चंद मिनटों में धराशाही हो गया निगमों का छाया प्रबंधन, तेज अधंड के चलते हवा में उड़ गए ग्रीन शेड

जयपुर: राजधानी में आए तेज अंधड ने एक ही दिन में नगर प्रशासन के हीट प्रबंधन की कुछ ही मिनटों में पोल खोल कर रख दी,गनीमत रही की हीट प्रबंधन में लगाए गए ग्रीन शेड मे लगी बल्लियां किसी राहगीर पर नहीं गिरी,मानों इस अंधड ने दोनों नगर निगमों की ओर से लगाए इस इस ग्रीन शेड को लेकर सुरक्षा संबधी चेतावनी दी हो राजधानी जयपुर के  चौराहों पर रूकने वाले वाहनों के लिए निगम का नवाचार भले ही अच्छा विचार है लेकिन विना सुरक्षा मानको के  बनाया गया  ये ग्रीन शेड आम जनता के लिए जानलेवा बन  रहा है यहीं नही निगम क्षेत्र में आने वाले चौराहों पर किराए पर लगाए गए इस ग्रीन शेड का किराया इतना है कि जितने में तो नगर निगम खुद खरीद कर फीजूली खर्चा बचा सकता था लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते निगम के राजस्व को यूंही लुटाया जा रहा है पेश है एक रिपोर्ट

ग्रेटर नगर निगम की ओर 6 चौराहों पर लगाया गया ग्रीन शेड
6 चौराहों पर एक महीने तक लगाया जाएगा ग्रीन शेड
एक महीने में निगम की ओर से किया जाएगा 2 लाख 42 हजार का भुगतान
इतनी राशि में निगम खुद अपने स्तर पर खरीद सकता था ग्रीन शेड का स्टेक्चर
लेकिन निजी फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए नहीं किया गया ऐसा
वाटरप्रूफ ग्रीन शेड के नाम पर महज लगा दिया गया ग्रीन नेट
243 स्क्वायर फीट ग्रीन शेड का 33 रुपए पर फीट के हिसाब से किया जाएगा भुगतान
वही एक ग्रीन शेड का 37 रुपए फीट के हिसाब से किया जाएगा भुगतान

भले ही ग्रेटर नगर निगम का ग्रीन शेड लगाने का नवाचार आम जनता के बीच बाहबाही लूट रहा हो लेकिन बिना सुरक्षा पैमाने की जांच के बिना लगाया गया ये स्ट्रेक्चर कही लोगो के लिए जानलेवा बनते नजर आ रहे है इसका नजारा कल आमजनता ने बखूबी देखा जब कुछ देर के लिए आए अंधड़ ने इस ग्रीन शेड प्रबंधन की धज्जियां उडा दी  हाल में कुछ दिनों पहले तेज अंधड़ के चलते मुम्बई में एक बड़े होर्डिंग के गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई ऐसे में लकड़ी की बना ये स्ट्रेक्चर क्या तेज आंधी को झेल पाएगा वही दूसरा बड़ा सवाल ये की जितना पैसा नगर निगम इन एक महीने में इस स्ट्रेक्चर का किराया देगा उतने में तो निगम खुद खरीद कर  ये स्ट्रक्चर लगा सकता था लेकिन जिम्मेदार अधिकारी निगम के राजस्व को लेकर लापरवाह नजर आते दिख रहे है

ग्रीन शेड लगाने से पहले नहीं जांचा सुरक्षा पैमाना
तेज आंधी के दौरान ग्रीन शेड के टूटने का है दर
हाल में ही मुंबई में तेज आंधी के चलते गिरा बड़ा होर्डिंग
होर्डिंग के गिरने से एक व्यक्ति की हुई थी मौत
तो ग्रेटर निगम ने ग्रीन शेड लगाने से पहले क्यों नहीं जांचा सुरक्षा पैमाना
वही राजधानी की खूबसूरती को भी बिगाड़ रहा ये स्ट्रेक्चर
हालाकि नवाचार के पीछे उद्देश्य जनता को राहत पहुंचना
लेकिन राहत के साथ अगर प्रॉपर तरीके से होती ये व्यवस्था तो होता ओर भी बेहतर

आमतौर पर कोई भी अस्थाई या स्थाई स्ट्रेक्चर किसी भी सरकारी संस्था द्वारा लगाया जाता है तो उसकी जांच सुरक्षा और उसकी गुणवत्ता को लेकर होती है लेकिन निगम ने जल्द बाहबाही लूटने के चलते राजधानी जयपुर के प्रमुख चौराहों पर लगाए इन स्ट्रेक्चर की ना तो सुरक्षा की जांच करवाई न ही इसकी गुनब्बता देखी दूसरा सवाल ये भी बनाता है कि जो गुलाबी नगरी अपनी सुंदरता और वास्तु के लिए दूर दूर तक फेमस है उसकी अंदर इस तरह का भद्दा स्ट्रेक्चर राजधानी की सुंदरता के आड़े आ रहा है निगम चाहता तो इसको और भी अच्छा रूप देकर आम जनता को धूप से बचा सकता था

सोच अच्छी लेकिन अगर जब काम में रूपयो की बर्बादी हो और आम जनता की जान पर मौत का साया बना रहे तो फिर नवाचार किस काम का

फर्स्ट इंडिया के लिए भारत दीक्षित की रिपोर्ट