लोकसभा के 37वें अंतर्राष्ट्रीय विधायी मसौदा कार्यक्रम, 17 देशों के 43 प्रतिनिधियों ने लिया भाग, देखिए खास रिपोर्ट

लोकसभा के 37वें अंतर्राष्ट्रीय विधायी मसौदा कार्यक्रम, 17 देशों के 43 प्रतिनिधियों ने लिया भाग, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः लोकसभा के 37वें अंतर्राष्ट्रीय विधायी मसौदा कार्यक्रम के तहत 17 देशों के 43 प्रतिभागियों ने देखी राजस्थान विधानसभा. विदेशी प्रतिभागियों के साथ राजस्थान विधान सभा के सदस्यों की हुई विधायी मसौदे पर चर्चा.स्पीकर देवनानी ने कहा कि भारत अमृतकाल की ओर अग्रसर वही राजस्थान विधान सभा अपनी गौरवशाली स्थापना की मना रही है 75वीं वर्षगांठ. देवनानी ने कहा है कि कानून निर्माण में विधायी मसौदा महत्वपूर्ण होता है. उन्होंने कहा कि विधायी मसौदे में स्पष्ट व सरल भाषा में जनता की इच्छाएं प्रतिबिंबित होनी चाहिए.

विधान सभा में इन्टरनेशनल लेजिस्लेटिव ड्रॉफ्टिंग विषय पर विधायी मसौदा तैयार करने के लिए 37 वें अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ. यह कार्यक्रम भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग योजना के अंतर्गत लोकसभा सचिवालय के पार्लियामेन्ट्री रिसर्च एण्ड ट्रेनिंग इन्स्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसिस द्वारा आयोजित किया गया. देवनानी ने बांग्लादेश, भूटान, घाना, केन्या, श्रीलंका, तंजानिया, जाम्बिया सहित 17 देशों के 43 प्रतिभागियों से परिचय किया. स्पीकर  देवनानी ने कहा कि राजस्थान विधान सभा में विधेयक को पारित कराने की प्रक्रिया अत्यन्त सावधानी पूर्वक और पारदर्शी तरीके से की जाती है. कानून में सर्वोत्तम गुणवत्ता के सभी पहलुओं का समावेश सुनिश्चित किया जाता है. देवनानी ने कहा कि किसी भी विधेयक का प्रस्ताव की प्रक्रिया तीन मुख्य चरणों से गुजरती है. उन्होंने कहा कि विधेयक सदन में प्रस्तुत किया जाता है. द्वितीय चरण में विधेयक पर गहन चर्चा के साथ मसौदे को बेहतर बनाने के लिए अक्सर विशेष समितियों की मदद से हर पहलू का बारीकी से विश्लेषण कराये जाने के पश्चात सदन मतदान के लिए एकत्रित होता है. देवनानी ने कहा कि राजस्थान विधान सभा लोकतंत्र का सच्चा मंदिर है. यहां सभी का एक साथ विकास करने और महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा कानून पारित कराये जाते है विधान सभा अपने गौरवशाली स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मना रही है.

कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष श्री टीकाराम जूली, सरकारी मुख्य सचेतक  जोगेश्वर गर्ग, प्रतिपक्ष के मुख्य सचेतक  रफीक खान, विधायक डॉ. गोपाल शर्मा,  चन्द्रभान सिंह आक्या,  कैलाश वर्मा,  गुरवीर सिंह, डॉ. शिखा मील बराला मौजूद थे. राजस्थान विधान सभा के प्रमुख सचिव भारत भूषण शर्मा, लोकसभा के प्राइड कार्यक्रम के निदेशक राजकुमार और कार्यक्रम निदेशक के. एम. चतुर्वेदी ने 37वें प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी दी. भूटान की नेशनल एसेम्बली सचिवालय की विधायी अधिकारी फूर्पा डेमा ने धन्यवाद संबोधन दिया. स्पीकर देवनानी ने कहा कि गुलाबी शहर जयपुर का गुलाबी सदन राजस्थान विधान सभा पूरे देश के लिए आदर्श बन गया है. उन्होंने कहा कि राजस्थान विधान सभा ने सभी विधायी अभिलेखों को डिजिटाइज करके सुदृढ भविष्य को सुनिश्चित कर लिया है.    

तनजानिया, केन्या और मलेशिया के प्रतिभागियों ने कार्यक्रम के दौरान केंद्र और राज्य के विषय, महिला आरक्षण, दल-बदल विरोध अधिनियम तथा प्राइवेट बिलों से संबंधित प्रश्न किए. प्रश्नों के उत्तर में सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग और रफीक खान ने विस्तृत रूप से जानकारी प्रदान करते हुए विधायी प्रक्रिया के व्यावहारिक पहलुओं को स्पष्ट किया. विदेशी प्रतिभागियों और विधायकों के मध्य सार्थक संवाद हुआ. लगभग एक घंटे चले संवाद में लोकतंत्र के विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई. विदेशी प्रतिभागियों ने राजस्थान विधान सभा के राजनैतिक आख्यान संग्रहालय की सराहना की.