शराब तस्करी रोकना आबकारी विभाग के लिए चुनौती, दूसरे राज्यों से अवैध शराब आने की आशंका, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः राजस्थान में पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव होने वाले हैं और गांवों में चुनावी सरगर्मियां तेज होने के साथ अवैध शराब की बिक्री और तस्करी पर भी नजरें हैं. चुनाव के दौरान शराब का इस्तेमाल रोकना आबकारी विभाग के लिए बड़ी चुनौती हो सकता है. दूसरे राज्यों से राजस्थान में अवैध शराब की खेप आने की आशंका के बीच विभाग की क्या तैयारी है, बॉर्डर से लेकर गांवों तक कैसे होगी निगरानी.

राजस्थान में पंचायत चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. गांवों में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने के साथ ही प्रशासन के सामने चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने की चुनौती भी है. चुनाव के दौरान सबसे बड़ी निगरानी अवैध शराब की बिक्री और सप्लाई पर रहेगी. आशंका रहती है कि शराब की अवैध खेप गांवों तक पहुंचाने की कोशिश हो सकती है. ऐसे में आबकारी विभाग के सामने अवैध शराब की तस्करी रोकने के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में इसकी बिक्री पर अंकुश लगाने की चुनौती होगी.  सबसे बड़ा सवाल दूसरे राज्यों से आने वाली शराब को लेकर है. राजस्थान की सीमाएं कई राज्यों से लगती हैं और चुनावी माहौल में दूसरे राज्यों से अवैध शराब की संभावित तस्करी पर निगरानी बढ़ाना जरूरी होगा. बॉर्डर चेक पोस्ट, हाईवे, प्रमुख रास्तों और संदिग्ध वाहनों की जांच. साथ ही शराब के अवैध भंडारण और बिक्री वाले संभावित ठिकानों पर कार्रवाई आबकारी विभाग के लिए अहम होगी.

इस बीच आबकारी आयुक्त 15 अक्टूबर को विभागीय समीक्षा बैठक भी करेंगे.  बैठक में आबकारी राजस्व से लेकर बकाया वसूली तक, पांच प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा होगी. बैठक में संबंधित अधिकारियों को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं. बैठक में पांच प्रमुख एजेंडों को शामिल किया गया है. इनमें आबकारी राजस्व की समीक्षा, मदिरा उठाव की समीक्षा, आबकारी बंदोबस्त की समीक्षा, निरोधात्मक गतिविधियों की समीक्षा और बकाया वसूली की समीक्षा शामिल है. इन सभी बिंदुओं पर अधिकारियों से जानकारी लेकर विभागीय कार्यों की प्रगति का आकलन किया जाएगा. इस समीक्षा बैठक में समस्त अतिरिक्त आबकारी आयुक्त जोन, उपायुक्त निरोधक दल, जिला एवं सामान्य शाखा के सहायक आबकारी अधिकारी, निरोधक दल के सहायक आबकारी अधिकारी, आबकारी निरीक्षक और प्रहराधिकारी उपस्थित रहेंगे. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होने वाली इस बैठक में विभागीय कामकाज की समीक्षा के साथ राजस्व और बकाया वसूली से जुड़े मामलों पर भी फोकस रहेगा.     

चुनाव में अवैध शराब की सप्लाई सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से भी जुड़ा मुद्दा है.  आबकारी विभाग के सामने चुनौती दो स्तरों पर होगी—एक तरफ दूसरे राज्यों से आने वाली संभावित खेप को रोकना और दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर होने वाली अवैध बिक्री और भंडारण पर शिकंजा कसना.  पंचायत चुनाव जैसे-जैसे करीब आएंगे, गांवों में चुनावी गतिविधियां भी बढ़ेंगी. ऐसे में आबकारी विभाग के सामने अवैध शराब की सप्लाई चेन को तोड़ने की चुनौती होगी. अब निगाह इस बात पर रहेगी कि विभाग बॉर्डर से लेकर गांव के स्तर तक किस तरह की निगरानी व्यवस्था लागू करता है और चुनाव के दौरान कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है.