180 दिन में फिटनेस नहीं तो वाहन होगा ELV घोषित, परिवहन विभाग के नए निर्देश जारी, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः राजस्थान परिवहन विभाग ने प्रदेश में End of Life Vehicle  के मामलों के निस्तारण और वाहनों को ELV श्रेणी से हटाने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं. आदेश के अनुसार यदि किसी वाहन की फिटनेस अवधि समाप्त होने के बाद 180 दिनों तक नई फिटनेस प्राप्त नहीं की जाती है, तो संबंधित वाहन को पोर्टल के माध्यम से स्वतः End of Life Vehicle (ELV) घोषित कर दिया जाएगा. 

इसी प्रकार यदि फिटनेस जांच के दौरान वाहन अनफिट पाया जाता है और निर्धारित 180 दिनों के भीतर फिटनेस प्रमाणपत्र हासिल नहीं कर पाता है, तो वह भी ELV की श्रेणी में आ जाएगा. हालांकि विशेष परिस्थितियों में पंजीयन प्राधिकारी अपनी संतुष्टि के आधार पर 180 दिन की अवधि बढ़ा सकता है.परिवहन विभाग के सामने पिछले कुछ समय से ऐसे कई मामले आ रहे थे, जिनमें वाहन स्वामी अपने वाहनों को ELV सूची से हटाने की मांग कर रहे थे. इसी को देखते हुए विभाग ने एक मानकीकृत प्रक्रिया तय की है, ताकि केवल पात्र वाहनों को ही राहत मिल सके और नियमों का दुरुपयोग न हो.जारी निर्देशों के अनुसार यदि कोई वाहन स्वामी अपने वाहन को ELV श्रेणी से हटाने के लिए आवेदन करता है, तो उसे पहले यह स्पष्ट करना होगा कि वाहन ELV घोषित होने की स्थिति में क्यों नहीं आना चाहिए. इसके लिए आवश्यक दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे. यदि किसी प्राधिकारी द्वारा पूर्व में वाहन की फिटनेस निरस्त की गई थी, तो उस निरस्तीकरण आदेश की प्रति भी आवेदन के साथ संलग्न करनी होगी.      

इसके अलावा यदि वाहन फिटनेस जांच में फेल हुआ था, तो वाहन स्वामी को यह भी साबित करना होगा कि जिन कमियों या खामियों के कारण वाहन फिटनेस में असफल हुआ था, उन्हें पूरी तरह दूर कर दिया गया है. इसके समर्थन में संबंधित दस्तावेज और प्रमाण भी प्रस्तुत करने होंगे.आदेश में जिला परिवहन अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है. अधिकारियों को वाहन का भौतिक निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी. इस रिपोर्ट में वाहन का पंजीयन नंबर, चेसिस नंबर, इंजन नंबर, निर्माता कंपनी का नाम, ईंधन का प्रकार, पंजीयन वर्ष, फिटनेस निरस्त करने वाले कार्यालय का नाम, ELV घोषित होने का कारण तथा ELV से हटाने का स्पष्ट आधार दर्ज करना अनिवार्य होगा.सभी दस्तावेजों और तथ्यों की जांच के बाद जिला परिवहन अधिकारी अपनी स्पष्ट अनुशंसा के साथ प्रस्ताव परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग को भेजेंगे. विभाग द्वारा अंतिम निर्णय लेने के बाद ही वाहन को ELV सूची से हटाया जा सकेगा.