जयपुर: प्रसूताओं की मौत में चिकित्सकीय लापरवाही नहीं है. चिकित्सा मंत्री गजेद्र सिंह खींवसर ने नागौर और डीडवाना के प्रकरण पर रिपोर्ट ली. रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सा मंत्री खींवसर ने फर्स्ट इंडिया को जानकारी देते हुए कहा कि नागौर में 21 वर्षीय प्रसूता की सुबह डिलीवरी हुई थी.
दोपहर बाद अचानक प्रसूता को हुआ चेस्ट पेन और उल्टियां हुई. चिकित्सकों के हर संभव प्रयास के बावजूद भी नहीं बचाया जा सका, जबकि दूसरी ओर डीडवाना के प्रकरण को लेकर चिकित्सा मंत्री खींवसर ने कहा कि खुनखुना निवासी मोनिका स्थानीय स्तर पर ट्रीटमेंट ले रही थी. कल अलसुबह उसे राजकीय बांगड़ अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां 200/150 प्रसूता का ब्लड प्रेशर चल रहा था.
चिकित्सकों ने ब्लड प्रेशर को मेंटेन करने का हरसंभव प्रयास किया. लेकिन दुर्भाग्यवश प्रसूता को नहीं बचाया जा सका.चिकित्सा मंत्री ने दोनों ही प्रकरणों में किसी भी लापरवाही से इनकार किया.
खींवसर ने कहा कि हमारे चिकित्सा संस्थान मरीजों की सेवा के लिए 24X7 लगातार कार्यरत है. हमारे चिकित्सकों पर भरोसे का ही परिणाम कि रोजाना हजारों की तादाद में मरीज ट्रीटमेंट ले रहे है. हमारे चिकित्सा संस्थानों में प्रसव की सफलता दर 99.99 फीसदी है. चिकित्सा मंत्री ने कहा कि इस तरह भ्रांतियां फैलाकर आमजन को गुमराह करना गलत है.