जयपुर: दीपावली के पांच दिवसीय पर्व का आरंभ धनतेरस से होता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनत्रयोदशी या धनतेरस के नाम से जाना जाता है. इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा का विशेष विधान है. साथ ही खरीदारी के लिहाज से भी धनतेरस का दिन बेहद शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कुछ खास चीजों को घर लाने से सुख-समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि होती है. पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर - जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर को मनाया जाएगा.
धनतेरस नाम "धन" और "तेरस" शब्दों से आया है जहां धन का अर्थ धन और समृद्धि है और तेरस का अर्थ हिंदू कैलेंडर का 13 वां दिन है. इस दिन भगवान धन्वतरि जो स्वास्थ्य के देवता हैं उनकी पूजा की जाती है. इनकी आराधना से रोग से मुक्ति मिलती है. हालांकि, धनतेरस के दिन कुबेर देव और देवी लक्ष्मी की पूजा करने की भी परंपरा है. पांच दिनों का दीपावली महापर्व इस वर्ष छह दिनों का होगा. इस बार दीपावली महापर्व की शुरुआत 6 नवंबर को धनतेरस से होगी. 7 नवंबर को छोटी दीपावली या रूप चौदस, 8 नवंबर 2026 को दीपावली, 9 नवंबर को रामा-श्यामा, 10 नवंबर को अन्नकूट व गोवर्धन पूजा और 11 नवंबर को भैयादूज के साथ ही इस महापर्व का सामापन हो जाएगा. दीपावली पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनाध्यक्ष कुबेर के पूजन से शुरू होकर मृत्यु के देवता यमराज के लिए दीपदान तक चलेगा.
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि धनतेरस जिसे धन त्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती भी कहते हैं पांच दिवसीय दीपावली का पहला दिन होता है. धनतेरस के दिन से दीपावली का त्योहार प्रारंभ हो जाता है. मान्यता है इस तिथि पर आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रगट हो हुए थे. इसी कारण से हर वर्ष धनतेरस पर बर्तन खरीदने की परंपरा निभाई जाती है. कहा जाता है जो भी व्यक्ति धनतेरस के दिन सोने-चांदी, बर्तन, जमीन-जायजाद की शुभ खरीदारी करता है उसमें तेरह गुना की बढ़ोत्तरी होती है. चिकित्सक अमृतधारी भगवान धन्वन्तरि की पूजा करेंगे. इसी दिन से देवता यमराज के लिए दीपदान से दीप जलाने की शुरुआत होगी और पांच दिनों तक जलाए जाएंगे. लोकाचार में इस दिन खरीदे गए सोने या चांदी के धातुमय पात्र अक्षय सुख देते हैं. लोग नए बर्तन या दूसरे नए सामान खरीदेंगे.
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि धनतेरस की रात 13 दीपक जलाना शुभ माना जाता है. इसे यम दीप भी कहा जाता है. धनतेरस की रात दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके अपने घर के बाहर एक दीपक जलाया जाता है जिसे यम दीपक कहा जाता है. ऐसी मान्यता है कि धनतेरस की रात घर में परिवार के सभी लोगों के आने के बाद इस दीपक को दक्षिण दिशा की तरफ जलाएं . ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से अकाल मृत्यु का खतरा दूर होता है. यह दीपक बाकी दीपक की तुलना में थोड़ा बड़े रखें ताकी यह पूरी रात जल सकें.
धनतेरस तिथि
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह करीब10:30 मिनट से शुरू होगी, जिसका समापन 7 नवंबर को को सुबह 10:48 मिनट पर होगा. ऐसे में धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर को मनाया जाएगा.
त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ -6 नवंबर सुबह 10:30 बजे से
त्रयोदशी तिथि समाप्त – 7 नवंबर सुबह 10:48 बजे तक
धनतेरस पूजा मुहूर्त
धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 6:19 मिनट से लेकर 08:17 मिनट तक.
प्रदोष काल: शाम 5:49 मिनट से लेकर 08:23 मिनट तक.
वृषभ काल: शाम 06:19 मिनट से लेकर रात 08:17 मिनट तक.
धनतेरस खरीदारी शुभ मुहूर्त
6 नवंबर सुबह 10:30 मिनट से लेकर 07 नवंबर सुबह 06:37 मिनट तक.
6 नवम्बर को धनतेरस पर दीपदान की होगी शुरुआत
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि धनतेरस जिसे धन त्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती भी कहते हैं पांच दिवसीय दीपावली का पहला दिन होता है. धनतेरस के दिन से दीपावली का त्योहार प्रारंभ हो जाता है. मान्यता है इस तिथि पर आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रगट हो हुए थे. इसी कारण से हर वर्ष धनतेरस पर बर्तन खरीदने की परंपरा निभाई जाती है. कहा जाता है जो भी व्यक्ति धनतेरस के दिन सोने-चांदी, बर्तन, जमीन-जायजाद की शुभ खरीदारी करता है उसमें तेरह गुना की बढ़ोत्तरी होती है. चिकित्सक अमृतधारी भगवान धन्वन्तरि की पूजा करेंगे. इसी दिन से देवता यमराज के लिए दीपदान से दीप जलाने की शुरुआत होगी और पांच दिनों तक जलाए जाएंगे. लोकाचार में इस दिन खरीदे गए सोने या चांदी के धातुमय पात्र अक्षय सुख देते हैं. लोग नए बर्तन या दूसरे नए सामान खरीदेंगे.
आइए भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास से जानते हैं धनतेरस पर अपनी राशि के अनुसार खरीदारी
मेष राशि
मेष राशि के जातकों को चांदी के आभूषण, सिक्के या फिर बर्तन खरीदने चाहिए. इसके अलावा आप सोना या पीतल की वस्तुएं भी खरीद सकते हैं. इससे आपको तरक्की मिलेगी.
वृषभ राशि
वृषभ राशि के स्वामी ग्रह शुक्र हैं और इसिलिए आपके लिए चांदी की वस्तुएं खरीदना अच्छा रहेगा. यदि आप हीरा जड़ित कोई आभूषण खरीदते हैं तो वह बहुत ही उत्तम रहेगा. आप अपने बजट के अनुसार चांदी के आभूषण या सिक्के भी ले सकते हैं.
मिथुन राशि
धनतेरस पर आपको कांसे का बर्तन, सोना आदि खरीदना शुभ रहेगा. पन्ना शुभ रत्न है, इन वस्तुओं की खरीदारी आपके लिए उन्नति देने वाली होगी.
कर्क राशि
कर्क राशि के लोगों को चांदी के आभूषण, चांदी के लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, चांदी का श्रीयंत्र, मोती की माला, चांदी में माती जड़ित अंगुठी आदी खरीदना उत्तम रहेगा.
सिंह राशि
सिंह राशि के लिए धनतेरस पर सोना खरीदना श्रेष्ठ रहेगा. आपके लिए शुभ रत्न माणिक्य है. यदि बजट कम है तो आप उन वस्तुओं को खरीद सकते हैं, जिन पर सोने का पानी चढ़ाया गया हो.
कन्या राशि
कन्या राशि के स्वामी बुध हैं. आपको धनतेरस पर कांसे या फूल के बर्तन खरीदना चाहिए, इससे आपका बुध ग्रह और मजबूत होगा. आपका शुभ रत्न पन्ना और मोती है. मोती की माला भी खरीद सकते हैं.
तुला राशि
तुला राशि के जातकों को धनतेरस पर चांदी के आभूषण, चांदी के बर्तन खरीदना शुभ रहेगा. इससे आपकी धन संपत्ति में वृद्धि होगी.
वृश्चिक राशि
धनतेरस पर वृश्चिक राशि के जातकों को तांबे के बर्तन, चांदी या चांदी के आभूषण खरीदना चाहिए. इससे आपको लाभ होगा.
धनु राशि
धनु राशि के जातक धनतेरस पर सोने के आभूषण, सोने के सिक्के, पीतल के बर्तन आदि खरीद सकते हैं. ऐसा करने से जीवन भर पैसे की कमी नहीं रहेगी.
मकर राशि
मकर राशि के जातकों को धनतेरस वाले दिन आप स्टील के बर्तन या अपने लिए कोई वाहन खरीदना चाहिए. सालभर आपकी उन्नति होगी.
राशि
कुंभ राशि के जातकों को धनतेरस पर वाहन या स्टील के बर्तन खरीदने चाहिए. उसके बाद चांदी, सोना आदि खरीद सकते हैं.
मीन राशि
मीन राशि के जातकों को धनतेरस पर सोने या पीतल की वस्तुएं खरीदनी चाहिए. इससे आपके सुख और समृद्धि में वृद्धि होगी.