जयपुर : अधीनस्थ मंत्रालयिक कर्मचारियों के लिए अलग निदेशालय की बजट घोषणा रुकावटों के चलते सिरे नहीं चढ़ पा रही है. इसे लेकर कुछ विभागों के विरोध के बाद उच्च स्तर पर आपत्तियां होने से शुरुआत में सिरे चढ़ रही यह प्रमुख बजट घोषणा की क्रियान्विति पर काम अटक गया है. इससे करीब डेढ़ लाख सरकारी कर्मियों को मायूसी हाथ लग रही है.
21 अगस्त 2025 को पूर्व मुख्य सचिव सुधांश पंत ने मंत्रालयिक सेवा निदेशालय गठन की पूर्व की बजट घोषणा के क्रियान्वयन की दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए थे लेकिन इसके बाद इस प्रकरण का अटकने,भटकने और लटकने का दौर जारी है.
हाल ही में हुए विधानसभा सत्र में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अतारांकित सवाल किया था कि मंत्रालयिक व अधीनस्थ सेवा के कार्मचारियों के लिए निदेशालय गठन की घोषणा की थी और यदि हां तो क्या निदेशालय का गठन कर दिया गया है.
इस पर जवाब दिया गया है कि सीएम की ओर से 2025-26 की बजट घोषणा में कार्मिक विभाग के अध्याधीन मंत्रालयिक निदेशालय का गठन किए जाने का उल्लेख है. लेकिन अधीनस्थ मंत्रालयिक कर्मचारियों के लिए निदेशालय गठन की कोई घोषणा नहीं हुई है.
बजट की बिंदु संख्या 63 की घोषणा की अनुपालना में राजकीय विभागों में मंत्रालयिक कर्मचारी अधीनस्थ कार्यालय मंत्रालयिक सेवा नियम 1999 से शासित हैं. इन कर्मियों के लिए निदेशालय गठन का प्रकरण परीक्षणाधीन है.
निदेशालय गठन इसलिए जरूरी माना गया था कि इन कर्मचारियों की अरसे पुरानी मांगों,मसलों और समय-समय पर आने वाली समस्याओं का समाधान हो सके.
क्या थीं अन्य मांगे और क्या रहा कमेटी का रुख ?
निदेशालय गठन के साथ ये थीं अन्य मांगें
-3600 ग्रेड पे,सचिवालय समान वेतनमान की है मांग
-कनिष्ठ सहायक को आरंभिक वेतन 25500 रुपये करने की मांग.
-चयनित वेतनमान 8 ,16 ,24, 32, को लागू करना.
-गृह जिले में समायोजन की है प्रमुख मांगें.
-अधीनस्थ मंत्रालयिक संवर्ग को सचिवालय के समान वेतनमान (सहायक प्रशासनिक अधिकारी (ग्रेड पे 4200 ) व पदोन्नति के अवसर और उप निदेशक (प्रशासन) का नवीन पद (ग्रेड पे 8700) में सृजित हो.
-कनिष्ठ सहायक को 30 नवम्बर 2017 से पहले जैसे 2400 ग्रेड पे यानि 9840 बहाल हो
-साथ ही 7वें वेतनमान में शुरुआती वेतन 25500 किया जाए.
-पंचायती राज संस्थाओं में कनिष्ठ सहयक के 10,000 पद की फिर बहाली हो.
-मंत्रालयिक कर्मचारियों को अन्य विभागों के समान राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए और पदोन्नति के पद सृजित किए जाएं.
-चयनित वेतनमान 9, 18, 27 के स्थान पर 8, 16, 24, 32 वर्ष की सेवा पर दिया जाकर पदोन्नति पद के वेतन का लाभ मिले.
-लेकिन कमेटी ने इनकी मांगों को किया सिफारिशों में खारिज
-करीब लाखों कर्मचारियों की आस रह गई अधूरी
-2017,2018 और 2023 के विरोध-प्रदर्शनों के बाद भी रह गई अधूरी
-कमेटी का है यह मत-"स्टेट पैरिटी आधार पर अन्य कैडर संवर्ग ऐसी ही मांग करेंगे
-जिसका कोई अंत नहीं इसलिए इसे संशोधित करने की कोई जरूरत नहीं"
-इससे हुई मंत्रालयिक संवर्ग में निराशा
-जिसके बाद अधीनस्थ मंत्रालयिक कर्मचारियों के लिए अलग निदेशालय के गठन की घोषणा पर अमल करना शुरू हुआ लेकिन अब यह काम अटक गया.
रुकावट आने के मुख्य कारण
-पीडब्ल्यूडी,सेल्स टैक्स विभाग,कलेक्ट्री ऑफिस सहित कुछ ऑफिसों ने निदेशालय गठन का विरोध करना शुरू कर दिया.
-इसका मुख्य कारण एक सीट पर जमे रहने या एक विभाग में ही काम करने का मोह माना जा रहा है.
-इसे लेकर उच्चस्तर पर कई बिंदुओं को लेकर स्थिति साफ करने को कहा गया और अब संशय दूर करने में ही प्रकरण अटक गया है.
यह है विसंगति
-कर्मचारियों के अनुसार वेतन विसंगति में सबसे मुख्य यह है कि एक ही भर्ती प्रक्रिया में चयनित होते है, लेकिन वेतन और पदोन्नति में विसंगति है.
-सचिवालय में 4200 और सचिवालय के बाहर चयनित कर्मचारियों को 3600 वेतन श्रृंखला मिलती है.
क्या होगा निदेशालय बनने से?
-मंत्रालयिक कर्मचारी निदेशालय गठन में राजस्थान के सारे मंत्रालयिक कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची एक जगह होगी.
-ऐसा करके मंत्रालयिक कर्मचारियों का समान अनुपात में प्रमोशन सुनिश्चित हो सकेगा.
-इसमें मंत्रालयिक के साथ ड्राइवर्स और सहायक कर्मचारियों के भी शामिल होने से उनकी पदोन्नति और अन्य समस्या दूर हो सकेगी.
-राज्य भर के तमाम मंत्रालयिक कर्मचारियों के संस्थापन,पोस्टिंग और पदोन्नति से जुडे मसले और वेतन विसंगति से जुड़े पहलू इस निदेशालय के गठन के साथ दूर किए जा सकते हैं.
-सहायक कर्मचारी,वाहन चालक,निजी सहायक और मंत्रालयिक कर्मचारियों को मिलाकर निदेशालय बनने की है आस.
-डेढ़ लाख से ज्यादा कर्मी इसमें होंगे शामिल
-इन कर्मचारियों का अंतर्विभागीय तबादला भी हो सकेगा और नई भर्ती भी निदेशालय के जरिेये होगी.
-साथ ही इन कर्मचारियों की प्रमोशन में भी रहेगी एकरूपता.
उधर खेमराज कमेटी की रिपोर्ट में अधीनस्थ मंत्रालयिक कर्मचारियों की मांगें खारिज होने और अब निदेशालय गठन को लेकर प्रक्रिया अटकने के बाद ये कर्मचारी फिर आंदोलन भी कर सकते हैं.