जयपुरः प्रदेश की खराब माली हालत के बीच कैग ने सरकार से ओपीएस से पड़ने वाले भार का ब्योरा मांगा है. साथ ही कैग ने लोकलुभावन योजनाओं में कितनी राशि खर्च की और नहीं बताए गए कर्ज का अलग से ब्योरा भी मांगा है.
भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक—कैग— ने राज्य सरकार से ओल्ड पेंशन स्कीम— ओपीएस— से पड़ने वाले आर्थिक भार पर रिपोर्ट मांगी है.
ओपीएस के पड़ने वाले भार का मांगा ब्योरा
कैग ने अगले 10 साल तक ओपीएस से सरकार के खजाने पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ के बारे में सालाना ब्योरा मांगा है. कैग ने इसके लिए पीएसएफ को पत्र लिखकर फॉर्मेट भी साथ भेजा है. कैग ने राज्य के आर्थिक् हालात और बजट को लेकर भी पूरा ब्योरा मांगा है.
कैग ने राज्य सरकार से न्यू पेंशन स्कीम— एनपीएस— से ओल्ड पेंशन स्कीम — ओपीएस— लागू करने से पड़े
आर्थिक भार पर आकलन करके स्टडी रिपोर्ट या प्रशासनिक रिपोर्ट तैयार कर भेजने को कहा है.
सरकार को इसके लिए 15 जून तक की डेडलाइन दी है. यह सब जानकारियां मांगने के पीछे एफआरबीएम एक्ट के प्रावधानों का हवाला दिया है, जिसके तहत ये सब रिपार्ट और जानकारियां कैग से साझा करना जरूरी है.
बजट दस्तावेजों में छिपाए कर्ज —ऑफ बजट बोरोइंग— का ब्योरा मांगा, अब तक सरकारें इन आंकड़ों का छिपाती रही
कैग ने सरकार से बजट दस्तावेजों में छिपाए गए कर्ज यानी ऑफ बजट बोरोइंग का अलग से ब्योरा मांगा है. यह कर्ज सरकार ने खुद नहीं लेकर सरकार की अलग अलग संस्थाओं, सार्वजलिक उपक्रमों के जरिए लिया गया है. इस कर्ज को मिलाने पर सरकार पर कर्ज का आंकड़ा और राजकोषीय घाटे की राशि बढ़ जाएगी.
कैग ने पत्र में हवाला दिया है कि 16 वें वित्त आयोग ने इसकी सिफारिश दी है की फाइनेंस अकाउंट्स बहुत डिटेल में होने चाहिए जिनमें सब्सिडी और ऑफ बजट बोरोइंग्स का अलग से ब्योरा होना चाहिए.
सरकार ने 2025-26 में ऑफ बजट कितना उधार लिया है, उनकी पूरी जानकारी मांगी है.
इसमें ग्रांट, ब्याज भुगतान के लिए लिया गया कर्ज, सरकारी कंपनियों,स्थानीय निकायों, पंचायतीराज संस्थााओं, बोर्ड निगमों का लिया गया कर्ज शामिल है.
कैग ने आधी-अधूरी सूचनाएं नहीं भेजने की हिदायत भी दी है.
कैग ने वित्त विभाग को लिखी चिट्ठटी में तय डेडलाइन तक सभी सूचनाए भेजने को कहा है.
कैग के मुताबिक पिछले साल बजट से जुड़े आंकड़े और सूचनाएं आधी आधूरी और देरी से भेजी गई थी. इस बार पिछली बार की गलती नहीं दोहराने की हिदायत दी है. 15 जून तक हर हाल में सभी रिपोर्ट, ब्यौरा भेजने को कहा है.
कैग ने लोकलुभवन योजनाओं में डायरेक्ट कैश ट्रांसफर के बारे में योजनावार पूरा ब्यौरा भेजने को कहा है.
बिजली पर दी गई सब्सिडी सहित सभी तरह की सब्सिडी पर योजनावार ब्यौरा देने को कहा है. किसान सम्मान निधि से लेकर अलग अलग योजनाओं में किसे कितना डीबीटी— कैश ट्रांसफर— किया इसका पूरा ब्यौरा मांगा है.
सरकार के खातों में कितना पैसा बिना खर्च किए बचा, यह बताना होगा
कैग ने सरकार से पूछा है कि उसके खातों में कितना पैसा ऐसा है, जो बिना खर्च किए हुए बचा हुआ है. यह पैसा योजनाओं का है.
कैग ने बैंक खातों में बिना खर्च किया हुआ बैलेंस, सरकारी विभागों के स्टोर्स का सालाना वेरिफिकेशन का ब्यौरा मांगा है.
इसके साथ ही सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के अधूरे कामों की सूची मांगी गई है. सरकारी जमीनों को बेचने और उनकी लीज पर देने का ब्यौरा और सरकारी संपत्तियों के जियो टैगिंग का स्टेटस भी पूछा है.
परीक्षण करेगा कैग
सरकार से ब्यौरा मिलने के बाद कैग अपनी ऑडिट में सभी योजनाओं, सरकारी कर्ज, आय और खर्च के बारे में बारीकी से जांच होगी. प्रावधानों का उल्लंघन पाए जाने पर कैग ऑडिट पैरा बनाएगा. इसे सालाना रिपोर्ट में भी शामिल किया जाएगा.
कैग की रिपोर्ट हर साल विधानसभा में पेश होती है, इस रिपोर्ट में शामिल आपत्तियों पर विधानसभा की जनलेखा समिति(PAC) जांच करती है. कार्रवाई की सिफारिश करती है.