जयपुरः 'एक देश-एक चुनाव' को लागू करने की कवायद तेज हो गई है. मोदी सरकार व्यावहारिक और संवैधानिक रूप से सुरक्षित रास्ता तलाश रही है. संयुक्त संसदीय समिति(JPC) में दो चरणों वाले 'टू-फेज ट्रांजिशन मॉडल' पर विचार कर रही है. पाली सांसद पीपी चौधरी की अध्यक्षता वाली 39 सदस्यीय JPC विचार कर रही है. ताकि राज्यों में बार-बार चुनाव कराने,विधानसभाओं के कार्यकाल में बड़ी कटौती की जरुरत नहीं पड़े. पूरे देश को एक साथ चुनावी चक्र में लाने के बजाय दो चरणों के विकल्प पर चर्चा हो रही है.
2029 और 2034 में बढ़ने का विकल्प को सबसे व्यावहारिक माना जा रहा है. पहले चरण में 2029 के लोकसभा विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं. इनमें वे राज्य होंगे जिनका चुनाव चक्र 2029 के आसपास है या समिति बदलाव की जरूरत है. वहीं 2034 तक पूरे देश को साझा चुनावी कलेंडर में लाने का लक्ष्य है. ऐसे में जेपीसी की अवधि 2026 के मानसून सत्र तक बढ़ाई जा चुकी है. फिलहाल जेपीसी विभिन्न राज्यों का दौरा कर जनप्रतिनिधियों, विशेषज्ञों से राय ले रही है.