जयपुर : देशभर में कल से सौर परियोजनाओं में सिर्फ घरेलू पैनल अनिवार्य है. केन्द्र के फैसले से सौर उद्योग जगत पर बड़ा संकट मंडराने की आशंका है. 15,000 करोड़ का निवेश फंसने और 15,000 से अधिक नौकरियां जाने का खतरा है. उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में ALMM-II लागू करना चिंतनीय है.
Approved List of Models and Manufacturers को लागू करना चिंतनीय है. राजस्थान सोलर एसोसिएशन के CEO नितिन अग्रवाल ने इस फैसले पर चिंता जताई है. अग्रवाल ने कहा कि हम मेक इन इंडिया के विरोध में नहीं हैं. बल्कि हम तो देश में मजबूत और प्रतिस्पर्धी सौर विनिर्माण उद्योग के पक्षधर हैं.
वर्तमान समय में ALMM-II को लागू करना उद्योग के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी कर सकता है. यदि उद्योग को उचित संक्रमण अवधि नहीं दी गई तो 125 से अधिक मॉड्यूल निर्माता और 500 से अधिक सहायक उद्योग अस्तित्व के संकट में आ सकते है. उन्होंने आगे कहा कि आज DCR और Non-DCR मॉड्यूल के बीच मूल्य बहुत अधिक अंतर है.
जिसका सीधा बोझ आम उपभोक्ताओं और विशेष रूप से किसानों पर पड़ेगा. आशंका है कि इस फैसले से ₹15,000 करोड़ का निवेश प्रभावित होकर NPA में बदल सकता है. 15,000 से अधिक लोगों की आजीविका पर संकट आ सकता है. उद्योग विशेषज्ञों ने सरकार से मांग उठाई है कि घरेलू सेल निर्माण क्षमता और बाजार की वास्तविक स्थिति को देखते हुए इस नीति के लिए कुछ अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए.