बयान और
"SCENE RECREATION" में पकड़ी ICU स्टॉफ की बड़ी लापरवाही
दरअसल, परिजनों ने 5 अक्टूबर की रात 11.30 बजे स्टॉफ को दे दी थी सूचना
आईसीयू के स्टोर रूम में जलने की बदबू आने और आग दिखने की दी थी सूचना
इसके बाद एक वार्ड बॉय आया भी, लेकिन स्टोर पर ताला देख वापस चला गया
फिर अचानक आग धधकने लगी और देखते ही देखते आईसीयू में धुआं ही धुआं हो गया
इस तरह की इमरजेंसी के बावजूद वहां मौजूद स्टॉफ उदयसिंह ने अपना ड्यूटी पाइंट ही छोड़ दिया
काले रंग का एक बैग लेकर रात 11.48 बजे उदयसिंह आईसीयू से बाहर चला गया
इसी बीच, नर्सिंगकर्मी योगेश कुमार भी आईसीयू से भागते हुए सीसीटीवी फुटेज में नजर आए
जबकि आईसीयू में आग और धुएं के बीच परिजन अपने मरीज को बाहर निकालने के लिए जुझते दिखे
हालांकि, नर्सिंग कार्मिकों ने कमेटी को अपने बयान में बाहर निकलने के कई बिन्दु गिनाए
लेकिन कमेटी ने रिपोर्ट में नर्सिंग कार्मिकों के इस तरह के रवैये को माना काफी गंभीर प्रवृत्ति की लापरवाही
रिपोर्ट में लिखा गया कि पहले तो स्टॉफ ने परिजनों की आग लगने की शिकायत पर गंभीरता नहीं बरती और
जब आग बेकाबू हो गई तो मरीजों को बचाने के बजाय वे आईसीयू का अपना पाइंट छोड़कर बाहर आ गए
बावजूद इसके अभी तक रिपोर्ट में जिम्मेदार लोगों में से अधिकांश पर नहीं हुई कोई कार्रवाई
2 जांच कमेटी ने रिपोर्ट में माना है कि अस्पताल में हर स्तर पर हुई लापरवाही के चलते इतनी बड़ी घटना हो गई. संभवतया, पहली बार किसी कमेटी ने एक-एक जिम्मेदार को चिन्हित करते हुए उनकी लापरवाही को भी उजागर किया है. हालांकि, कमेटी की रिपोर्ट को अभी तक कार्रवाई का इंतजार है. लेकिन अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट मिली है. सभी जिम्मेदारों पर कार्रवाई के लिए प्रक्रिया जारी है. आईए आपको बताते है कि ट्रोमा सेन्टर के कौन कौन रहे जिम्मेदार
आईसीयू में मौत के तांडव के ये जिम्मेदार.....!
1. मैसर्स एस. के. इलेक्ट्रिकल : ट्रोमा सेन्टर की फायर डिटेक्शन एवं फायर फायटिंग के कार्य देखने की जिम्मेदारी, फर्म ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई, जिसके चलते फायर डिटेक्शन नहीं हो पाया एवं फायर फायटिंग का कार्य भी नहीं हुआ. फर्म की इस अनदेखी को आपराधिक कृत्य के रूप में माना गया
2.आईसीयू वास्तुकार : आईसीयू का निर्माण एसओपी के तहत नहीं किया गया. आईसीयू में सिर्फ एक ही जटिल रास्ता था, जिसके चलते मरीज अन्दर फंस गए. इसके लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग के संबंधित तत्कालीन वास्तुकार/अधिकारी को माना गया जिम्मेदार
3. दीनदयाल अग्रवाल, नर्सिंग इंचार्ज : अस्पताल के आईसीयू जैसे संवेदनशील स्थान पर सूचना का अनुकूल आदान-प्रदान नहीं किया गया. इमरजेंसी की स्थिति में चाबी के अभाव में स्टोर का ताला खोलकर आग पर काबू नहीं पाया जा सका.
4. नर्सिंग स्टॉफ उदयसिंह, योगेश कुमार : मरीज के परिजनों से रात 11.30 बजे आग की सूचना दे दी थी, फिर भी उन्होंने उच्चाधिकारियों / अग्निशमन को सूचना देने या आग बुझाने का प्रयास नहीं किया. आग व धुंए के ज्यादा फैलने पर मरीजों को आईसीयू से निकालने के स्थान पर स्वयं के ड्यूटी पोईन्ट को छोड़कर बाहर चले गये.
5. गंगालाल नर्सिंग अधीक्षक : फायर सेफ्टी का जिम्मा संभाल रही मैसर्स एस. के. इलेक्ट्रिकल्स के कामकाज की मॉनिटरिंग का जिम्मा गंगालाल के पास था. उन्होंने वास्तविक मॉक ड्रिल एवं उपकरणों की जांच नहीं की गई एवं गलत सर्टिफिकेट जारी किए गए.
6 मुकेश सिंघल, अधिशासी अभियंता,(विद्युत), पीडब्ल्यूडी : एफएसएल की रिपोर्ट के मुताबिक शॉर्ट सर्किट से आग लगी. बार बार सूचना देने के बावजूद उन्होंने विद्युत सिस्टम को अपडेट रखने में लापरवाही बरती, जिसके चलते इतना बड़ा हादसा हुआ.
7. गोपाल कृष्ण दशोरा, अस्पताल अभियन्ता, एसएमएस : बिजली से संबंधित सभी उपकरणों की एएमसी / सीएनसी, मरम्मत एवं रखरखाव के कार्य, विद्युत व्यवस्थाओं एवं अग्निशमन प्रणाली को सुचारू बनाये रखने की जिम्मेदारी के निवर्हन में विफल रहे.
8. अशोक सिंघल, अधिशासी अभियंता,(सिविल) : ट्रोमा प्रभारी के कई बार पत्र लिखने के बावजूद सीपेज को रोकने व अन्य सुधारात्मक कार्य नही करवाए गए. कमेटी ने स्वयं के निरीक्षण के दौरान भी जगह-जगह पानी का सीपेज एवं सीलन देखी, जिसे गंभीर लापरवाही की श्रेणी में माना गया.
9.अधीक्षक/नोडल अधिकारी : पूरे घटना को लेकर तत्कालीन अधीक्षक और नोडल अधिकारी की भी मॉनिटिरिंग फेलियर मानी गई, जिन्हें घटना के तुरंत बाद ही पद से हटाया दिया गया था.