जयपुर: ईरान-अमेरिका युद्ध का प्रतिकूल असर अब प्रदेश भर के निकायों की ओर से कराए जा रहे सड़क निर्माण कार्यों पर पड़ने लगा है. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 28 फरवरी से युद्ध शुरू हुआ था. इस युद्ध के चलते क्रूड ऑयल के दामों में काफी बढ़ोतरी हुई. क्रूड ऑयल से निकलने वाले विभिन्न उत्पादों में से एक है डामर. अधिकतर सड़कों के निर्माण में डामर का इस्तेमाल किया जाता है. क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने के साथ ही डामर की दरों में भी बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है. इसके चलते प्रदेश भर के शहरों में चल रहे सड़क निर्माण कार्य बाधित हो रहे हैं.
ईरान-अमेरिका युद्ध का विकास कार्यों पर आने लगा प्रतिकूल असर:
-प्रदेश भर के निकायों के सड़क निर्माण कार्यों पर आने लगा असर
-इसका सबसे बड़ा कारण है डामर की दरों में बेतहाशा बढ़ोतरी
-डामर की दरों में 40 फीसदी से अधिक हो चुकी है बढ़ोतरी
-युद्ध से पहले फरवरी में डामर की दर थी 54 हजार 740 रुपए प्रति टन
-जो अब अप्रेल में बढ़कर हो गई है 76 हजार 688 रुपए प्रति टन
-डामरों की कीमतों में हुई इस कदर बढ़ोतरी के चलते पड़ रहा प्रतिकूल असर
-निकायों की ओर से कराए जा रहे सड़क निर्माण कार्य पर पड़ रहा असर
-डामर महंगी होने के कारण ठेकेदार डामर खरीदने में कर रहे आनाकानी
-इसके चलते सड़क निर्माण से जुड़े प्रोजेक्ट्स में हो रही है देरी
-प्रदेश भर में सड़क निर्माण कार्यों में हो रही है लेटलतीफी
-विकास प्राधिकरणों,नगर सुधार न्यासों,नगर निगम
-और नगर परिषदों आदि के कार्यों में हो रही है लेटलतीफी
-क्रूड ऑयल से निकलने वाले विभिन्न उत्पादों में से एक है डामर
-युद्ध के चलते क्रूड ऑयल के दामों में हुई जबरदस्त बढ़ोतरी
-क्रूड ऑयल 64 डॉलर प्रति बैरल से पहुंच गया है करीब 112 डॉलर प्रति बैरल
-महंगी डामर खरीदने से बचने लगी हैं सड़क बनाने वाली अनुबंधित फर्में
-युद्ध से पहले जिस डामर मिक्स प्लांट से जहां एक महीने में होता था सप्लाई
-एक महीने में करीब 15 हजार टन डामर मिस्क होता था सप्लाई
-वह अब घट कर रह गया है महज 3 हजार से 4 हजार टन
-प्रदेश भर के विकास प्राधिकरण,नगर सुधार न्यासों,
-नगर निगम,नगर परिषदों व नगर पालिकाओं में चल रहे हैं कार्य
-17 सौ करोड़ रुपए से अधिक के चल रहे सड़क निर्माण कार्य
-अकेले जेडीए में 530 करोड़ रुपए के चल रहे सड़क निर्माण कार्य
-ठेकेदारों की ओर से निकायों से की जा रही है मांग
-सड़क निर्माण कार्य की अवधि बढ़ाने की की जा रही है मांग
-भीलवाड़ा नगर सुधार न्यास के अधिकारियों को दिया गया है ज्ञापन
-स्थानीय कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन की ओर से दिया गया है ज्ञापन
-ज्ञापन में कहा गया है कि युद्ध के कारण बढ़ गई है कीमत
-डामर सहित विभिन्न मैटेरियल की कीमतों में हो गई है बढ़ोतरी
-ऐसे में कोरोना काल की तर्ज पर बढ़ाई जाए समय सीमा
-सड़क निर्माण कार्य पूरा करने की बढ़ाई जाए समय सीमा
प्रदेश भर के विकास प्राधिकरण,नगर सुधार न्यास,नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं में अलग-अलग अनुबंध कैटेगिरी में सड़क निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं. किसी में सड़क निर्माण के मटेरियल में बढ़ोतरी होने पर अनुबंधित फर्म को अतिरिक्त भुगतान का प्रावधान तो किसी में ऐसा प्रावधान नहीं है, लेकिन जानकारों की मानें तो सभी प्रकार के निर्माण कार्यों पर डामर की बढ़ती कीमतों का प्रतिकूल असर पड़ने लगा है.
सड़क निर्माण के जो काम किए जा रहे वार्षिक संविदा दर (ARC)पर:
-उनमें मैटेरियल की कीमत बढ़ने पर भुगतान बढ़ाने का नहीं हैं प्रावधान
-इसी तरह 50 लाख रुपए से कम लागत के काम अथवा
-ऐसे सड़क निर्माण कार्य जिनके पूरा होने की अवधि है 3 माह तक
-इन कार्यों में मैटेरियल की दर बढ़ने पर निकाय नहीं करते हैं भुगतान
-मैटेरियल की कीमत बढ़ने पर अनुबंधित फर्म को निकाय नहीं करते हैं भुगतान
-जेडीए सहित विभिन्न निकायों के किए जा रहे हैं कई सड़क निर्माण कार्य
-इन्हीं दो कैटेगरी के तहत किए जा रहे हैं कई सड़क निर्माण कार्य
-ऐसे सड़क निर्माण कार्य जिनकी लागत है 50 लाख रुपए से या उससे अधिक
-अथवा जिन कार्यों की पूरी होने की अवधि है तीन महीने से अधिक
-ऐसे कार्यों के लिए संबंधित निकाय अनुबंधित फर्म को करता है भुगतान
-मटेरियल की कीमत में बढ़ोतरी होने पर करता है अतिरिक्त भुगतान
-लेकिन भुगतान किया जाता है महंगाई दर में त्रैमासिक बढ़ोतरी के आधार पर
-अतिरिक्त भुगतान के इस प्रावधान के बावजूद कई अनुबंधित फर्में है पशोपेश में
-उनको डर है कि आज वे 40 प्रतिशत अधिक कीमत पर डामर खरीद लें
-लेकिन बाद में डामर की दर घटने पर त्रैमासिक आकलन के चलते नहीं मिले भुगतान
-उन्हें आज के अनुसार दिया हुआ भुगतान नहीं मिले बाद,इसकी सता रही है चिंता
-यहीं कारण है कि इस कैटेगरी में भी शामिल कई कार्य हो रहे हैं बाधित