सवालों के घेरे में आई RMC को NMC की क्लीनचिट, FMG चिकित्सकों के रजिस्ट्रेशन विवाद पर NMC का स्पष्टीकरण, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः विदेश से मेडिकल की पढाई कर लौटे कुछ चिकित्सकों के दस साल की समयावधि के बाद "रजिस्ट्रेशन" को लेकर सवालों के घेरे में आई राजस्थान मेडिकल कौंसिल को आखिरकार क्लीनचीट मिल गई है. नेशनल मेडिकल कमीशन ने देशभर के FMG चिकित्सकों के लिए स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है, जिसमें MBBS में एनरोलमेंट के दस साल के भीतर रजिस्ट्रेशन का नियम वर्ष 2019 के बैंच से माना गया है. यानी इससे पूर्व के बैंच के स्टूडेंट्स का अब आसानी से रजिस्ट्रेशन हो पाएगा.

दरअसल, फोरेन मेडिकल ग्रेजुएट (FMG) स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन रोकने के मामले में राजस्थान मेडिकल कौंसिल पिछले दिनों चर्चाओं में आई थी. काफी संख्या में स्टूडेंट्स ने कौंसिल का घेराव किया और आरोप लगाया कि अधिकारी अधिकांश स्टूडेंट पर दस साल के भीतर रजिस्ट्रेशन का नियम लगा रहे है, जबकि दूसरी ओर चुनिन्दा स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है. इस दौरान उन्होंने कुछ स्टूडेंट्स के दस्तावेज भी सौंपे, जिनकी प्रशासन ने जांच करवाने के साथ ही ये भी आश्वासन दिया था कि नेशनल मेडिकल कमीशन को FMG रजिस्ट्रेशन की स्पष्ट गाइडलाइन के लिए पत्र लिखा गया है. साथ ही ये भी कहा था कि यदि कोई रजिस्ट्रेशन गलत हो गए है तो उन्हें कैंसिल किया जाएगा. जिसमें बाद अब नेशनल मेडिकल कमीशन ने FMG रजिस्ट्रेशन को लेकर काफी कुछ स्पष्ट किया है. जिसमें कहा गया है कि एनरोलमेंट की तिथि से दस साल के भीतर रजिस्ट्रेशन का नियम वर्ष 2019 के बैंच से माना गया है. RMC रजिस्ट्रार डॉ गिरधर गोयल ने NMC की गाइडलाइन की पुष्टि करते हुए बताया कि NMC की स्पष्ट गाइडलाइन से FMG चिकित्सकों को बड़ी राहत मिली है. गाइडलाइन के मुताबिक अब 2019 बैंच से पहले के उन सभी स्टूडेंट्स के किए जाएंगे रजिस्ट्रेशन, जिनकी एमबीबीएस की डिग्री और इंटर्नशिप को दस साल से अधिक समय पूरा हो चुका है .

NMC गाइडलाइन के मुख्य बिन्दु
- 18 मार्च 2026 के सार्वजनिक नोटिस को लेकर व्याप्त शंकाओं के समाधान के लिए है गाइडलाइन
- गाइडलाइन में बताया गया है कि 18 मार्च 2026 का नोटिस एनएमसी ने 7 दिसम्बर 2023 के सार्वजनिक नोटिस को स्पष्ट करने के लिए जारी किया गया था, जिसमें COVID-19 महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी असाधारण परिस्थितियों के कारण ऑनलाइन हुई पढ़ाई के बदले कराई गई कम्पेन्सेटरी फिजिकल ट्रेनिंग के संबंध में उठे प्रश्नों का समाधान किया गया था. गाइडलाइन में स्पष्ट लिखा गया है कि दोनों नोटिस को एकसाथ पढ़ा जाए.
- यदि कम्पेन्सेटरी ट्रेनिंग फाइनल परीक्षा के बाद या इंटर्नशिप के दौरान हुई हो तो केवल इस कारण से आवेदन अस्वीकार नहीं किया जा सकता. यदि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक संरचना के कारण ऐसा हुआ है और उसके पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध हैं, तो राज्य मेडिकल काउंसिल केस टू केस निर्णय लेगी.
- "Relevant Transcripts" का मतलब ये माना जाएगा कि विदेशी विश्वविद्यालय की तरफ से आधिकारिक शैक्षणिक रिकॉर्ड, जिनमें अध्ययन की अवधि, विषय, क्लिनिकल पोस्टिंग, प्रैक्टिकल प्रशिक्षण आदि का विवरण हो. इनका सत्यापन अन्य दस्तावेजों के साथ किया जाएगा.
- यदि ट्रांसक्रिप्ट उपलब्ध न हो तो मार्कशीट, कम्पेन्सेटरी ट्रेनिंग प्रमाणपत्र, इंटर्नशिप पूर्णता प्रमाणपत्र आदि वैकल्पिक दस्तावेज स्वीकार किए जा सकते हैं. उनकी पर्याप्तता का निर्णय राज्य मेडिकल काउंसिल करेगी.     

हालांकि, NMC ने गाइडलाइन में दस साल के नियम 2019 के बैच से लागू करने की स्पष्ट राय दी है, लेकिन ऑनलाइन स्टेडी की समयावधि को लेकर जिम्मेदारी स्टेट कौंसिल पर ही छोड़ी है. इस बारे में RMC रजिस्ट्रार डॉ गिरधर गोयल ने बताया कि कई स्टूडेंट्स का ऑनलाइन स्टेडी समय काफी अधिक है, जिसको लेकर NMC से राय मांगी गई थी. गाइडलाइन में NMC ने राज्यों को ही ये निर्धारण करने का अधिकार दिया है. ऐसे में जिन भी स्टूडेंट्स के दस्तावेज नियमानुसार सही माने जाएंगे, उन सभी का भी रजिस्ट्रेशन किया जाएगा.