RTO के खिलाफ बस ऑपरेटरों का मोर्चा, हड़ताल तेज... धर्मेन्द्र चौधरी को APO करने की मांग, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः प्रदेश में निजी बस संचालकों की हड़ताल लगातार जारी है और फिलहाल इसके समाप्त होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं. हड़ताल के चलते प्रदेशभर में करीब 30 हजार निजी बसों का संचालन ठप पड़ा है, जिससे आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. 

बस ऑपरेटरों ने अपनी मांगों को लेकर सख्त रुख अपनाया हुआ है. उनकी प्रमुख मांग है कि जयपुर आरटीओ द्वितीय धर्मेन्द्र चौधरी को एपीओ करने की, ऑपरेटरों का आरोप है कि आरटीओ कार्यालय द्वारा की जा रही सख्त कार्रवाई और नियमों की व्याख्या से निजी बस संचालकों पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है. इसी मुद्दे को लेकर वे आंदोलनरत हैं और मांग पूरी होने तक हड़ताल जारी रखने की चेतावनी दे चुके हैं.हड़ताल के कारण सबसे अधिक प्रभाव यात्रियों पर पड़ा है. रोजाना नौकरी, पढ़ाई और व्यापार के सिलसिले में सफर करने वाले हजारों लोग बस अड्डों पर भटकते नजर आ रहे हैं. वैकल्पिक परिवहन साधनों जैसे टैक्सी और ऑटो का किराया भी अचानक बढ़ गया है, जिससे आमजन की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.इस बीच खाटू श्याम मंदिर में चल रहे मेले में जाने वाले श्रद्धालुओं को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. फाल्गुनी मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु खाटूश्याम जी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन बसों का संचालन बंद होने से बड़ी संख्या में भक्तों की यात्रा प्रभावित हुई है. कई श्रद्धालु निजी वाहनों या महंगे विकल्पों का सहारा लेने को मजबूर हैं.   

बस ऑपरेटरों की अन्य प्रमुख मांगों में बसों से लगेज कैरियर नहीं हटाने की अनुमति और सीज की गई बसों को तुरंत रिलीज करने की मांग शामिल है. उनका कहना है कि लगेज कैरियर हटाने से यात्रियों की सुविधा प्रभावित होगी और व्यापारिक दृष्टि से भी नुकसान होगा. वहीं प्रशासन का पक्ष है कि नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है और सड़क सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.परिवहन विभाग और बस संचालकों के बीच अब तक 2  दौर की वार्ता हुई है, लेकिन किसी ठोस नतीजे पर सहमति नहीं बन पाई है. यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो हड़ताल और लंबी खिंच सकती है, जिससे प्रदेश की परिवहन व्यवस्था और अधिक प्रभावित होगी.सरकार पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह इस गतिरोध को जल्द समाप्त कराए, ताकि आमजन और श्रद्धालुओं को राहत मिल सके. फिलहाल सभी की निगाहें सरकार और बस ऑपरेटरों के बीच संभावित समझौते पर टिकी हुई हैं.