केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में तीन बड़े फैसले, रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी को दी मंजूरी

केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में तीन बड़े फैसले, रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी को दी मंजूरी

नई दिल्ली : कैबिनेट मीटिंग के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए बताया कि केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में तीन बड़े फैसले लिए गए हैं. पीएम धारा को कैबिनेट की मंजूरी मिली है. रिन्यूएबल एनर्जी को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है. रबि की फसल के लिए MSP को लेकर भी बड़ा फैसला लिया है.

केंद्र सरकार ने रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी को मंजूरी दी :
केंद्र सरकार ने रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है. मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया गया है. कुसुम के MSP में सबसे ज्यादा 675 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है. सरसों-रेपसीड के MSP में 413 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा हुआ है. मसूर के MSP में 390 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है. जौ के MSP में 136 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है. चना के MSP में 83 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा किया है. गेहूं के MSP में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है.

2027-28 में गेहूं का MSP बढ़कर 2610 रुपये प्रति क्विंटल हुआ, सरसों-रेपसीड का MSP बढ़कर 6613 रुपये प्रति क्विंटल हुआ, मसूर का MSP बढ़कर 7390 रुपये प्रति क्विंटल हुआ, कुसुम का MSP बढ़कर 7215 रुपये प्रति क्विंटल हुआ, चना का MSP बढ़कर 5958 रुपये प्रति क्विंटल हुआ, जौ का MSP बढ़कर 2286 रुपये प्रति क्विंटल हुआ है.

केंद्र ने किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए MSP बढ़ाया है. रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी से फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन मिलेगा. गेहूं पर उत्पादन लागत से 106 प्रतिशत अधिक MSP तय की है. सरसों पर उत्पादन लागत से 96 प्रतिशत अधिक MSP तय की है. मसूर पर उत्पादन लागत से 92 प्रतिशत अधिक MSP तय की है. 2014-15 से 2025-26 तक गेहूं की खरीद बढ़कर 3715 LMT हुई.

2014-15 से 2025-26 तक 6 रबी फसलों की खरीद 3921 LMT हुई हौ. 2014-15 से 2025-26 तक गेहूं किसानों को 7.31 लाख करोड़ रुपये MSP भुगतान हुआ है. 6 रबी फसलों के किसानों को 2014-15 से 2025-26 तक 8.36 लाख करोड़ रुपये MSP भुगतान हुआ है. 2014-15 से 2025-26 में 6 रबी फसलों का MSP भुगतान 8.36 लाख करोड़ रुपये हुआ है. केंद्र सरकार ने दाल और तिलहन की खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया है.

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III योजना को कैबिनेट की मंजूरी:
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है. GEC-III से राज्यों में 135 GW तक नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी संभव होगी. योजना के तहत 50 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम स्थापित होंगे. GEC-III के लिए कुल 1.86 लाख करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट आउटले लगेंगे. इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम के विकास पर 1,36,378 करोड़ रुपये खर्च होंगे. 50 GWh BESS के लिए 50,000 करोड़ रुपये का प्रावधान है. योजना के तहत केंद्र सरकार 54,082 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देगी. केंद्रीय सहायता से इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन शुल्क कम रखने में मदद मिलेगी.

GEC-III योजना FY 2032-33 तक स्थापित करने का लक्ष्य है. बैटरी स्टोरेज से ग्रिड में लचीलापन बढ़ेगा और पीक आवर्स की मांग पूरी होगी. योजना से नवीकरणीय ऊर्जा के ग्रिड एकीकरण और पावर निकासी को बढ़ावा मिलेगा. GEC-III से 2035 तक 900 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य में मदद मिलेगी. ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर से देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी. योजना से कार्बन फुटप्रिंट कम करने और पर्यावरण अनुकूल विकास को बढ़ावा मिलेगा. पावर, मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर मिलेंगे. BESS के निर्माण और तैनाती से घरेलू एनर्जी स्टोरेज उद्योग को बढ़ावा मिलेगा. राज्यों में ऑपरेशन, मेंटेनेंस और ग्रिड मैनेजमेंट में दीर्घकालिक रोजगार के अवसर मिलेगा.

दिल्ली में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को कैबिनेट की मंजूरी:
दिल्ली में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को कैबिनेट की मंजूरी मिली है. दिल्ली के लिए 1,789.52 करोड़ रुपये की ITMS परियोजना मंजूर किए हैं. 42 ट्रैफिक कॉरिडोर को तीन चरणों में कवर किया जाएगा. 24 महीने में ITMS लागू करने का लक्ष्य, 5 साल संचालन और रखरखाव. AI आधारित एडैप्टिव ट्रैफिक सिग्नल से ट्रैफिक संचालन स्मार्ट होगा. रियल टाइम ट्रैफिक डेटा से जाम और सड़क हादसों पर तेज प्रतिक्रिया. एम्बुलेंस और इमरजेंसी वाहनों को ग्रीन कॉरिडोर की सुविधा है.

दिल्ली में 71 लाख एक्टिव रजिस्टर्ड वाहनों को देखते हुए नई व्यवस्था की गई है. 1,092 एडैप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम लगाए जाएंगे. 1,029 स्थानों पर टेक्नोलॉजी आधारित ट्रैफिक एनफोर्समेंट होगा. लाल बत्ती, तेज रफ्तार और गलत दिशा में वाहन चलाने पर ऑटोमेटेड कार्रवाई होगी. हेलमेट, सीट बेल्ट और मोबाइल फोन इस्तेमाल जैसे उल्लंघनों की निगरानी रखी जाएगी. AI से चोरी और हॉटलिस्टेड वाहनों की पहचान में मदद मिलेगी. कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से दिल्ली में एकीकृत ट्रैफिक प्रबंधन होगा. VMS और डिजिटल प्लेटफॉर्म से यात्रियों को रियल टाइम ट्रैफिक जानकारी मिलेगी. पार्किंग, जाम और डायवर्जन की जानकारी यात्रियों को मिलेगी. ITMS से मौजूदा सड़क नेटवर्क का अधिक प्रभावी इस्तेमाल होगा. परियोजना से सुरक्षित सड़कें और सुगम ट्रैफिक व्यवस्था का लक्ष्य है.