KeyNote by Pawan Arora: RBI गवर्नर की सलाह ने कैसे बदली जिंदगी? जानिए CS वी. श्रीनिवास ने SUPER EXCLUSIVE INTERVIEW में क्या कहा ?

जयपुरः फर्स्ट इंडिया न्यूज़ के CEO और मैनेजिंग एडिटर पवन अरोड़ा ने राजस्थान के मुख्य सचिव (CS) वी. श्रीनिवास  (V. Srinivas) का KeyNote by Pawan Arora कार्यक्रम में SUPER EXCLUSIVE INTERVIEW लिया. जिसमें सटीक सवालों का मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास  ने जवाब दिया.

सवाल-  आपसे हम बहुत सारे गंभीर विषयों पर चर्चा करेंगे चूंकि आप राजस्थान से नहीं हैं, राजस्थान के बाहर के स्टेट से हैं कैडर आपका राजस्थान है, तो सब लोग ये जानना चाहते हैं कि आपका जन्म कहां हुआ ? प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा कैसे हुई ? परिवार में क्या माहौल था ? जीवन संघर्षपूर्ण था क्या? परिवार से क्या संस्कार मिले, इस बारे में बताएं ?

जवाब- सबसे पहले मैं आपको बधाई देना चाहता हूं, आप स्वयं सिविल सर्विस में थे- मुख्य सचिव उसके बाद इतना Consistent न्यूज चैनल चला रहे हैं फर्स्ट इंडिया न्यूज' '7th ईयर एनिवर्सरी ऑफ फर्स्ट इंडिया न्यूज, न्यूज पेपर 12th ईयर के लिए बधाई' 'बहुत आपने परिश्रम किया है "First at time, to keep going"...' मैं राजस्थान में 22 साल की उम्र में आया था- मुख्य सचिव राजस्थान का 1989 का कैडर मुझे अलॉटमेंट हुआ था, फर्स्ट पोस्टिंग नागौर में थी तो ये था कि पहुंचेंगे कैसे ? नागौर जिला और जयपुर टू बीकानेर ट्रेन में जाना पड़ा था, वाया फुलेरा रात को 1 बजे पहुंचे थे, उससे पहले मैंने चिट्ठी लिखी थी. उस समय सुनील अरोड़ा जी नागौर में जिला कलेक्टर थे. उन्होंने कहा कि आप आइएगा "I will take care of you" तपेंद्र कुमार जी, उसके बाद उनकी पोस्टिंग जिला कलेक्टर नागौर थी' तो नागौर फर्स्ट टाइम था, IAS प्रोफेशनल्स का ट्रेडिशनल डिस्ट्रिक्ट नहीं है. पहली बार कोई IAS प्रोबेशनर की वहां पोस्टिंग हुई है' नागौर में मुझे पहली बार जिंदगी में बाजरे की रोटी खाने को मिली थी, श्री अन्न है. उस जमाने में बाजरे की रोटी खाने का मौका मिला था.
मैं सोचता हूं कि बड़ा कठिन है, यहां पर Rice Eating Conditions बहुत कम थी एक साल मैं नागौर में था, उसके बाद मेरी पोस्टिंग भीलवाड़ा और तत्पश्चात निंबाहेड़ा में हुई थी और फिर बीकानेर में IGNP में मेरी पोस्टिंग थी- मुख्य सचिव जब कैनाल स्टेज-2 में था तो स्टेज-2 का काम तभी शुरू हुआ था तो आप 100 किलोमीटर तक ड्राइव करें और आपको एक भी इंसान नहीं दिखे इस प्रकार का था' कैनाल का काम उस समय हो रहा था, उसके बाद सेटलमेंट मोटिवेशन और आज अभी मैं कुछ दिन पहले बीकानेर गया था तो बहुत आमूल-चूल परिवर्तन हुए बहुत ज्यादा स्टेज-2 में IGNP के डेवलपमेंट हुए हैं - मुख्य सचिव तो Long Journey 38 साल मेरा था "37 Years in the IAS Complete" हुए हैं' राजस्थान में जो विकास मैंने देखा है, बहुत अभूतपूर्व विकास हुआ है. और हर जगह पर जिस प्रकार से  Doubling Farmers' Income  के कई कैसेज मैंने देखे हैं' उसी प्रकार से इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के काम हुए हैं.

सवाल-  मैं आपको थोड़ा पीछे लेकर चलता हूं, इन पर तो हम आपसे पूरी जानकारी लेंगे  तो आपकी पढ़ाई-लिखाई की हम बात कर रहे थे, परिवार की बात कर रहे थे तो आपने केमिकल इंजीनियरिंग में UG भी किया, PG भी किया फिर IAS में आने का कैसे मन बना? कैसे प्रेरणा मिली कि IAS में आना है ?

जवाब-  1964 बैच के IAS ऑफिसर डॉ. वाई.वी. रेड्डी हैं. उन्होंने मुझे कहा था कि आप अपीयर होइएगा सिविल सर्विसेज के लिए मेरा बहुत लगाव था केमिकल इंजीनियरिंग के प्रति और लेबोरेटरी में काम करने का और रिफाइनरी स्थापित करने की इच्छा थी उस समय बॉम्बे हाई की डिस्कवरी हुई थी. तो देश में केमिकल इंजीनियर की बहुत डिमांड रहती थी' और कई रिफाइनरीज देश में और विदेशों में स्थापित हो रही थीं' उसी समय न्यू एक्सप्रेशन लाइसेंसिंग पॉलिसी भी आई थी' तो सैलरी स्कैल्स वेरी हाई फॉर इंजीनियर्स. 'डॉ. वाई.वी. रेड्डी पद्मविभूषण हैं 1964 बैच के IAS और गवर्नर RBI थे' तो उनका कहना था कि आपका जो स्किल सैट है, उसमें पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के प्रति भी आप काम कर सकते हैं. उन्होंने आईडेंटिफाई किया था, मुझे सब्जेक्ट ओरिएंटेशन फॉर सोशल साइंस या एडमिनिस्ट्रेटिव साइंस से इतना लगाव नहीं था, लेकिन पब्लिक पॉलिसी के प्रति और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के प्रति मेरा रुझान था फिर जब मैंने सिविल सर्विस एग्जामिनेशन दिया था तो वेरी हाई इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन.

सवाल- फर्स्ट अटेम्प्ट में हो गया था आपका ?

जवाब- 'जी हां, "In fact, I had opted Public Administration in that year" 'एडमिनिस्ट्रेटिव थ्योरी में और इंडियन एडमिनिस्ट्रेशन का जो एक्सपीरियंस है इसमें मेरी बहुत गहरी अंडरस्टैंडिंग थी और एकेडमिक में मैंने देखा था. जब तक डिस्ट्रिक्ट एडमिशन में अटैचमेंट होते हैं और उसके बाद फेज-2 में हम प्रजेंटेशन करते हैं. उसमें भी मैंने देखा था कि My understanding of public administration was very good... द ट्रांजिशन फ्रॉम हाईली टेक्नोलॉजी बैकग्राउंड, प्रिपेयरिंग मैथमेटिकल मॉडल्स एल्गोरिथम्स' डेवलपिंग न्यूज रियेक्टर डिजाइन,  प्रोसेस डाइनैमिक्स एंड कंट्रोल, एडवांस सॉफ्टवेयर प्रोग्राम.

सवाल- आपको अभी भी आपकी ट्रेनिंग का टाइम याद है तो ट्रेनिंग बड़ी Important होती है किसी भी IAS ऑफिसर के लिए आपको क्या लगता है? आपकी जो एडमिनिस्ट्रेटिव लाइफ है, उसमें बेस्ट ट्रेनर कौन था या आपका रोल मॉडल या मेंटोर कौन था? जिसे देखकर आपने सीखा और आज यहां हैं, वो उनकी वजह से हैं?

जवाब-  मैंने राजस्थान कैडर के बहुत IAS ऑफिसर्स के साथ काम किया था और कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मेरे बहुत अच्छे संबंध रहे हैं और कई Legends के रूप में भी उभरे थे, जिसमें M.L. मेहता जी के साथ मैंने बहुत नजदीक से काम किया था. निम्बाहेड़ा सब डिविजन में उनका गांव था तो वो अक्सर आते थे और उसके बाद भी डायरेक्टर, वॉटरशेड के रूप में भी मैंने काम किया था. राजीव महर्षि जी के साथ, सुनील अरोड़ा जी के साथ, विजयशंकर सिंह जी के साथ C.S. राजन जी के साथ भी मैंने बहुत नजदीक से काम किया था. 'राजस्थान कैडर "Very well established" कैडर,  IAS कैडर की जो परंपरा रही है कि बहुत ही स्टेबल कैडर है, नवाचारों का कैडर है, पॉजिटिव एनर्जी है इस कैडर में' 'और "One of the largest cadres of India" 'तो बहुत Stalwarts दिए हैं, नरेश चंद्रा जी कैबिनेट सेक्रेटरी, गवर्नर ऑफ गुजरात.

सवाल- आप शुरू में पाली और जोधपुर में भी कलेक्टर रहे  तो रिटायरमेंट के नजदीक जो भी IAS ऑफिसर होते हैं या रिटायर्ड IAS ऑफिसर होते हैं. उनके बीच में एक बात चलती है "You know, I was an IAS collector" तो उस जमाने की बात कोई जरूर सुनाते हैं या बताते हैं. तो पाली या जोधपुर का कोई ऐसा अनुभव, जो आप हम सबसे शेयर करना चाहें ?

जवाब- 'पाली में 1998 में गया था, तब मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत बाली से विधायक थे और उनके साथ उनके मार्गदर्शन में काम किया था. तत्पश्चात जोधपुर में मेरी पोस्टिंग हुई थी, कई अनुभव हैं' जिला कलेक्टर फेवरेट पोस्टिंग रहती है, खासकर के ग्रामीण क्षेत्र में जो इंगेजमेंट हैं' इसमें इंट्रेक्शन के लिए, इम्प्रूवमेंट्स के लिए' तो कई जगह मैं रुकता था, तो कई जगह फार्मर इंटरेक्शन होता था' खासकर रेवेन्यू लॉ के प्रति मेरी बहुत कमिटमेंट थी, अगर में जर्नी देखता हूं पिछले 40 साल की' तो “Commitment for Improving Justice Delivery Across All Government's” ये मैंने देखा था कि हर सरकार ने प्रयास किया Justice Delivery को हम आम आदमी को त्वरित गति से न्याय कैसे दिलाएं?' तो उसके ऊपर फोकस रहा है, जोधपुर में खासकर मुझे याद है' कि उस समय कारगिल वॉर शुरू हुआ था और कारगिल ऑपरेशंस चले थे. तत्पश्चात जो सिविल-मिलिट्री इंटरेक्शन था, वो इंगेजमेंट काफी स्ट्रॉंग रहा है. राजपूताना राइफल्स के काफी लड़के उसमें पार्टिसिपेट किए थे, उनके साथ भी मेरा इंटरेक्शन काफी स्ट्रॉंग था'

सवाल- आप ऐसे विरले अधिकारी हैं, जो अपने होम कैडर से 22 साल डेपुटेशन पर बाहर रहे और उसमें आप दिल्ली में महत्वपूर्ण पदों पर रहे, दिल्ली से बाहर IMF में भी आप रहे तो ये आपका संयोग था या सोचा-समझा मूव था कि मुझे बाहर एक्सप्लोर करना है?

जवाब- मैंने गवर्नमेंट ऑफ इंडिया का डेपुटेशन लिया था. 'मेरी फर्स्ट पोस्टिंग पेट्रोलियम मिनिस्ट्री में हुई, एक केमिकल इंजीनियर के तौर पर मैं वहां गया था' उस समय बहुत रिफाइनरी बन रही थीं, IOC की रिफाइनरी बन रही थी' HPCL की रिफाइनरी बन रही थी. उस वक्त मुझे बहुत अच्छा लगा कि जिस चीज पर मेरी अच्छी अंडरस्टैंडिंग है, वो मिला और राम नाइक जी हमारे मंत्री थे, उस समय जो सेक्रेटरी पेट्रोलियम थे, बहुत ही ब्रिलियंट ऑफिसर थे उनका नाम है एस. नारायण, पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी जी के सचिव भी रहे' उनको भी बहुत शौक था कि कोई टेक्नोक्रेट मेरे डिपार्टमेंट में आया है. नई रिफाइनरी स्थापित करना है और पेट्रोलियम प्राइस को सेट करते थे. 7-8 महीने बाद मुझे जसवंत सिंह ने बुलाया था. उन्होंने कहा कि आप मेरे साथ विदेश मंत्रालय में काम करिए, वो अलग बदलाव था. क्योंकि विदेश मंत्रालय में सामान्य तौर पर IAS ऑफिसर्स की पोस्टिंग होती नहीं है. लेकिन जसवंत सिंह जी की इच्छा थी. कि एक ऑफिसर मेरे प्राइवेट सेक्रेटरी के तौर पर राजस्थान कैडर का मेरे साथ रहे'.

सवाल- तो क्या जोधपुर के समय का कनेक्शन था आपका उनके साथ?

जवाब- मैं उनसे पहले कभी मिला नहीं था फर्स्ट टाइम था, जब उन्होंने बुलाया था, मेरी पाली में मुलाकात हुई थी. लेकिन उन्होंने मुझे चुना, उन्होंने विदेश मंत्रालय के दौरान मुझे काफी संभाला भी और उस वक्त भारत की विदेश नीति में बहुत चैलेंजिंग टाइम था. उसी समय वॉर एंड टैरर शुरू हुआ था, इंगेजमेंट चल रहा था. यूनाइटेड स्टेट्स के साथ और बहुत बार विदेश नीति के चलते विदेशों का दौरा करने का मौका मिला था. करीब 18 महीने मैं विदेश मंत्रालय में रहा, वो वित्त मंत्री थे. मैं उनके साथ प्राइवेट सेक्रेटरी के तौर पर रहा और वहां से फाइनेंस में गया. उस वक्त बहुत सारे चैलेंजेज थे और इंडिया का जो बिग ग्रोथ स्पर्ट्स आया था. उनके कार्यकाल में 2002 से शुरू हुआ था, उस बदलाव का मैं साक्षी था. Form Regular Hindu Growth Economy to Big Growth 2003 में मेरी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में पोस्टिंग हुई, तो साढ़े तीन साल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष वाशिंगटन में रहा. फिर 2007 में वापस आया राजस्थान के प्लानिंग सेक्रेटरी के रूप में.

सवाल- जब आप जसवंत सिंह जी के साथ थे, तो आपने पॉलिटिकल पावर कह लीजिए  या राजनीतिक सत्ता कह लीजिए, उसको बहुत नजदीक से देखा,  विदेश मंत्री और वित्त मंत्री के साथ और अब आप राजस्थान में सीएस के रूप में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ बहुत ही क्लोजली वर्क कर रहे हैं. तो आपको क्या लगता है कि पॉलिटिकल और ब्यूरोक्रेटिक पावर में क्या अंतर है? या समानता है और क्या कभी ये सब इतना नजदीक से देखकर आपका रोल रिवर्सल का मन हुआ ?

जवाब- 'I am a Career civil servant, I follow what the leadership says' 'the rule of law, transparency, accountability, neutrality and anonymity' ये मेरे Career के बेसिक फाउंडेशन्स हैं, इससे मैं कभी चूका नहीं और सीनियर पॉलिटिकल लीडरशिप के साथ मैंने सेवाएं दी हैं. इसमें माननीय प्रधानमंत्री जी की जो लीडरशिप है, वो बहुत ही विजनरी है. उनके साथ मैं गवर्नेंस मॉडल में 2014 से 2025 तक केंद्र में था और एक Incredible Visionary leadership है, उनके जो नवाचार हैं. डिजिटल इंडिया में मैंने भाग लिया था और बाद में मिशन कर्मयोगी जैसे कई नवाचार थे. माननीय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ मुझे बहुत नजदीक से काम करने का मौका मिला है. मैं आभारी हूं उनका कि उन्होंने मुझे ये काम करने का मौका दिया. और मुख्यमंत्री जी का जो विजन है Infrastructure Development सिटीजन सेंटरसिटी जिस तरह से खुद जनसंपर्क केंद्र में जा रहे हैं, 7-8 बार चले गए हैं. सिटिजन्स की सुनवाई करते हैं, रात्रि चौपाल करते हैं, ग्राम रथ चले हैं. कई अभियानों में मैंने उनके साथ काम किया है और Infrastructure Development पर फोकस रहा है. भारतीय रेलवे हो, सिंचाई हो और बालोतरा में रिफाइनरी प्रोजेक्ट हों इसी तरह से सिविल मिलिट्री कॉर्डिनेशन्स हैं, जो शौर्य संध्या हुई है. 78वां आर्मी डे परेड हुआ, सबका साथ सबका विकास...जितने जरूरी प्रोग्राम्स हैं. सब में पहुंचे हैं, तो it has been very strong learning experience.

सवाल- आप दोनों में तालमेल कैसे देखते हैं ? मेरा प्रश्न ये है कि पॉलिटिकल पावर और ब्यूरोक्रेटिक पावर या फिर पॉलिटिकल एग्जीक्यूशन ? या ब्यूरोक्रेटिक एग्जीक्यूशन इन दोनों में समन्वय या अंतर कैसे देखते हैं ?

जवाब- 'Bureaucracy works under the political leadership and we work without fear and favour रूल बाउंड प्रोसेस के साथ हम लोग काम करते हैं. प्रोग्रेसिव डिसीजन मेकिंग के लिए हमें मेहनत करना है कि that is what has been my career motive Weberian civil service is neutral, anonymous, and extremely committed meritocracy हैं जो मैरिट बेस सलेक्शन हैं, based on the rule of law'

सवाल- आप जब राजस्थान आए थे  तो 2017 के आस-पास आपका रेवेन्यू बोर्ड का कार्यकाल लोग बहुत याद करते हैं. चाहे वहां के वकील हों, वहां के ऑफिसर्स हों, वहां आपने क्या ऐसे इनोवेशन किए जिससे आपको आज भी वहां याद करते हैं ?

जवाब- 'जैसे मैंने आपको निवेदन किया कि हर सरकार का प्रयास रहा है कि इंप्रूविंग जस्टिस डिलीवरी, रेवेन्यू कोर्ट में राजस्थान में करीब 1500 तहसील कोर्ट्स हैं. इसी प्रकार से हाईएस्ट नंबर ऑफ SDO कोर्ट्स इन द कोर्ट, 462 SDO कोर्ट हैं. 100 ADM कोर्ट्स हैं, 41 कलेक्टर कोर्ट्स हैं, फिर उसके बाद Revenue Appellate Authority हैं. Settlement Officer (AA) Court हैं, ये बहुत बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर है. करीब 40 हजार एम्प्लॉई का है और The revenue bar has more than ten thousand advocates तो प्रयास ये रहा है कि रेवेन्यू बोर्ड में चेयरमैन का सीट पर बैठना जरूरी है. 
उसको अजमेर में रहना चाहिए तो मैंने अजमेर रहना शुरू किया हर दिन मैं बेंच पर बैठता था तो, बार और बेंच में ताली एक हाथ से नहीं बजती. इन दोनों को साथ में काम करना चाहिए, ये बहुत अच्छा तालमेल था. डिजिटलाइजेशन ऑफ रेवेन्यू कोर्ट मैंने किया था. खास करके अगर सिटिंग होगा रेवेन्यू केसेज को आगे बढ़ना चाहिए अगर आपने सुनवाई किया है तो फैसला टाइम बाउंड आना चाहिए. 

सवाल- जैसे अभी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर आप फैसला रिजर्व कर लेते हैं. तो आपको जल्द से जल्द उसे अनाउंस करना चाहिए.

जवाब- बिल्कुल आपको अनाउंस करना चाहिए. और इसी क्रम में जो डिस्ट्रिक्ट कलेक्ट्रेट के समय 33 कलेक्ट्रेट्स थे.सभी कलेक्ट्रेट्स में, मैं गया था, इंस्पेक्शन हुए थे, सभी कलेक्टर ऑफिसर्स सभी कमिश्नरेट ऑफिसर्स के इंस्पेक्शन हुए थे, जो रेवेन्यू वर्क है और खास करके जो कमजोर वर्ग हैं. विमन्स राइट्स के प्रोटेक्शन्स के सेक्शन्स हैं, कॉमन लैंड्स हो जैसे चारागाह हों उनके प्रोटेक्शन की बात हो...उसमें टाइम बाउन्ड जजमेंट राइटिंग होनी चाहिए. इस पर मेरा बहुत फोकस रहा, SDO वर्कशॉप्स मैंने बहुत किए. कार्यशालाओं में वकीलों को बुलाकर विचार-विमर्श करवाया था. ओमकार लाल जी दवे, बहुत सीनियर वकील रहे हैं रेवेन्यू बोर्ड्स के, भवानी सिंह जी शक्तावत थे. तो उस वक्त यंग अधिकारी आकर के सीनियर वकीलों के साथ बात करना. रेवेन्यू बोर्ड के कई प्रावधान समझने के लिए बात करते थे. कुछ SDO जो प्रमोशन होकर आए थे, उनमें कॉन्फिडेंस नहीं था कि इश्यू बेस्ड जजमेंट लिखें. उनकी कैपेसिटी बिल्डिंग की जरूरत थी, सबकी ट्रेनिंग करवाई, बोर्ड्स को जिलों में भेजा. हर जिले में मैं रेवन्यू बार से मिलता था, जो वर्किंग कंडीशन्स हैं उनको अच्छा करने का प्रयास करता था. The Board of Revenue of Rajasthan is one of the great institutions इसका जो लेगेसी है, वो अनमैच्ड है और हर दिन मैंने जो काम किया कि मैं उस पद पर बहुत लोगों को न्याय पहुंचा सका था.

सवाल- इसके बाद आप जब दिल्ली गए, तो मेरे ख्याल से वो आपका कार्यकाल ऐसा था 2021 से 2025 का, जब आप Departments of administrative reforms and public grievances थे, उससे आपको राष्ट्रीय पहचान मिली, कहते हैं कि आपने AIIMS में बहुत डिजिटल क्रांति ला दी थी. ऐसे ही पेंशनर्स के इश्यूज को बहुत ज्यादा अच्छा कर दिया था. उसके बारे में कुछ बताइए, उससे पहचान आज तक है आपकी

जवाब- 'ये Department of Administrative Reforms and Public Grievances बहुत पुराना विभाग है. 1918 का विभाग है भारत सरकार का और कई Administrative Reforms बने थे. और माननीय प्रधानमंत्री जी का विभाग है, उसमें जो नवाचार प्रधानमंत्री जी ने करके जो निर्देश दिए थे. उनको क्रियान्वयन करने की जिम्मेदारी मेरी थी. भारत के इतिहास में मेरा DRPG में सबसे लंबा करियर 7 साल का रहा. 'अभी तक किसी IAS ऑफिसर का इसमें इतना लंबा कार्यकाल नहीं रहा. प्रधानमंत्री जी का ये कहना था कि जो फाउंडेशन ऑफ इंडियन डेमोक्रेसी है. ये सिटिजन सेंटर सिटी, आमजन की आवाज सुनिएगा. इसको सुनने के लिए हमने CPGRAMS Portal डवलप किया था. ये आज विश्व का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म है, जिसमें 33 लाख शिकायते आती हैं. उस पर हमने कई नवाचार किए, टेक्नोलॉजी एड किया. AI बेस्ड प्लेटफॉर्म्स लाए, हर सिटीजन की आवाज हम लोग सुनते थे. 

सवाल- AIIMS में ऐसा क्या खास हुआ था कि AIIMS के लोग बहुत चर्चा करते हैं ?

जवाब- AIIMS में मेरी पोस्टिंग 2014 में हुई थी. जब मैं पहले हफ्ते AIIMS में गया था, तो ये देखता था कि 1 बजे पेशेंट लाइन में आकर बैठता था. उसकी अपॉइंटमेंट डॉक्टर से 9 बजे होती थी, 15 मिनट डॉक्टर से मिलने के लिए 8 घंटे वो wait करता था. कभी-कभी OPD बहुत लंबे चलते थे, ये जो वेटिंग समय था बहुत लंबा था. पेशेंट्स के लिए और फॉलोअप भी क्लियर नहीं था. तो ये मेरा विजन था कि Fully digital public institution जो प्रधानमंत्री जी का भी विजन है. कि नेक्स्ट जनरेशन रिफॉर्म्स, प्रशासनिक सुधार, इसका मतलब ये है. कि डिजिटल एम्पावरमेंट ऑफ सिटिजन, हर व्यक्ति डिजिटली एम्पावर करे. हर संस्था को डिजिटली ट्रांसफॉर्म करे, तो एम्स में जो मेरा अनुभव था. AIIMS become Fully digital public hospital. तो हम सुबह 7 बजे बैठते थे, उस वक्त रामसेवक शर्मा जी थे, MeitY के सेक्रेटरी. और हर एक डिपार्टमेंट्स की अलग-अलग आवश्यकता थी. विनोद पॉल जो मेंबर नीति से रिटायर्ड हुए, वे पीडियाट्रिक HOD थे. तो हम तीनों साथ बैठते थे, पहला डिपार्टमेंट पीडियाट्रिक था.इसके बाद धीरे-धीरे 65 विभागों को डिजिटलाइज्ड किया. ये देखा गया था कि आप 15 मिनट में ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं. आप क्लिनिशन्स से टाइम मिलेगा, साथ-साथ जब आप Exit OPD में जाएंगे. तो आपको नेक्स्ट डेट भी मिल जाएगी और जो पेशेंट्स रिकॉर्ड्स हैं, ऑनलाइन ट्रांसफर होंगे. 'चाहे आपकी ब्लड रिपोर्ट हो या कुछ...वो सीधे डॉक्टर को मिलेंगे. इसी तरह से पेशेंट्स रिकॉर्ड, बेड्स, भोजन, इन सबकी जानकारी. क्योंकि हॉस्पिटल मैनेजमेंट बहुत जटिल है, AIIMS में हर दिन 50 हजार लोग आते हैं. ये बहुत बड़ा नंबर है और इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से भी ज्यादा लोग उस हॉस्पिटल में आते हैं. एक तरह का शहर लगता है, 35 हजार से ज्यादा एम्प्लॅाई हैं.
तो I realized that a digital system increases efficiency by almost 500 to 600 percent नंबर ऑफ पेशेंट्स दोगुना हैंडल कर पाए थे और पेशेंट्स रिकॉर्ड हम ट्रीट कर पाए और जब हमने राजस्व मंडल को डिजिटलाइज्ड किया था. यही देखा था कि 450 जजमेंट्स हर महीने हो रहे थे और वो जब डिजिटल हुआ. तो 1300 से 1500 होने लगे, ट्रांसपेरेंसी, अकाउंटेबिलिटी, सुपरवाइजरी ओवरसाइट, ये सब आते हैं. CPGRAMS में भी ये देखा था कि जिस निर्णय में 120 दिन लगते थे, वो 14 दिन में आप तक पहुंचते हैं. आज मैं राजसंपर्क पर देखता हूं कि सेटिस्फेक्शन लेवल है, सीनियर ऑफिसर्स जाते हैं. इसी तरह कई मंत्रिगण वहां गए हैं, मुख्यमंत्री जी वहां गए हैं. सेटिस्फेक्शन लेवल में 15 से 25 प्रतिशत तक जंप आया है. तो टेक्नॉलोजी प्लेटफॉर्म और AI को आप जोड़िए और सुपरवाइजरी ओवर साइट्स बढ़ाएं, तो ट्रांसफॉर्मेटिव गवर्नेंस आपको दिखेगी.

सवाल- नंवबर 2025 में जब आप राजस्थान आए, उस वक्त यहां जो प्रशासनिक माहौल था, वो सभी को पता है. आप भी दिल्ली से आए थे, तो आपको भी ऐसा माना गया कि आप दिल्ली के नॉमिनी की तरह आए हैं. हालांकि अब ये धारणा आपने तोड़ दी है. आप जैसे स्टेट कैडर का ऑफिसर होता है, वैसा ही काम कर रहे हैं. लेकिन उस समय कुछ ऐसा माहौल था, तो आपको क्या लगा, क्या चैलेंजेज फील हुए? और कैसे आपने इस धारणा, अवधारणा को तोड़ा कि कोई दिल्ली का नॉमिनी नहीं है, स्टेट कैडर का सीनियर मॉस्ट ऑफिसर है, HE IS CS ? 

जवाब- मेरा ये विश्वास है कि संस्थाएं जीवंत रहना चाहिए. और मैंने कई चिंतन शिविरों में भाग लिया था, ये लगातार Consistently interpersonal relationships' और behavioral competency modules हो, इन पर काफी फोकस होता है. तो संस्थाएं साथ चलने के लिए interpersonal relationships are very importance' और Cross-hierarchy आप साथ बैठें, सुनवाई करें. 'This is my foundational belief और जो कार्य दिया गया उसमें Put your head down and work, Stay committed to that task' that is was I have tried और मैं खुश हूं कि 7 महीने के बाद मैंने बहुत प्रगति की है. जैसा मैंने कहा कि राजकाज है, राजकाज में Efficiency improvement हम लेकर आए. एनालिटिक्स हम लेकर आए हैं, ये राजस्थान संपर्क है, विकसित राजस्थान 2047 का मॉडल है. राजस्थान ब्यूरोक्रेसी बहुत प्रगतिशील ब्यूरोक्रेसी है. State government model is based on the rule of law, मजबूत टीम है. जनता से संपर्क है, जो रैंकिंग है, हमारे एकदम जंप दिख रहे हैं.

सवाल- आमतौर पर देखा जाता है कि CMO और CS इन दोनों के बीच जो संबंध रहते हैं. उसमें थोड़ा-थोड़ा कभी तनाव, कभी खिंचाव, कभी थोड़ी सी असमान्यता और केवल राजस्थान में ही नहीं, दूसरे प्रदेश में भी देखने को मिलती है. तो अभी तो मुझे ऐसा लगता है बहुत अच्छा तालमेल चल रहा है. तो आपको क्या लगता है, इसको कैसे आपने वर्कआउट किया ? 

जवाब-  मैं उनका बहुत सम्मान करता हूं, लीडरशिप रोल है. "We work under the political leadership and we stay committed to the rule of law" 

सवाल-  मुझे ऐसा लगता है कि पर्सनली कई बार ऐसा होता है कि शायद जो CMO में ऑफिसर होते हैं. उनको CM की Political Compulsions And Political Recruitment को भी Adjust करना होता है. उन पर उसकी भी जिम्मेदारी और दबाव होता है और आमतौर पर CS ऑफिस रूल बुक के हिसाब से चलता है. तो क्या ये अंतर होता है या कोई और वजह होती है ?

जवाब- 'आप भी बहुत लंबे समय से सिविल सर्विस में थे, आप जानते हैं, विशेषज्ञ हैं. इस प्रक्रिया को आप समझते हैं, किस प्रकार से शासन चलता है? मेरे लंबे अनुभव में मैंने ये देखा है कि जो फैसले हुए हैं. उनका क्रियान्वयन सही रूप से कराना हमारी जिम्मेदारी है. और यह नैतिक जिम्मेदारी भी है कि जो काम हमें दिए जाते हैं, उनका Implement करें.

सवाल- आपने फील्ड विजिट का जिक्र किया था तो बहुत समय बाद मैंने भी देखा, वही आप कह रहे हैं. मैं खुद प्रशासन में था, बहुत समय बाद देखा जब CS खुद इतनी ज्यादा फील्ड विजिट में जाते हैं. और खुद ही नहीं जा रहे, बल्कि जो सीनियर्स, ऑफिसर्स हैं, चाहे वो सेक्रेटरी हैं.प्रिंसिपल सेक्रेटरी हैं, ACS हैं, उनके लिए भी ये कह दिया गया है. कि कम से कम महीने में 4 रात बाहर रहेंगे और फील्ड में जाएंगे, रात्रि चौपाल करेंगे. और तो और खुद मुख्यमंत्री जी भी रात्रि चौपाल कर रहे हैं तो इसका क्या असर देखने में आया ? और क्या ये पूरी तरह लागू हो रहा है, सीनियर ऑफिसर्स जा रहे हैं ?

जवाब-  'जी हां, Very Inspiring, माननीय मुख्यमंत्री जी के जो रात्रि विश्राम हुए हैं. बंबौरी में हुआ, अजमेर और पुष्कर में हुए हैं' 'And Very Inspiring And It is, बड़ा Citizen-Centric था. कई लोग आकर मिले और समस्याओं को जमीनी स्तर पर देखने का मौका मिला. मैं कई जगह गया था, खासकर जो एनर्जी सेक्टर ट्रांसफॉर्मेशन हुआ है. पीएम कुसुम का मुझे देखने की इच्छा थी, तो पीएम कुसुम में जो किसानों ने लगाया था. मैं देखने गया था कि ट्रांसफॉर्मेशन किस प्रकार से हुआ ? कोटपूतली में एक किसान के साथ मेरी मुलाकात हुई थी. और उन्होंने ये बताया कि फार्मर इनकम डबल हुई है, क्योंकि वो ग्रिड में पावर सेल कर रहे हैं. पीएम कुसुम योजना के आधारित AU स्मॉल फाइनेंस बैंक उसको फाइनेंस कर रहा है. काफी इकोसिस्टम उसका बन गया है, 100 से ज्यादा एनर्जी प्रोड्यूसर वहां डेवलप हुए, छोटे गांव में उसी प्रकार से पॉली हाउस का इम्पैक्ट देखने दौसा में गया था. मुझे लगा इजरायल बेस्ड जो सिस्टम है ड्रिप इरिगेशन का और स्प्रिंकलर इरिगेशन का, तो व्यापक रूप से जो ट्रांसफॉर्म्स हुआ' वहां भी पॉलीहाउस में मुझे Gerbera Daisy दिखाए गए और एक्सपोर्ट हो रहे हैं. राजस्थान से बहुत सारा Gerbera Daisy फिर सोलर दीदी में मिलने गया था. तो कई “Very senior women in their mid-sixties” में हैं. वो आज आपके सामने सर्किट बोर्ड डेवलप करके दिखा देंगे. फिर राजीविका मिशन के कई सारे एम्पावर्ड वुमेन के साथ मेरे इंटरेक्शन्स हुए हैं, उस मिशन के इंटरेक्शन्स में मुख्यमंत्री विकसित ग्राम अभियान में कई पंचायतों में मैं इंटरेक्ट करने गया था. गुंजोल पंचायत, भीलवाड़ा, स्वरूपगंज पंचायत में मैं गया था. वहां भी जो ट्रांसफॉर्मेशन हैं, सरकार का जो फोकस है. गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति, इन चारों पर फोकस काफी स्ट्रॉन्ग रहा है. अभी ग्लोबल एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मीट हम कर रहे थे, उसकी तैयारी में भी मैं कुछ जगह गया था. लगभग 22 जिले मैंने देखे हैं, करीब 5000 किलोमीटर के मेरे दौरे राजस्थान में हुए हैं/ इरिगेशन प्रोजेक्ट्स देखा हूं, रिफाइनरी देखा था, सोलर प्रोजेक्ट देखा हूं. 50-60 हजार किसानों से और ग्रामीण समुदायों से मेरी बैठकें हुई हैं. कई विभागों और फील्ड लेवल ऑफिसर्स के साथ मेरी चर्चाएं हुई हैं.

सवाल- राजस्थान में Responsive Administration जिसको हम खासतौर पर कहते हैं Accessibility होनी चाहिए, Countability होनी चाहिए. Sensitivity होनी चाहिए, कई दफ्तरों में देखने में आता है. कि जनता से मिलने का जो समय है, वो बहुत Important होता है. वो उतना अच्छे से निर्धारित नहीं है और जहां निर्धारित कर देते हैं. वहां ऑफिसर्स दूसरे कामों में व्यस्त हो जाते हैं. तो इस बारे में कोई साफ नीति या निर्देश फिल्ड ऑफिसर्स के लिए हैं? 

जवाब-  'राजस्थान में हमेशा ये परंपरा रही है कि Interaction with citizens पर फोकस रहा है. कलेक्टर्स के नाइट होल्ड्स होते हैं, गांव में जाकर सुनवाई करते हैं, SDO जाते हैं सुनवाई करते हैं. इसी प्रकार से "Senior Secretarys are in the field" सुनवाई होती है' और ओपन हाउस हैं, आप चीफ सेक्रेटरी के ऑफिस में भी कभी भी अगर बैठकों में नहीं हैं. तो वो ओपन हाउस हैं, वो आकर मिल सकते हैं 10 से 10.30 बजे प्रतिदिन मिटिंग फ्री है. जब भी ऑफिसर आना चाहें, आ सकते हैं. शाम को इसी प्रकार से 3 से 4 बजे के बीच में भी आकर मिल सकते हैं, ये यूनिक है. राजस्थान के प्रशासनिक ढांचे का जो कल्चर रहा है, इसमें सुनवाई किया जाना has been a fundamental and integral part of our governance model" 'राजस्थान के जो सुशासन के मॉडल हैं, इसमें ये integral part दशकों से रहा है. मैं जब भादसोड़ा पहली बार गया था तो मुझे बताया गया था, मुख्य सचिव जी आए हैं. तो मैं वहां गया था भादसोड़ा और मुझे ऐसा कोई दिखा नहीं मुख्य सचिव जी का विजिट तो मैंने पूछा कहां हैं मुख्य सचिव जी, तो मीठालाल जी नीचे जमीन पर बैठकर साफा पहनकर बातचीत कर रहे थे. वो परंपरा मैंने देखी है, मुझे कहा कि मुख्य सचिव जी बैठे हैं, तो देखा तो वो वहां बैठकर बात कर रहे थे. 

सवाल- जब बाड़मेर रिफाइनरी का उद्घाटन होना था, प्रधानमंत्री जी का कार्यक्रम तय हो गया था. एक दिन पहले आप वहां देखने चले गए थे, सारी व्यवस्थाएं देख रहे थे उसी समय वहां वो भीषण अग्निकांड दुर्भाग्यवश हो गया. आप वहां मौके पर थे, तो आपके मन में उस समय क्या आया होगा कि कल तो प्रधानमंत्री जी को आना है. इतना महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, ऐसी दुर्घटना हो गई. इसकी देश में ही नहीं, विदेशों तक में गूंज जाएगी. तो उस समय काफी मानसिक द्वंद्व रहा होगा, उसको आपने कैसे बेलेंस किया? 

जवाब- ' HRRL Refinery is an achievement for Rajasthan वर्ल्ड क्लास रिफाइनरी है. भारत का पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स है, 9 मिलियन मीट्रिक टन का प्रोडक्शन है. 'High-end product पेट्रोल, डीजल और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का है. इतने हजारों किलोमीटर के पाइपलाइन लगे हुए हैं. पाइपलाइन भी मुंद्रा से हम लोग यहां पर ला रहे हैं और मंगला क्रूड भी लोकल क्रूड भी इसमें था. 'Very unfortunate accident था उस दिन. Refinery is coming back on track very soon within a period of 7-8 हफ्तों में ये रिपेयर्स कंप्लीट हो गए हैं. और मैं अपेक्षा करता हूं कि बहुत जल्द ही इसका उद्घाटन होगा. 

सवाल- उस दिन कैसा आपको लगा, कैसे Situation को हैंडल किया ?   

जवाब- 'That fire should be under control... दूसरा Morale of Officers' जो बाकी उसके बाद ऑपरेशंस हैं, ये स्ट्रीमलाइन किया जाना है. बहुत जल्द ही आग को नियंत्रण में ला पाए और क्रूड ऑयल फायर था. फायरमैन की सराहना किया जाना चाहिए और आप जाकर देंखेंगे HRRL में तो बहुत यंग ऑफिसर्स हैं. 25-30 साल के लड़के काम कर रहे हैं, उनके यंग इंजीनियर्स के साथ मेरा काफी अच्छा इंटरेक्शन था. बहुत जल्द ही उन्होंने वापस इस रिफाइनरी को खड़ा किया. रिप्लेसमेंट पार्ट्स हम लोगों को मिले और इंश्योरेंस के क्लेम्स भी, ये लोग टाईमली सैटल किए. Overall "confidence is very high"

सवाल- युद्ध का माहौल चल रहा है, पश्चिम एशिया का संकट चल रहा है. इस दौरान तेल की आपूर्ति, LPG की आपूर्ति थोड़ी कम हो गई थी. मैंने देखा आपने बहुत क्लोजली मॉनिटरिंग किया. आपने भी मुख्यमंत्री जी ने भी, तो उसका क्या असर देखने में आया?और अब आने वाले दिनों की स्थिति क्या है? लोगों में कॉन्फिडेंस आएगा ? आप कुछ बताएंगे इस बारे में

जवाब-  माननीय प्रधानमंत्री जी ने एक बैठक ली थी. जैसे ही पश्चिम एशिया संकट शुरू हुआ, तब सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ उसी समय माननीय मुख्यमंत्री जी ने 3-4 बैठकें उनके स्तर पर ली थीं. और मॉनिटरिंग के लिए मुझे जिम्मेदारी दी गई थी. पश्चिम एशिया संकट में ये देखा गया कि LPG की बुकिंग्स में बहुत बढ़ोतरी देखी गई थी और फरवरी में जो रेश्यो देखा गया था बुकिंग्स में, वो अभी कम हुआ है. सप्लाई लाइन भी स्ट्रीमलाइन हुए हैं और राजस्थान का एक बड़ा एडवांटेज है.' कि हम लोग पाइपलाइन पर हैं, अगर कोई प्रोडक्ट में कोई शॉर्टफॉल दिख रहा है. तो Immediately पेट्रोलियम मिनिस्ट्री को हम लोग Convey करते हैं. कि हमें ये प्रोडक्ट चाहिए तो पाइपलाइन में हमें वो प्रोडक्ट मिल जाता है. एक बड़ा चेंज जो आवश्यक है, वो ये है कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन को हमें प्रमोट करना है. तो सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स के साथ लगातार बैठकें हो रही हैं. 'ज्यादा से ज्यादा कनेक्शंस LPG से सिटी गैस में शिफ्ट करने के दूसरा था कि LPG सप्लाई लाइंस को जारी रखें कमर्शियल डिस्ट्रीब्यूशन में भी कुछ रिलैक्सेशन दें, माननीय मुख्यमंत्री जी के ये फैसले थे. खासकर देवस्थान है, मंदिरों को दिया जाए, स्टूडेंट्स को दिया जाए. डेयरी को दिया जाए, वेडिंग्स में उपलब्ध करवाया जाए, हॉस्पिटल्स में उपलब्ध करवाया जाए और 70%  तक कमर्शियल प्रोडक्शन को भी आज की तारीख में LPG सप्लाई मिल रही है. Largely Stable हैं  "Supplies are stable" पर्याप्त स्टॉक्स हमारे पास हैं. हमारे कोई भी पेट्रोल स्टेशन ड्राई नहीं हुए हैं, सब जगह सेल चालू है.

सवाल- आमतौर पर ऐसी एक धारणा बनी हुई है कि CS जो हैं विभिन्न विभागों की बैठकें कराते हैं. उनमें कॉर्डिनेशन कराते हैं, समन्वय कराते हैं. और उसको सॉल्यूशन देते हैं वो सब ज्यादातर वर्बल होता है. कभी-कभी मिनिटाइज होता है और ये फिर भी जरूरी नहीं है कि जो CS की मिटिंग में तय हुआ है वो फलां विभाग उसको Execute करें वो विभाग उस प्रस्ताव को अपने मंत्री तक भेजता है तो वो मंत्रीजी की इच्छा पर डिपेंडेंट हो जाता है. जरूरी नहीं है कि जो ऑफिसर्स की बैठक में तय हुआ है वो मंत्रीजी उसको अप्रूव कर दें आपको भी कुछ ऐसा देखने में आया या ऐसा लगा ? 

जवाब-   inter-department जो coordination के Issue काफी रहे हैं. "Not only inter-department coordination, Center-State Coordination" भी काफी Important हो गया है. राजस्थान का इस वर्ष का जो बजट है 6 लाख 11 हजार करोड़ है. राजस्थान के इतिहास में सबसे बड़ा बजट है. हमें Centrally Sponsored Schemes से लगभग हम 2 लाख करोड़ ला पाए लास्ट ईयर और मार्च में ही 20 हजार करोड़ हम ला पाए तो ये बड़ा अचीवमेंट है. तो इसके लिए Center-State Coordination Is very important' और  inter-department जो coordination हैं. एक-एक स्कीम 10 विभाग, 15 विभागों के बीच चल रही है. तो  Interdepartmental Coordination In State Governments और  Center-State Coordination ये दोनों important हैं. तो इसकी जिम्मेदारी चीफ सेक्रेटरी की काफी रहती है.

सवाल- मुख्यमंत्री जी और आप में एक बात कॉमन है  सेंट्रल स्टेट के मामले में तो वो भी दिल्ली जाते हैं. तो प्रधानमंत्री के साथ-साथ 10-15 मंत्रियों के साथ मुलाकात करते हैं. राज्य के पेंडिंग इश्यूज को रखते हैं, उनका सॉल्यूशन लेकर आते हैं. आपका भी मैंने एक ट्रैक देखा कि लगभग दो महीने आप कई विजिट दिल्ली की करते हो और वहां कैबिनेट सेक्रेटरी से लेकर मेजर सेक्रेटरी से मिलते हो स्टेट के इश्यूज का समाधान करवाते हैं. तो इसका असर तो लोगों को देखने में आ रहा है ?

जवाब- इसमें Central-State coordination is very critical आज की तारीख में जब GST IS OPERATIONAL, इसी प्रकार से सेंट्रल स्पॉन्सर्ड स्कीम्स में हमें बजट लाना है तो Distinct knowledge भी रखने की आवश्यकता है. और अंडरस्टैंडिंग को कैसे हमे सेंट्रल गवर्नमेंट से एंगेज करना है इसकी आवश्यकता है इसमें मेरा जो केंद्र में लगभग 21 वर्षों का अनुभव है उसका फायदा मिल रहा है. और इसमें को-ऑर्डिनेशन में मेजर इंफ्रास्ट्रक्चर मिनिस्टरीज हैं. हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स बहुत मेजर है, बहुत सारे प्रोग्राम चल रहे हैं. जयपुर मेट्रो फेस्ट, इसी प्रकार से माइनिंग में हैं, वॉटर रिसोर्सेस हैं. पेट्रोलियम में हमारा रिफाइनरी का को-ऑर्डिनेशन है' इसी तरह फाइनेंस मिनिस्ट्री के साथ मदर सैंक्शन सारी विभागों से निकालने हैं. 16वीं फाइनेंस कमिशन के लाने हैं, नरेगा के लिए रूरल डेवलपमेंट हैं. इनमें विभिन्न मंत्रालयों के साथ इंटरेक्शन कि हमें आवश्यकता है. जो और गवर्नमेंट ऑफ इंडिया का विजन है, वह बहुत व्यापक है. क्योंकि मेजर रिफॉर्म ओरिएंटेड डायरेक्शन एनर्जी सेक्टर रिफॉर्म्स हैं. पुलिस रिफॉर्म्स हैं, उसी प्रकार से माइनिंग रिफॉर्म सेक्टर है. हर एक विभाग का 10-10 सूत्री रिफॉर्म्स है, हम लोग बना सकें और सरकार के साथ यह बहुत आवश्यक है कि केंद्रीय रिलीज हम टाइम ले सकें. और रिफॉर्म पाथ को हम आगे बढ़ा सकें, उनका जो व्यापक राष्ट्रीय विजन है. इसको राज्य में हम ट्रांसलेट कर सकें और यह बहुत बेनिफिशियल है कि हम लोग बहुत स्ट्रॉन्ग सेंट्रल रिलेशन रखें और वेरी स्ट्रांग इंटर डिपार्मेंटल रिलेशनशिप रखें. जैसा मैंने आपसे निवेदन किया जीवंत रहना चाहिए संस्थान के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी का यह शब्द है, जीवन संस्थाएं रहना चाहिए. और उसके लिए इंटरनल डिपार्टमेंट को-ऑर्डिनेशन बहुत जरूरी है.

सवाल- आपके बारे में एक और बात काफी लोग चर्चा करते हैं. वह अच्छा है कि आप सोशल मीडिया पर बहुत एक्टिव रहते हैं. और मेरे ख्याल से सोशल मीडिया का बेस्ट यूज अगर किसी ब्यूरोक्रेट ने किया है तो वह आप हैं. आमतौर पर लोग सोशल मीडिया पर अपनी अकाउंटेबिलिटी आंसर एबिलिटी से डरते हैं. तो आपको क्या लगता है कि इसका कोई हैज़र्ड भी होता है ? आप बुरा नहीं माने तो मैं कहूं कि पीछे अपने जैसे नितिन नवीन जी को बुके दिया था. और वह सोशल मीडिया पर आ गया था  और कुछ दिन पहले आप 'मन की बात' सुन रहे थे. वह फोटो भी सुनते हुए आपका 'मन की बात' सुनते हुए सोशल मीडिया पर आ गया था. तो कुछ लोगों ने उसे बारे में चर्चा भी कीहालांकि मैं इसको पर्सनली गलत नहीं मानता नितिन नवीन राज्यसभा सांसद भी हैं वह बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं. और प्रधानमंत्री जी तो सबसे प्रशासन के मुखिया हैं. तो उनकी बात को अगर कोई सुन रहा है तो इस पर आपका क्या कहना है ?

जवाब- भारत सरकार की यह नीति है कि रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म और इन्फॉर्म ये नीति है और केंद्र सरकार ने प्रयास किया कि जो पॉलिसीज हैं. गवर्नमेंट के जो प्रोग्राम्स हैं, जो कार्यशैली है, पॉजिटिव गवर्नेंस का जो अप्रोच है. ये पब्लिक डोमेन में रहे तो ये प्रयास रहा है कि That activity of governance खास करके जो पॉजिटिव गवर्नेंस मॉडल हैं, वह हम लोग का अंडर थिस पॉलिसी मैकेनिज्म रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म और इन्फॉर्म इसकी पालना के अनुरूप हम लोग कर रहे हैं. जो इस पॉलिसी के तहत इन्फॉर्म की जो पॉलिसी है. इसमें हर विभाग को हर मंत्रालय को ये मैंडेट था कि हमारे कितने आउटरीच हैं. एनालिटिक्स किस प्रकार से आ रहे हैं, पॉजिटिव वाइब्स क्या आ रहे हैं ? इसकी हम लोग मॉनिटरिंग भी करते हैं इसी क्रम में यह जो पॉजिटिव स्टोरी ऑफ गवर्नमेंट हम लोग पेश करते हैं. इसका अच्छा असर आया है, आउटरीच रहना चाहिए और Outreach has enabled us to enhance the perception of the government that it is a functional government, a committed government. with an unwavering commitment to producing results.

सवाल- स्टेट के लॉयन ऑर्डर को आप कभी-कभी देखते हैं और स्टेट में क्राइम रेट भी काम हो रहा है तो आपको क्या लगता है ? इसमें केवल डीजीपी या पुलिस डिपार्टमेंट ही जिम्मेदार होता है. या फिर आपकी भी कोई भूमिका बनती है ? या आपको क्लाजली इंटरेक्ट करते हैं, रिव्यू करते हैं ये क्या सिस्टम है ?

जवाब- i have a lot of respect for rajeev sharma ji and i appreciate his contribution to bringing about improvement in the law and order situation and improving the crime rate reduction 'इसी प्रकार से Modernization of the Force और adoption of this' भारती न्याय संहिता में जो अमेंडमेंट्स हुए हैं और उसमें काफी चेंज डिजिटल एंपावरमेंट ऑफ पुलिस स्टेशंस हैं और हर 15 दिन में हम रिव्यू करते हैं, we share very strong bond of friendship also' 'and Mutual respect है, मेरी उनके प्रति और जो उनके जो प्रयास हैं' उसमें मैं सहयोग करने की कोशिश करता हूं. इसी क्रम में जो गृहमंत्री जी ने बीकानेर विकसित किया था. और हम लोगों को कुछ निर्देश दिए थे 1930 हेल्पलाइन को और सुदृढ़ करें. तो हम लोग गए थे उसे दिन 1930 की स्टडी करने के लिए पुलिस रिफॉर्म्स के बारे में मुख्यमंत्री जी के बहुत डिटेल्ड रिव्यू पुलिस हैडक्वॉर्टर में हुआ था. उसी की फॉलोअप में कई रिफॉर्म मेजर्स जैसे लिए गए थे. और जो न्यायालयों से जो फैसले आ रहे हैं उसके अनुपालना में जो पुलिस मॉर्डेनाइजेशन हो, पुलिस रिफॉर्म्स हो हम लोगों के साथ कंसिस्टेंटली खड़े रहकर काम करते हैं, लीडरशिप तो उनका है.

सवाल- कितना आपसे बातें तो बहुत की जा सकती हैं. इतना भंडार है आपके पास ज्ञान का, लेकिन बस अब समय की सीमा को देखते हुए दो-तीन छोटे-छोटे प्रश्नों में पूछ करके इस बातचीत को खत्म करेंगे जवाब पीछे मुड़कर देखते हैं. अब आप पीछे मुड़कर देखते हैं अब आपका रिटायरमेंट नजदीक है. सितंबर में आपका रिटायरमेंट है तो पीछे मुड़कर देखते हैं तो आपको क्या लगता है ? आपके प्रशासनिक जीवन सबसे बड़ी उपलब्धि क्या हो सकती है ?

जवाब- 'रीलेंटलेस कमिटमेंट, कमिटमेंट सर्व द नेशन, पैट्रियोटिज्म कमिटमेंट, नेशनलिज्म' ये हमेशा मुझे ड्राइव किए हैं और हर पोस्ट पर i have tried to contribute''i have taken on every position and tried to transform the institutions into one of excellence' 'कई संस्थाएं बहुत कठिन हैं एडमिनिस्ट्रिंग इंस्टीट्यूशंस और यह मैंने देखा है कि Institutions stand to rise and fall with individuals जहां पर आपका इंडिविजुअल लीडरशिप स्ट्रॉन्ग हो वो संस्था चलता है. अगर आपका लीडरशिप कमजोर है तो फिर वो संस्था गिर जाता है. कितना भी स्ट्रॉन्ग इंस्टीट्यूशन हो अगर वीक लीडरशिप है तो वह संस्था नहीं चलती. और personally i have tried to contribute to every institution that i have worked with' और मैं आभारी हूं कि काफी सपोर्ट मुझे वरिष्ठ लीडरशिप से मिला है और कलीग से मिला है. ट्रांसफॉर्मेटिव जर्नी में बहुत सारे लीजेंडरी सिविल सर्विस सर्वेंट के साथ मैं काम किया है. राजस्थान कैडर के, भारत सरकार पर स्तर पर, many people who are Legends in themselves to contribute' कई लेसंस मैंने सीखे हैं और Humility in service, हमेशा Simplify a citizen’s journey with the government' अगर आप कहेंगे कि आपका 37 साल का अनुभव में सबसे अहम कंट्रीब्यूशन क्या रहा है.  simplifying citizen engagement with the government citizen central city is the centrality is the governance' इसके ऊपर मैंने बहुत फोकस किया है और हर व्यक्ति को आउटरीच करने का प्रयास किया. कई हजारों सिटीजंस के साथ हजारों इंस्टीट्यूशंस में एम्पलाइज के साथ मेरे इंटरेक्शंस रहे हैं. वेरी पॉजिटिव मेमोरी रही है और काफी मैं डॉक्यूमेंट भी किया था. माननीय प्रधानमंत्री जी मोदी जी का यह विजन है मास्टर न्यू इंडिया. जिसमें मैक्सिमम गवर्नेंस- मिनिमम गवर्नमेंट, इसमें मैं बहुत विश्वास करता हूं' और इंस्टीट्यूशन ट्रांसफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को संस्थानों में किस तरह से यूज कर सकते हैं. और इससे परिवर्तन जो आता है That has been a fulfilling achievement'

सवाल- अभी लोग चर्चा करते हैं और हो सकता कि आप इसका साफ जवाब भी नहीं दे आपके रिटायरमेंट के बाद आपके प्लांस क्या हैं ? सरकारें तो जो आपका उपयोग करेंगी वो करेंगी. लेकिन आपका प्लान क्या है आप कैसे देखते हैं ? अपने फ्यूचर लाइफ को आफ्टर रिटायरमेंट ?

जवाब- धन्यवाद,  will see it hopefully it will be a very fulfilling life post retirement also

सवाल- एक औपचारिक प्रश्न है कि आप नए युवा अधिकारियों को क्या संदेश देना चाहेंगे ? जो सिविल सर्विसेज में आ रहे हैं उनको अपनी लाइफ कैसे लीड करनी चाहिए ?

जवाब- 'High meritocracy है जो सिविल सर्विसेज में आ रही है' 'बड़ा कठोर परिश्रम के बाद आते हैं Accountability level is very high' एथिकल गवर्नेंस, नैतिक भारत के प्रति कमिटेड रहें और जो फर्स्ट फाउंडेशन है. जब मैंने सर्विस में ज्वॉइन किया था तो मेरे पिताजी ने कहा था कि नेवर फर्स्ट्ज ए लॉकबुक, नेवर फर्स्ट्ज ए टीएबल है. हमेशा एथिकल गवर्नेंस का जो फाउंडेशन है यहां से शुरू होता है. ज्यादातर लोग ये करते हैं कि टीएबल और लॉकबुक जो आपने कहा है कि कितनी बेसिक चीज है, लेकिन ये है ?

जवाब- मेरा हमेशा से यह विश्वास रहा है कि i am ethical i am accountable. i am the indian administrative service' जब आप भारत के सर्वोच्च सेवा में आप सेलेक्ट होकर आए हैं. तो आपकी जिम्मेदारी है कि आप एथिकल रहे और अकाउंटेबल रहें.

सवाल- अब लास्ट में आपकी डाइट, आपकी फिटनेस आपकी पर्सनल हॉबीज, सबसे फेवरेट पास टाइम क्या है ?

जवाब- मैं राष्ट्रीय स्तर पर स्पोर्ट्समैन रहा हूं. मैं कोशिश करता हूं कि एक अच्छे स्तर पर फिटनेस लेवल को मेंटेन किया जाए. और एश्योर था, इंगेज विद यूथ, तो i start में मैं गया था. मैंने इंगेज किया था, खेलो इंडिया देखा था, संडे ऑन साइकिल पर मैंने पार्टिसिपेट किया था I try to keep myself engaged with young colleagues ये अच्छा रहता है. आपसे बहुत अच्छी बातचीत रही, हमसे मिलकर एक शुभकामना देते हैं. कि आगे आपका जब भी रिटायरमेंट आएगा उसके बाद हम तो अपनी कामना देंगे. आप स्वीकार करें या ना करें या तो...या तो आपका एक्सटेंशन हो या फिर केंद्र सरकार में कोई आपको महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिले. आप जैसे अनुभवी और एफिशिएंट ऑफिसर्स को खास तौर पर जो फिट हैं. उनको मौका मिलना याद और एक्सटेंशन मिलना है. यह सब के हित में है और आम जनता के हित में भी है धन्यवाद.