भजनलाल सरकार की लोकल फॉर वोकल और मेड इन इंडिया नीति, सरकारी खरीद में मेक इन इंडिया और राजस्थान के एमएसई को बढ़ावा

जयपुर : भजनलाल सरकार की लोकल फॉर वोकल और मेड इन इंडिया नीति में सरकारी खरीद में मेक इन इंडिया और राजस्थान के एमएसई को बढ़ावा देने के लिए सरकारी खरीद में स्थानीय उद्योगों को प्राथमिकता मिलेगी. सरकारी खरीद में स्थानीय उद्योगों, विशेष रूप से राजस्थान के सूक्ष्म, लघु उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए अधिसूचना जारी की गई है. सरकारी विभागों और खरीद संस्थाओं को देश में निर्मित वस्तुओं और सेवाओं को प्राथमिकता देनी होगी. 

उन आपूर्तिकर्ताओं को "क्लास-I स्थानीय आपूर्तिकर्ता" माना जाएगा. जिनकी वस्तुओं या सेवाओं में स्थानीय सामग्री की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत या उससे अधिक होगी. 50 % से कम स्थानीय सामग्री वाले आपूर्तिकर्ताओं को "गैर-क्लास-I स्थानीय आपूर्तिकर्ता" की श्रेणी में रखा जाएगा. खरीद प्राथमिकता का अंतर (मार्जिन ऑफ परचेज प्रिफरेंस) 20 प्रतिशत निर्धारित किया गया है. सरकार ने सरकारी खरीद में राजस्थान के एमएसई इकाइयों को विशेष लाभ प्रदान किया है.

यदि किसी निविदा में न्यूनतम दर (एल-1) वाला बोलीदाता राजस्थान का एमएसई नहीं है. तब भी निर्धारित शर्तों के तहत राजस्थान के एमएसई को खरीद का एक हिस्सा उपलब्ध कराया जाएगा. इसके लिए संबंधित एमएसई को एल-1 दर पर सामग्री उपलब्ध कराने का अवसर दिया जाएगा. अधिसूचना के अनुसार यदि एल-1 बोलीदाता राजस्थान के बाहर का क्लास-I स्थानीय आपूर्तिकर्ता तो उसे केवल 20 % मात्रा का ऑर्डर दिया जाएगा,  जबकि शेष 80% मात्रा के लिए राजस्थान के एमएसई को खरीद प्राथमिकता मिलेगी.

यदि एल-1 बोलीदाता राजस्थान का गैर-एमएसई क्लास-I स्थानीय आपूर्तिकर्ता है तो उसे 50% मात्रा का ऑर्डर मिलेगा व शेष 50 % मात्रा राजस्थान के एमएसई को दी जाएगी. यदि एल-1 बोलीदाता राजस्थान का गैर-एमएसई और गैर-क्लास-I स्थानीय आपूर्तिकर्ता तो उसे 20 प्रतिशत मात्रा का ऑर्डर मिलेगा. 40% मात्रा राजस्थान के एमएसई के लिए आरक्षित खरीद प्राथमिकता के तहत उपलब्ध होगी. राजस्थान के बाहर के गैर-क्लास-I स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं के मामलों में भी 40 प्रतिशत तक खरीद प्राथमिकता मिलेगी पात्र स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं को राजस्थान के सूक्ष्म व लघु उद्यमों से की जाने वाली खरीद में से 4% हिस्सा SC,ST के लिए आरक्षित होगा. 

इससे इन वर्गों के उद्यमियों को सरकारी खरीद प्रक्रिया में अधिक अवसर मिल सकेंगे. खरीद प्राथमिकता का लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र बोलीदाताओं को एल-1 दर का मिलान करना होगा. यदि सबसे कम दर वाला पात्र बोलीदाता एल-1 दर पर आपूर्ति करने के लिए तैयार नहीं होता या पूरी मात्रा उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं होता है, तो यही अवसर क्रमशः अन्य पात्र बोलीदाताओं को दिया जाएगा. हालांकि यदि खरीदी जाने वाली वस्तु या कार्य विभाज्य नहीं है, तो अनुबंध मूल एल-1 बोलीदाता को ही मिलेगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अधिसूचना राजस्थान में स्थानीय विनिर्माण,  सूक्ष्म और लघु उद्योगों और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम है. यह राज्य में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ "मेक इन इंडिया" को मजबूती मिलेगी. "आत्मनिर्भर भारत" अभियानों को भी मजबूती प्रदान करेगी. इससे घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. साथ ही सरकारी धन का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा.  RTPP 2012,2013 के तहत अधिसूचना जारी हुई है.