सरकारी आवास पर नियमों का डबल स्टैंडर्ड, सस्ते जुर्माने से नहीं खाली हो रहे आवास, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः मंत्रियों और अन्य सरकारी अधिकारियों, कर्मियों को सरकारी आवास उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार सामान्य प्रशासन विभाग खुद नियमों की विसंगति में उलझा हुआ है. एक ओर आईएएस और अन्य अधिकारियों के तबादले बाद सरकारी आवास खाली न करने को लेकर जुर्माना खासा कम है तो दूसरी ओर मंत्रियों के लिए प्रतिदिन 10 हजार के भारी जुर्माने का प्रावधान है जिसके चलते खुद विभाग को ही यथायोग्य अधिकारियों के लिए सही समय पर उचित सरकारी आवास देने की व्यवस्था बनाए रखने में खासी परेशानी हो रही है. 

सामान्य प्रशासन विभाग अपने ही नियमों के जंजाल में उलझा हुआ नजर आ रहा है. नियमों की विसंगति के चलते सामान्य प्रशासन विभाग-जीएडी अधिकारियों को सही समय पर आवास उपलब्ध नहीं करा पा रहा है और दूसरी ओर कुछ अधिकारी तबादले के बाद भी जयपुर में सरकारी आवास खाली नहीं कर रहे हैं. 

आवास खाली नहीं करने पर इन अधिकारियों को सामान्य प्रशासन विभाग ने दिया है नोटिस
10 अप्रैल 2026 को विभाग के संयुक्त सचिव दाताराम की ओर से जारी नोटिस के तहत आईएएस इंद्रजीत सिंह के उनके प्रथम श्रेणी के आवंटित आवास गांधीनगर ए 5 के लिए 19 अगस्त 2025 से 31 मार्च 2026 तक की अवधि के जुर्माना वसूलने के लिए नोटिस दिया है.

आईएएस इंद्रजीत सिंह की हालांकि 19 अगस्त 2025 में केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय में पोस्टिंग हो गई थी लेकिन उनकी पत्नी आईएएस नेहा गिरी की 28 मार्च 2026 में केन्द्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय में निदेशक के तौर पर पोस्टिंग हुई है जिसके बाद जल्द मकान खाली होने की उम्मीद है.

आईपीएस पीडी नित्या के नाम सी-8 गांधीनगर का आवास है जिसकी 21 नवंबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक की अवधि के जुर्माने के लिए नोटिस दिया है.

आईपीएस मृदुल कच्छावा के नाम गांधीनगर के द्वितीय श्रेणी के 13 नंबर का आवास है. जिसकी 9 जुलाई 2022 से 31 मार्च 2026 तक की अवधि के जुर्माने के लिए नोटिस दिया है.

आरपीएस मुकुंद बिहारी के नाम आवंटित ई 17 गांधी नगर के आवास की 4 मार्च 2024 से 31 मार्च 2026 तक की अवधि के जुर्माने के लिए नाइस दिया है.

आईएएस हरफूल यादव के ई 3 गांधी नगर के आवास की 15 मार्च 2024 से 31 मार्च 2026 तक की अवधि के जुर्माने के लिए नोटिस दिया है.

आईएएस देवाराम सैनी के ओल्ड एमआरइसी में एस ब्लॉक के लिए 2 फरवरी 2024 से 31 मार्च 2026 तक की अवधि के जुर्माने के लिए दिया नोटिस.

इसी तरह आरएएस गौरव बजाड़ के ई 737, गांधी नगर के आवास के लिए 24 जनवरी 2025 से 31 मार्च 2026 तक की अवधि के लिए नोटिस दिया है.

क्या है नियमों की विसंगति ?
नियमों की विसंगति यह है कि तय समय पर आवास खाली न करने पर मंत्रियों को दस हजार रुपये प्रति दिन के हिसाब से जुर्माना देना पड़ता है. 

2023 में हुए विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनने से पहले नो ड्यूज लेने के लिए पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास और राजेन्द्र सिंह गुढ़ा को यह निर्धारित जुर्माना देना पड़ा था. 

जबकि  राजकीय आवास आवंटन नियम 1958 के नियम 12 बी के प्रावधान अनुसार अधिकारियों के तबादले बाद उनके 1 माह में आवास खाली करने का प्रावधान है.

1 माह तक खाली नहीं करने पर करीब 2000 रुपए की साधारण किराया दर देने का प्रावधान है.

एक माह पूरा होने पर अगले 1 माह तक साधारण दर का दुगुना यानि करीब 4000, तीसरे से छठे माह तक साधारण का तिगुना यानि करीब 6000, 6 माह की अवधि पूरी होने पर अगले 6 माह तक पीडब्ल्यूडी की ओर से निर्धारित बाजार दर और इसके बाद बेदखली करने का प्रावधान है.

इसके चलते नियमों में हो सकता बदलाव 
अभी तबादले के बावजूद तय समय तक सरकारी आवास खाली नहीं करने पर सामान्य दर से किराये का प्रावधान है और फिर तिगुनी दर से जुर्माना वसूला जाता है.

जो कि करीब 2000 से करीब 6000 तक की राशि है जो कोई भी अधिकारी चुकाकर सरकारी आवास लंबे समय तक खाली नहीं करते हैं. 

अब इसमें मंत्रियों की तर्ज पर इस समय की बाजार दर के तिगुने या अन्य जुर्माना वसूलने या जुर्माने की राशि प्रति दिन के हिसाब से किया जा सकता है. 

हाल ही में यह किया है नियम संशोधन
पहले रिटायरमेंट के बाद सरकारी आवास खाली न करने पर सरकारी पेंशन के खाते से 25000 रुपये तक का जुर्माना वसूलने का प्रावधान था और अब इसमें संशोधन करके करीब 1 लाख तक का जुर्माना सीधे पेंशन खाते से कटौती करने का प्रावधान किया गया है.   

अब ऐसे ही नियम संशोधन की जरूरत मौजूदा अधिकारियों के सरकारी आवास खाली न करने पर जुर्माने के नियम बदलने को लेकर महसूस की जा रही है.